वर्ष 2025 तक भयंकर जल संकट वाला देश बन जाएगा भारत

वर्ष 2025 तक भयंकर जल संकट वाला देश बन जाएगा भारत नई दिल्ली: देश के अलग-अलग हिस्सों की प्यास से जुड़ी तस्वीरें दिखाने के बाद, अब हम पानी से संबंधित कुछ चिंताजनक आंकड़े आपके सामने रखना चाहते हैं। ये वो आंकड़े हैं जो आपको ना तो कहीं देखने को मिलेंगे और ना ही कोई आपको पानी की गंभीर स्थिति के बारे में बताएगा।

एवरीथिंग अबाउट वॉटर नाम की कंसल्टिंग फर्म की रिपोर्ट के मुताबिक भारत, वर्ष 2025 तक भयंकर जल संकट वाला देश बन जाएगा। इस रिपोर्ट के मुताबिक देश की सिंचाई का करीब 70 फीसदी और पानी की घरेलू खपत का 80 फीसदी हिस्सा भूमिगत जल से पूरा होता है, जिसका स्तर तेजी से घटता जा रहा है।

पिछले एक दशक के अंदर भू-जल स्तर में आई गिरावट को अगर इस आंकड़े की मदद से समझने की कोशिश करें तो अब से दस वर्ष पहले तक, जहां 30 मीटर की खुदाई पर पानी मिल जाता था वहां अब पानी के लिए 60 से 70 मीटर तक की खुदाई करनी पड़ती है।

सीधे शब्दों में कहें तो धरती जितना जल दे रही है, उसे इसके अनुपात में बहुत कम जल वापस मिल रहा है।

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के एक आंकड़े के मुताबिक, भारत में लगभग 9 करोड़ से ज़्यादा लोगों को पीने का साफ पानी उपलब्ध नहीं है और ये आंकड़ा सिर्फ शहरी आबादी का है। ग्रामीण इलाकों की बात करें, तो वहां 70 फीसदी लोग अब भी गंदा पानी पीने पर मजबूर हैं।

एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री यानी एसोचैम और मौसम का हाल बताने वाली कंपनी स्काईमेट वेदर सर्विसेज की स्टडी के मुताबिक साल में गर्म दिनों की संख्या बढ़ती जा रही है और दिन और रात का तापमान बढ़ रहा है जिसकी वजह से देश में सूखे के हालात बनते जा रहे हैं।

-रिपोर्ट में कहा गया है, आज भारत के 9 राज्य सूखे की स्थिति का सामना कर रहे हैं।

-रिपोर्ट के मुताबिक, देश के कई क्षेत्रों में हवा का वार्षिक तापमान बढ़ रहा है यानी हवा ज़्यादा गर्म हो रही है।

-वर्ष 1951 से 2013 के बीच गर्म दिनों की संख्या बढ़ी है और दिन और रात के तापमान भी बढ़ गए हैं।

-इतना ही नहीं जिन इलाकों में तापमान बढ़ रहा है वहां वर्ष 1960 से ही मॉनसून में गिरावट आ रही है।

-वर्ष 1990 से 2000 के दौरान औसतन एक दशक में एक साल का सूखा पड़ता था।

लेकिन वर्ष 2000 से 2015 के बीच, 15 साल में पांच साल का सूखा पड़ा है यानी औसतन हर तीन वर्ष में एक बार सूखा पड़ा है।

रिपोर्ट के मुताबिक अगले कुछ महीनों में देश के कई इलाक़ों में लातूर जैसी स्थिति बन सकती है और कुछ हिस्सों में बाढ़ के हालात भी बन सकते हैं। यानी कुदरत का कहर देखने को मिलेगा इन आंकड़ों को देखने के बाद जो तस्वीर बन रही है वो बहुत डरावनी है। जिस तरह मछली बिना पानी के तड़पती है ठीक उसी तरह भारत, आने वाले समय में बिना पानी के तड़पने पर मजबूर हो सकता है।

हमें पानी के महत्व को समझना होगा और अपनी विशाल जनसंख्या की प्यास बुझाने का इंतज़ाम करना होगा। ये एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है और हम एक ज़िम्मेदार न्यूज़ चैनल होने के नाते सिस्टम को इस ज़िम्मेदारी का एहसास कराने की कोशिश कर रहे हैं।

आपसे भी हमारी गुज़ारिश है कि आज से ही पानी को बचाने की पहल शुरू कर दीजिए। बूंद-बूंद पानी को बचाकर सागर बनाया जा सकता है और इस बचत में हर बूंद का महत्व है इसलिए अपने हिस्से का योगदान आप ज़रूर दीजिए।
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