Wednesday, 01 April 2020  |   जनता जनार्दन को बुकमार्क बनाएं
आपका स्वागत [लॉग इन ] / [पंजीकरण]   
 

पाकिस्तान ने अनुपम खेर को वीजा देने से किया इंकार

पाकिस्तान ने अनुपम खेर को वीजा देने से किया इंकार नई दिल्ली: कराची साहित्य सम्मेलन में भाग लेने के लिए जाने वाले अभिनेता अनुपम खेर को पाकिस्तान सरकार ने वीज़ा देने से इनकार कर दिया है।  उन्हें 5 फ़रवरी से शुरू होने वाले कराची लिट्रेचर फेस्टिवल में शिरकत करने जाना था।

वीज़ा देने से इनकार किए जाने पर अनुपम खेर ने कहा है कि 'मैं वीज़ा नहीं मिलने से बहुत हैरान हूं। लिट्रेचर फेस्टिवल में 18 लोगों को जाना है जिसमें से 17 लोगों को वीज़ा दिया गया लेकिन मुझे वीज़ा नहीं दिया गया।

अपनी बात पूरी करते हुए अनुपम खेर ने कहा हम उनके कलाकारों का भारत में स्वागत करते हैं। अगर भारत में एक जगह पर उनकी प्रस्तुति पर आपत्तियां होती है तो दूसरे जगह उनका स्वागत होता है। लेकिन यह पारस्परिक नहीं है। वीजा नहीं दिये जाने के मुद्दे पर खेर ने कहा ‘काश मैं जान पाता।

मैं सोच रहा हूं कि क्या यह मेरे कश्मीरी पंडित होने या भारत में सहिष्णुता पर बहस में मेरे विचारों के कारण हुआ है। खेर ने बताया कि वीजा नहीं मिलने के कारण महोत्सव के आयोजकों को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा और उन्होंने खेद भी जताया है।

वहीं इस मामले पर पाक उच्चायुक्त ने कहा है कि 'अनुपम खेर ने वीज़ा के लिए अर्ज़ी ही नहीं दी थी। उनसे पूछिए क्या उनके पास कोई रसीद है।' बताया जा रहा है कि 2015 में भी अनुपम को पाकिस्तान ने वीज़ा देने से इंकार कर दिया था।

विवादों में खेर
पिछले कुछ समय से अनुपम खेर विवादों में घिरे हुए हैं। हाल ही में ट्विटर पर उनके और कांग्रेस नेता शशि थरूर के बीच तीखी बहस देखने को मिली। खेर ने अपने एक बयान में कहा था कि इन दिनों उन्हें यह जाहिर करने में डर लगता है कि वह एक हिंदू हैं।

इसके बाद थरूर ने ट्विटर पर लिखा ‘अनुपम। मैं तो बहुत ही गर्व से कहता हूं कि मैं हिंदू हूं। हां बस संघ की तरह का हिंदू नहीं हूं।’ इसके बाद 60 वर्षीय खेर ने थरूर को ‘कांग्रेसी चमचा’ कह दिया।

इससे पहले जयपुर साहित्य सम्मेलन में भी अनुपम और आम आदमी पार्टी के नेता कपिल मिश्रा के बीच 'ज़ुबानी जंग' हो गई थी। कार्यक्रम में असहिष्णुता मुद्दे पर खेर ने कहा कि भारत ही ऐसा देश हैं, जहां कोई प्रधानमंत्री को कायर और मनोरोगी कह सकता है और उससे बच सकता है।

इस पर मिश्रा ने कहा 'क्या इस देश में केवल एक व्यक्ति अपने मन की बात कह सकता है? सभी ऐसा कर सकते हैं। नेताओं को मुझे नहीं बताना चाहिए कि मैं ट्विटर या फेसबुक पर क्या लिखूं। वे लोग जिन्होंने देश की संस्कृति और धर्म में स्थान प्राप्त कर लिया है उन्हें ही हमारे धर्म का ज्ञान नहीं है।
अन्य चर्चा में लेख
वोट दें

क्या विजातीय प्रेम विवाहों को लेकर टीवी पर तमाशा बनाना उचित है?

हां
नहीं
बताना मुश्किल
 
stack