9वें जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का भव्‍य आगाज,वसुंधरा राजे ने किया उद्घाटन

9वें जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का भव्‍य आगाज,वसुंधरा राजे ने किया उद्घाटन जयपुर: एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा की आत्मकथा 'द ज़ी फैक्टर : माई जर्नी एज द रॉंग मैन एट द राइट टाइम' का विमोचन गुरुवार को ज़ी जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में किया गया। कई गणमान्‍य लोगों की मौजूदगी में आज दोपहर 12.30 बजे इस आत्‍मकथा का विमोचन हुआ। इस दौरान एमजे अकबर और वल्‍लभ भंसाली भी मौजूद रहे।

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के दौरान डा. सुभाष चंद्रा ने कहा कि भ्रष्‍टाचार के बिना भी बिजनेस संभव है। पैसा अहंकारी बना सकता है। उन्‍होंने अपने जीवन से जुड़ी कुछ बातों को साझा करते हुए कहा कि कभी मुझे भी आर्म्‍स डील का ऑफर मिला था लेकिन मैंने मना कर दिया। आर्म्‍स डील से बेहतर है लोगों का मनोरंजन करना।  

गौर हो कि राजस्‍थान की राजधानी और 'गुलाबी नगरी' जयपुर में 9वें ज़ी लिटरेचर फेस्टिवल का गुरुवार सुबह भव्‍य आगाज हुआ। राजस्‍थान की मुख्‍यमंत्री वसुंधरा राजे ने दीप प्रज्‍जवलित कर इस फेस्टिवल का आज उद्घाटन किया। इस अवसर पर देश-विदेश के कई दिग्‍गज लेखक व अन्‍य गणमान्‍य अतिथि उपस्थित थे। यह साहित्‍य उत्‍सव पांच दिनों तक चलेगा।

इससे पहले, द ज़ी फैक्टर : माई जर्नी एज द रॉंग मैन एट द राइट टाइम शीर्षक से डॉ. सुभाष चंद्रा के साथ प्रांजल शर्मा द्वारा लिखित और हार्पर कॉलिंस प्रकाशन से मुद्रित इस आत्मकथा का विमोचन बुधवार शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आवास 7 रेस कोर्स रोड में किया। इस मौके पर आमंत्रित विशिष्ट मेहमानों ने डॉ. सुभाष चंद्रा के साथ अनुभवों को साझा किया।

इस आत्मकथा के बारे में कहा जाता है कि यह जीवन के अनुभवों की कुंजी है। किस तरह से 17 रुपये लेकर घर से निकला एक लड़का आज 17 हजार करोड़ का मालिक बन जाता है। एस्सेल ग्रुप और ज़ी नेटवर्क के प्रमोटर सुभाष चंद्रा के बारे में पीएम मोदी ने कहा कि सुभाष जी में रिस्क लेने की जबरदस्त क्षमता है।

इस किताब को हार्पर कोलिन्स की ओर से प्रकाशित किया गया है और कल (गुरुवार) से यह संबद्ध दुकानों में उपलब्ध हो जाएगा। फ्लिपकार्ट और अमेज़न इंडिया पर प्री-ऑर्डर के लिए यह पहले से ही उपलब्ध है। पुस्तक प्रोमो, कार्यक्रम अपडेट, और पुस्तक के कुछ अंश ट्विटर और फेसबुक पर भी उपलब्ध होंगे।

डॉ. सुभाष चंद्रा जो भारत के मीडिया मुगल के तौर पर जाने जाते हैं, ने साल 1992 में देश का पहला उपग्रह हिंदी चैनल ज़ी टीवी और बाद में पहला प्राइवेट न्‍यूज चैनल को लॉन्‍च कर टेलीविजन उद्योग में एक क्रांति ला दी। इन्‍हें भारत में सैटेलाइट टीवी क्रांति का जनक कहा जाता है।

साल 2011 में डा. सुभाष चंद्रा को इंटरनेशनल एमी डॉयरेक्‍टोरेट अवॉर्ड से भी नवाजा गया। डा. चंद्रा यह अवॉर्ड पाने वाले पहले भारतीय हैं। इन्‍हें यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्‍ट लंदन ने भी डाक्‍टरेट की मानद उपाधि प्रदान की है।

इन्‍होंने तालीम (मल्टीमीडिया के माध्यम से मुक्ति और सशक्तिकरण के लिए अंतर्राष्ट्रीय वैकल्पिक लर्निंग) की स्‍थापना करने के बाद देश में एक प्रभावशाली परोपकारी के रूप में अपनी छाप छोड़ी है। जिसका (तालीम) उद्देश्‍य डिस्‍टेंस और ओपन लर्निंग के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच प्रदान करना है।

डा. चंद्रा भारत के एकल विद्यालय फाउंडेशन के अध्यक्ष भी हैं। इस अभियान का मूल उद्देश्‍य ग्रामीण और आदिवासी भारत से निरक्षरता का उन्मूलन है। यह फाउंडेशन एक शिक्षक वाले स्कूलों के माध्यम से देश के 27,000 गांवों में लगभग आठ लाख आदिवासी बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करता है।
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