दिल्ली पुलिस के लिए कैसा रहा वर्ष 2015 ?

जनता जनार्दन डेस्क , Dec 27, 2015, 15:48 pm IST
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दिल्ली पुलिस के लिए कैसा रहा वर्ष 2015 ? नयी दिल्ली: अल-कायदा की योजना को विफल करना, आईएसआई समर्थित एक जासूसी गिरोह का खुलासा और तेल मंत्रालय से गोपनीय दस्तावेजों की चोरी करते गिरोह का पर्दाफाश जहां इस साल दिल्ली पुलिस की बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहा, वहीं केरल हाउस की कैंटीन पर ‘छापेमारी’ के बाद दिल्ली पुलिस राजनीतिक विवाद के केंद्र में भी आ गई।

इस साल दिल्ली पुलिस और आप सरकार के बीच विभिन्न मुद्दों पर खींचतान बनी रही। दिल्ली पुलिस ने विभिन्न आरोपों के तहत आप के पांच विधायकों को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद शहर की सत्ताधारी सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।

पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर की रहस्यमयी मौत को हत्या के मामले के रूप में दर्ज किया जा चुका है, फिर भी इस मामले की जांच से जुड़ा रहस्य अभी बरकरार है। सुनंदा पिछले साल 17 जनवरी को दिल्ली के एक पांच सितारा होटल में मृत अवस्था में पाई गई थीं।

आम आदमी पार्टी के पांच विधायकों- जितेंद्र सिंह तोमर (तत्कालीन कानून मंत्री), मनोज कुमार, कमांडो सुरेंद्र सिंह, सोमनाथ भारती और अखिलेश त्रिपाठी को विभिन्न आरोपों के तहत गिरफ्तार किया गया। ये आरोप जालसाजी और धोखाधड़ी से लेकर घरेलू हिंसा, हत्या के प्रयास और एससी/एसटी (अत्याचार रोकथाम) कानून से जुड़े थे।

दिल्ली पुलिस और आप सरकार के बीच की खींचतान में कई मोड़ आते रहे। आप ने पुलिस के संयुक्त आयुक्त एम के मीणा की नियुक्ति भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) के प्रमुख के रूप में किए जाने का कड़ा विरोध किया था। यहां तक कि पार्टी ने एक सर्वेक्षण के आधार पर दिल्ली पुलिस पर सबसे अधिक भ्रष्ट होने का आरोप भी लगाया था।

यह तनातनी उस समय बढ़ गई थी, जब आप सरकार ने एक आवासीय सोसाइटी में दिल्ली पुलिस के आयुक्त बी एस बस्सी की सदस्यता और अपार्टमेंटों की खरीद को लेकर उन पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। इनमें से एक अपार्टमेंट बस्सी ने अपने भाई को बेच दिया था।

सीएनजी फिटनेस प्रमाणन से लेकर प्याज की खरीद तक के मामलों में कथित ‘घोटालों’ के सिलसिले में एसीबी ने वरिष्ठतम सरकारी अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू करने में नहीं हिचकी । वहीं शीर्ष पुलिस अधिकारी एक के बाद एक लगने वाले आरोप के जवाब में हमले बोलते रहे।

इस साल भी महिलाओं और बच्चों के यौन उत्पीड़न के मामले बढ़े। रिकॉर्ड के अनुसार, 31 अक्तूबर तक बलात्कार के कुल 1856 मामले दर्ज किए गए और इनमें से 824 मामलों के पीड़ित 18 साल से कम उम्र के थे। वर्ष 2014 में बलात्कार के 2166 मामले दर्ज किए गए, जिनमें से 1004 पीड़ित नाबालिग थे।

फरवरी में दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने तेल एवं पेट्रोलियम मंत्रालय समेत विभिन्न कार्यालयों से कथित तौर पर खुफिया दस्तावेज चुराने वाले एक खुफिया नेटवर्क का पर्दाफाश किया और पांच कॉरपोरेट अधिकारियों, एक लेखक और एक उर्जा सलाहाकार समेत कुल 13 लोगों को गिरफ्तार किया। दिल्ली पुलिस उस समय विपक्षी दलों के निशाने पर आ गई थी, जब उसके एक दल ने केरल हाउस की कैंटीन में गौमांस परोसे जाने की शिकायत के बाद 26 अक्तूबर को कैंटीन की तलाशी ली।

केरल के मुख्यमंत्री ओमन चांडी समेत अधिकतर विपक्षी दलों ने इस कार्रवाई की निंदा करते हुए ‘छापेमारी’ को देश के संघीय ढांचे पर चोट करार दिया। बाद में दिल्ली पुलिस ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह के निर्देश पर हिंदू सेना के नेता विष्णु गुप्ता और उनके सहयोगी को गिरफ्तार किया। गुप्ता ने ही इस मामले में शिकायत दर्ज कराई थी। सिंह ने पुलिस प्रमुख बी एस बस्सी को ये निर्देश भी दिए कि ‘‘भविष्य में ऐसी शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए सावधानी बरती जाए।

अप्रैल में, दिल्ली पुलिस की विशेष सेल ने एक वांछित गैंगस्टर नीरज बवाना को गिरफ्तार कर लिया था, जबकि उसके मामा और पूर्व निर्दलीय विधायक रामबीर शौकीन को अदालत द्वारा घोषित अपराधी करार दे दिया गया। शौकीन अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर है। जून में, दिल्ली पुलिस ने स्कूल में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के लिए आरक्षित सीटों पर कथित तौर पर प्रवेश दिलाने में लिप्त तीन मॉड्यूलों का पर्दाफाश किया और तीन अलग-अलग मामलों के तहत 10 लोगों को गिरफ्तार किया।

पुलिस इस संदर्भ में 200 से ज्यादा लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। इन लोगों में स्कूल के प्राचार्य, क्लर्क और माता-पिता शामिल हैं। हालांकि अब तक इनमें से किसी का भी नाम आरोप पत्र में शामिल नहीं किया गया है। पुलिस को एक उज्बेक महिला के अपहरण की जांच के संदर्भ में बहुत आलोचनाएं झेलनी पड़ीं। यह महिला सितंबर के अंत में लापता हुई थी और फिर छह सप्ताह से कुछ अधिक समय के बाद मृत मिली।

26 नवंबर को दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने के.खान नामक एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया, जो कि कथित तौर पर पाकिस्तान का जासूस था और यहां आईएसआई की मदद से एक खुफिया गिरोह चला रहा था। इसके बाद पुलिस ने दावा किया था कि खुफिया गिरोह के संबंध पाकिस्तान उच्चायोग में मौजूद किसी व्यक्ति से भी हैं।

खान को पकड़े जाने के बाद बीएसएफ में कार्यरत अब्दुल रशीद, सेना के पूर्व हवलदार मुनव्वर मीर और जम्मू-कश्मीर के रजौरी जिले के स्कूली शिक्षक सबर को भी गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा सेना में कार्यरत बंदूकधारी फरीद खान को भी पकड़ा गया।

दिसंबर में दिल्ली पुलिस ने अलकायदा के एक मॉड्यूल का भी पर्दाफाश किया और तीन लोगों को गिरफ्तार किया। इसके साथ ही पुलिस ने भारतीय उपमहाद्वीप में सक्रिय अलकायदा मॉड्यूल के प्रमुख की पहचान भी सुनिश्चित कर ली। पुलिस ने उसकी पहचान मौलाना आसिम उमर के रूप में बताई है, जो अब तक इंटरनेट पर वीडियो में चेहरा ढंककर नजर आता रहा है।

वर्ष 2015 में पहली बार, दिल्ली यातायात पुलिस ने दुर्गा मूर्ति विसर्जन, दिवाली और भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन के दौरान दिल्ली की भीड़ भरी सड़कों पर निगरानी के लिए और यातायात के परिचालन के नियमन के लिए हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया।
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