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अशोक वाजपेयी ने भी लौटाया साहित्य अकादमी पुरस्कार

जनता जनार्दन संवाददाता , Oct 07, 2015, 19:02 pm IST
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अशोक वाजपेयी ने भी लौटाया साहित्य अकादमी पुरस्कार नई दिल्ली: पंडित जवाहरलाल नेहरू की रिश्तेदार नयनतारा सहगल के बाद जानमाने साहित्यकार अशोक वाजपेयी ने भी बुधवार को साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटा दिया. दोनों ने दादरी में बीफ खाने की अफवाह के बाद एक शख्स के मर्डर और कुछ साहित्यकारों की हत्या होने के विरोध में यह पुरस्कार लौटाया है.

वाजपेयी ने देश में भगवा विचारधारा को निशाने पर लिया. उन्होंने कहा, 'यह बांझ विचारधारा है. इस विचार को मानने वालों की सबसे बड़ी समस्या यही है कि इन्हें साहित्य, इतिहास और संस्कृति की कोई समझ नहीं होती है.'

अपने फैसले के बारे में कहा- एक व्यक्ति की सिर्फ इस अफवाह पर हत्या कर दी गई कि उसने गोमांस खाया था? प्रधानमंत्री को ऐसा अपराध करने वालों को रोकना होगा. जिन लोगों को कुचला जा रहा है, रौंदा जा रहा है, उन्हें बचाने के लिए हम जैसे लोगों को आगे आना होगा.

वाजपेयी के मुताबिक मौजूदा सरकार ने नेशनल बुक ट्रस्ट के प्रमुख (बलदेव शर्मा) पर जिसे बैठाया है, उनका किताबों से क्या लेना-देना है? ऐसे ही पुणे के एफटीआईआई जैसे संस्थान के प्रमुख के तौर पर अनजाने से एक्टर (गजेंद्र चौहान) को बैठा दिया गया है। भगवा विचारधारा की समस्या यह है कि इसके पास पर्याप्त लेखक, कलाकार नहीं हैं.

अशोक वाजपेयी ने कहा कि तर्कशास्त्री नरेंद्र दाभोलकर, लेफ्ट के नेता और लेखक गोविंद पानसरे और कन्नड़ भाषा के साहित्यकार एमएम कुलबर्गी के हत्यारे आज तक नहीं पकड़े गए हैं। दादरी में एक शख्स को सिर्फ इसलिए मार दिया जाता है कि उसके यहां बीफ होने की अफवाह उड़ती है। यह सरकार और समाज की नाकामी है.

वाजपेयी के मुताबिक, 'इन घटनाओं के लिए सरकार और समाज-दोनों की जिम्मेदार हैं। दादरी की घटना यूपी में हुई है, जहां बीजेपी की सरकार नहीं है। कुलबर्गी की हत्या कर्नाटक में हुई है, जहां बीजेपी की सरकार नहीं है। फिर भी संविधान में ऐसे कई प्रावधान हैं, जिनके तहत केंद्र दखल दे सकता है। केंद्र एडवाइजरी जारी कर सकता है.'

वाजपेयी ने कहा, 'असहिष्णुता, सांप्रदायिकता और जातिवाद के खिलाफ मैं लिखता रहा हूं। इस देश में हर तरह के अल्पसंख्यक संदिग्ध हो गए हैं। चाहे वे धर्म के आधार पर अल्पसंख्यक हों या विचार के नजरिए से। संविधान हमें जीवन की, अभिव्यक्ति की आजादी देता है। लेकिन मौजूदा माहौल में यह खतरे में दिखती है।'

नयनतारा सहगल को 1984 के सिख विरोधी दंगों के दो साल बाद 1986 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया था। कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या तब देश का माहौल आज से बेहतर था कि नयनतारा ने वह पुरस्कार स्वीकार किया था.

इस पर वाजपेयी ने कहा, 'क्या इसी वजह से आज किसी को विरोध का हक नहीं होना चाहिए? देखिए, आप पुरानी बातों के आधार पर हमेशा फैसले नहीं कर सकते। मैंने दो 2002 में गुजरात दंगों के विरोध में देश के कई लेखकों और बुद्धिजीवियों को लेकर राष्ट्रपति भवन गया था और ज्ञापन दिया था.'

यूपी के दादरी में पिछले दिनों बीफ खाने की अफवाह फैलने के बाद मोहम्मद अखलाक नाम के शख्स की पीटकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद से इलाके में तनाव है। मामले पर राजनीतिक रंग भी चढ़ चुका है। करीब-करीब हर पार्टी के नेता दादरी गए हैं और बयान दिए हैं। मामले की रिपोर्ट पीएमओ को भी भेजी जा चुकी है.
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