ज़ी जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2015 का भव्‍य शुभारंभ

ज़ी जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2015 का भव्‍य शुभारंभ

जयपुर: विभिन्न भाषाओं के साहित्यकारों का वार्षिक आयोजन ज़ी जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (जेएलएफ) यहां बुधवार से शुरू हो गया। राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने आज ऐतिहासिक दिग्गी पैलेस में इस पांच दिवसीय महोत्‍सव का उद्घाटन किया। पारंपरिक संगीत के साथ इस महोत्सव का शुभारंभ किया गया। गौर हो कि यह दुनिया का सबसे बड़ा साहित्‍य सम्‍मेलन है। महोत्‍सव का उद्घाटन राजस्‍थान की मुख्‍यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया और एस्‍सेल ग्रुप के चेयरमैन डा. सुभाष चंद्रा ने किया।

लिटरेचर फेस्टिवल के उद्घाटन समारोह में एस्‍सेल ग्रुप के चेयरमैन डा. सुभाष चंद्रा ने आज कहा कि जेएलएफ साहित्‍य के क्षेत्र में महाकुंभ की तरह है। ये वो सम्‍मेलन है जो मानवता को अंधेरे से उजाले की ओर ले जाता है। उन्‍होंने कहा कि लेखक संवेदनशील मुद्दों को सुलझाने में मदद करते हैं।

वहीं, मुख्‍यमंत्री वसुंधरा राजे ने उद्घाटन समारोह में कहा कि हर बार जेएलएफ बढ़ता ही जा रहा है। दिल्‍ली से जयपुर आने वाला रास्‍ता ब्‍लॉक है। क्‍योंकि सब कोई जयपुर में जेएलएफ की ओर आ रहा है। जेएलएफ में आने वाला कोई निराश होकर नहीं जाता है।

गौर हो कि पांच दिनों में दो लाख लोगों के इस लिटरेचर फेस्टिवल में आएंगे। हर साल यहां आने वाले लोगों की संख्‍या बढ़ रही हैं। नोबेल पुरस्कार प्राप्त लेखकों से लेकर स्थानीय लेखक, पुरस्कार विजेता लेखकों से लेकर नए उपन्यासकार और बॉलीवुड के दिग्गजों से लेकर संगीतकार हस्तियां यहां के ऐतिहासिक दिग्गी पैलेस में आज से शुरू हुए वाले जयपुर साहित्य समारोह में शिरकत कर रहे हैं। समारोह के दौरान विभिन्न लेखकों, प्रकाशकों और पुस्तक प्रेमियों के स्वागत के लिए दिग्गी पैलेस पूरी तरह तैयार है।

वर्ष 2006 में शुरुआत के बाद साहित्यिक कैलेंडर का एक अहम आयोजन बन चुके पांच दिवसीय साहित्य समारोह के इस आठवें सत्र में बहस और चर्चा का तो सिलसिला चलेगा ही, साथ ही संगीत और बॉलीवुड भी इस साल इस कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण होने वाले हैं। यह समारोह 25 जनवरी तक चलेगा।

इस महोत्सव में प्रवेश निशुल्क रखा गया है और इसमें दुनिया के चारों कोनों से लोग आते हैं। यह वार्षिक आयोजन 2006 में जब से शुरू हुआ है, दिग्गी पैलेस में ही आयोजित हो रहा है। महोत्सव के पहले दिन संगीत इतिहासकार जान नेपियर एवं शांति रमण नाथ जोगियों के वाचिक इतिहास के अभिलेखन में परंपरा और आधुनिकता के बारे में व्याख्यान देंगे।

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