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कैदी हुए तो क्या, बिहार में ये पढ़ेंगे क..ख..ग..घ...

जनता जनार्दन संवाददाता , Jun 23, 2011, 13:52 pm IST
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कैदी हुए तो क्या, बिहार में ये पढ़ेंगे  क..ख..ग..घ... पटना: बिहार में पिछले एक दशक के दौरान साक्षरता दर में जबरदस्त छलांग को देखते हुए उत्साहित सरकार राज्य की जेलों में भी निरक्षर कैदियों को 'अक्षर ज्ञान' देने की तैयारी कर रही है। इसके लिए जेलों में ही पाठशाला लगाने की तैयारी पूरी कर ली गई है।

राज्य की जेलों में निरक्षर कैदियों को साक्षर बनाने के लिए राज्य का शिक्षा विभाग और जेल प्रशासन दोनों मिलकर कार्य करेंगे। सरकार का मानना है कि राज्य की 54 जेलों में ऐसे करीब 10 हजार कैदी हैं जो निरक्षर हैं।

राज्य जेल (कारागार) विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक जुलाई से इस कार्यक्रम की शुरुआत होगी। निरक्षर कैदियों को साक्षर करने के लिए उनके साथ जेल में ही बंद पढ़े-लिखे साथियों की मदद ली जाएगी। पढ़े-लिखे कैदी जेलों में ही शिक्षक की भूमिका में होंगे। शिक्षक की भूमिका निभाने वाले कैदियों को मानदेय की राशि दी जाएगी।

उन्होंने बताया कि साक्षर बनने वाले कैदियों का मानव संसाधन विभाग द्वारा मूल्यांकन करने के बाद उन्हें साक्षरता का एक प्रमाणपत्र दिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि यह पाठशाला छह माह के लिए चलेगी। उन्होंने कहा कि 25 से 50 कैदियों पर एक शिक्षा केंद्र और 100 कैदियों पर दो केंद्र चलेंगे। उन्होंने बताया कि राज्य में सबसे अधिक केंद्र पटना की आदर्श जेल, बेऊर जेल में चलेंगे। यहां 10 केंद्र चलाए जाएंगे। अनुमान के मुताबिक राज्य की सभी जेलों को मिलाकर ऐसे 181 केंद्र बनाए जाने की सम्भावना है।

मानव संसाधन विभाग के जनशिक्षा के संयुक्त निदेशक ललन झा ने बताया कि विभाग का जनशिक्षा निदेशालय अपने 'प्रेरणा' कार्यक्रम के तहत कैदियों को साक्षर करने की मुहिम चलाएगा। उन्होंने कहा कि इसके पूर्व में वर्ष 2009 में भी इस तरह के कार्यक्रम राज्य में चलाए गए थे, जिसके सार्थक परिणाम सामने आए। इन्हीं परिणामों को देखते हुए सरकार एक बार फिर यह कार्यक्रम चलाएगी।

एक अन्य अधिकारी की मानें तो इस कार्यक्रम के लिए मानव संसाधन विभाग ने 30.69 लाख रुपये का प्रावधान किया है। वह कहते हैं कि प्रत्येक केंद्र पर सरकार 24,000 रुपये खर्च करेगी। प्रत्येक केंद्र में नव साक्षर कैदी को सर्वश्रेष्ठ लर्नर के तौर पर पुरस्कृत करने के लिए 1000 रुपये भी दिए जाएंगे। इसके अतिरिक्त 10 हजार रुपये पुस्तकालय के लिए भी दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि अगर पैसे की कमी होगी तो और पैसा दिया जाएगा।

सरकार के एक अधिकारी की मानें तो राज्य में साक्षरता दर में वृद्धि से सरकार उत्साहित है इस कारण सरकार निरक्षरों की संख्या कम करने में लगी है। उल्लेखनीय है कि भारत की जनगणना 2011 के आंकड़ों के मुताबिक पिछले 10 वषरें में साक्षरता दर 47 प्रतिशत से बढ़कर 63.82 प्रतिशत तक जा पहुंची है।

पिछले एक दशक में बिहार में महिला साक्षरता दर में जहां 20.2 प्रतिशत का इजाफा हुआ है वहीं पुरुषों की साक्षरता दर में मात्र 13.8 प्रतिशत का ही इजाफा दर्ज किया गया है। वर्ष 2001 में महिला साक्षरता दर जहां 33.1 प्रतिशत थी वहीं अब वह बढ़कर 53.33 प्रतिशत पर पहुंच गई है। दूसरी ओर पुरुषों का साक्षरता दर जहां 2001 में 59.7 प्रतिशत थी, वह 73.05 प्रतिशत तक पहुंची है।

आंकड़ों के अनुसार कुल साक्षरता दर में बिहार अभी भी देश में सबसे नीचे पायदान पर है परंतु महिलाओं की साक्षरता दर में यह राज्य पिछले एक दशक में एक पायदान ऊपर चढ़ा है। महिलाओं की साक्षरता दर के मामले में केरल सबसे ऊपर है तो राजस्थान सबसे नीचे है। पिछली बार की जनगणना में बिहार सबसे नीचे था।
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