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दर्शकों को नहीं डरा पाई बिपाशा-करण की 'अलोन'

दर्शकों को नहीं डरा पाई बिपाशा-करण की 'अलोन' नई दिल्ली: इसमें कोई दो राय नहीं कि हॉरर फिल्मों का अपना एक खास दर्शक वर्ग है कुछ अरसे से इस जॉर्नर में 3 डी और स्पेशल इफेक्ट्स जैसे कई प्रयोग करके इसे और ज्यादा डरावना और रोचक बनाया जा रहा है और सेक्स का तगड़ा डोज तो खैर हमारे यहां इस तरह की फिल्मों की पहली मांग होता है, मगर जब कहानी और भूत को भगाने के तरीकेकार की बात आती है तो उसमें हमारे फिल्मकार कोई भी प्रयोग नहीं करना चाहते ,बस उसी घिसी -पिटी पुरानी लकीर को पीटते नजर आते हैं।

कहानी: संजना और अंजना (बिपाशा बसु) दोनों सियामी अर्थात जुडी हुई जुड़वा बहने है। बचपन से हर काम साथ करते हुए बड़ी हुई हैं, मगर किशोरावस्था में प्रवेश करते ही उस वक्त उनकी जिंदगी दोराहे पर आकर खड़ी हो जाती है, जब उनकी जिंदगी में कबीर (करन सिंह ग्रोवर ) प्यार की बहार लेकर आता है। कबीर को संजना से प्यार है, मगर अंजना भी कबीर को चाहती है।

फिर दोनों बहने एक -दूसरे से अलग होने के लिए ऑपरेशन का रास्ता अपनाती हैं, मगर उस ऑपरेशन के दौरान अंजना की मौत हो जाती है और उसके बाद शुरू होता है हादसों और डरावने मंजर का सिलसिला, जिसमें पहली शिकार उन दोनों की मां (नीना गुप्ता ) बनती हैं। जब कबीर साइकॉलजिस्ट (जाकिर हुसैन ) की मदद लेता है तो उसे कई ऐसे डरावने राज पता चलते हैं, जिन्हें सह पाना उसके लिए मुश्किल हो जाता है।

निर्देशन: निर्देशक भूषण पटेल की 'अलोन' थाई फिल्म से प्रेरित है। इससे पहले वे '1920: ईविल रिटर्न्स' और 'रागिनी एम एम एस 2 ' जैसी डरावनी फिल्में बना चुके हैं, मगर यहां वे कुछेक दृश्यों को छोड़कर डराने से चूक गए हैं। पहले बीस मिनट तो फिल्म बहुत सुस्त मालूम होती है, कहानी में कोई कोई हैपनिंग्ज नहीं होतीं ।

फिल्म के डरावने भाग को भी उन्होंने दरवाजे का खड़खड़ाना, तांत्रिक का भूत भगाना जैसे उसी पारंपरिक तरीके से दर्शाया है, जिसे हम पहले भी कई बार देख चुके हैं। हां हॉरर और इरोटिक दृश्यों का उन्होंने अच्छा संगम किया है। क्लाइमेक्स का ट्विस्ट अच्छा है।

अभिनय: हॉरर क्वीन का खिताब पा चुकी बिपाशा इस तरह की फिल्मों की अगर पहली पसंद बन गईं हैं तो क्या गलत है। उन्होंने अपने रोल में डरने, रोने और चीखनेवाले दृश्यों में पूरा न्याय किया है। इस फिल्म में वे खूबसूरत भी लगी हैं। करन के साथ उनकी हॉट केमेस्ट्री परदे पर खुलकर आई है। वहीं हीरो के रूप में डेब्यू करनेवाले करन परदे पर हॉट और हैंडसम लगे हैं,मगर अभिनय और संवाद अदायगी में उन्हें काफी मेहनत करनी होगी। आदिल हुसैन ठीक -ठाक रहे। नीना गुप्ता ने यह किरदार क्यों किया पता नहीं।

संगीत: अंकित तिवारी और मिथुन के संगीत में 'कतरा कतरा ' और 'चांद आसमानों से लिपटा' जैसे गाने सुनने के साथ -साथ फिल्मांकन की दृष्टि अच्छे बन पड़े हैं।
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