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आज से योजना आयोग नहीं,'नीति आयोग' होगा

आज से योजना आयोग नहीं,'नीति आयोग' होगा नई दिल्ली: नए साल के पहले दिन गुरुवार को मोदी सरकार ने वर्षों पुराने योजना आयोग का नाम बदलकर नीति आयोग करने की घोषणा की।

सरकार की इस घोषणा के साथ ही अब योजना आयोग नीति आयोग के नाम से बुलाया जाएगा। 

सूत्रों के मुताबिक, नाम बदलने के साथ ही जल्द इसके कामकाज की रूपरेखा भी सामने आऐगी।

योजना आयोग ने अपने 65 साल के इतिहास में 200 लाख करोड़ रुपए से अधिक की 12 पंचवर्षीय और छह सालाना योजनाएं शुरू की थी।

योजना आयोग के रूप में चर्चित यह संस्थान मार्च 1950 में एक साधारण सरकारी प्रस्ताव के जरिए गठित की गयी थी। इसने कई राजनीति एवं आर्थिक उतार-चढ़ाव देखे तथा कई बार विवादों का केंद्र भी रही।

गरीबी के आंकलन, खुद की इमारत में शौचालय मरम्मत पर मोटे खर्च व पिछले उपाध्यक्ष की विदेश यात्राओं के खर्च को लेकर इससे जुड़ी कुछ ऐसी चर्चाएं हैं जो आने वाले समय में भी याद की जाती रहेंगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल 15 अगस्त को अपने पहले स्वतंत्रता दिवस के भाषण में घोषणा की कि आयोग की जगह पर नए संस्थान का गठन किया जाएगा।

ऐसी अटकलें थी कि नए संस्थान के नाम और ढांचे का खुलासा गणतंत्र दिवस के मौके पर किया जाएगा, लेकिन मोदी सरकार ने नए साल का आगाज ही योजना आयोग के नए नाम नीति आयोग से कर दिया।

नये निकाय के ढांचे और इसकी भूमिका पर सलाह मशविरा के दौरान ‘नीति आयोग’ (पॉलिसी कमिशन) नाम का उल्लेख आया था। प्रधानमंत्री मोदी ने नये निकाय की रचना की प्रक्रिया में मुख्यमंत्रियों को भी शामिल किया था।

योजना आयोग की स्थापना सरकार की संसाधनों के उचित दोहन, उत्पादन बढ़ाने और रोजगार के मौके प्रदान कर लोगों का जीवन-स्तर बढ़ाने के घोषित लक्ष्यों की प्राप्ति के साधन के तौर पर की गई थी।

आयोग को देश के सभी संसाधनों के आंकलन, जो संसाधन कम हैं उनको बढ़ाना, संसाधनों के सबसे प्रभावी तथा संतुलित उपयोग और प्राथमिकताएं तय करने का जिम्मा सौंपा गया था।
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