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जेल से रिहा हो सकता है मुंबई हमले का मास्टरमाइंड लखवी

जेल से रिहा हो सकता है मुंबई हमले का मास्टरमाइंड लखवी दिल्‍ली/इस्‍लामाबाद: वर्ष 2008 में मुंबई पर हुए आतंकी हमलों के मुख्य साजिशकर्ता जकीउर रहमान लखवी रिहा हो सकता है। लखवी को एक जनसुरक्षा आदेश के तहत हिरासत में रखने के लिए जारी की गई अधिसूचना को सोमवार को इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने निलंबित कर दिया।

जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान की एक अदालत ने वर्ष 2008 मुंबई हमलों के मुख्य साजिशकर्ता जकीउर रहमान लखवी को हिरासत में लेने के सरकारी आदेश पर रोक लगा दी। इससे पहले सरकार ने 26/11 हमले में लखवी को जमानत मिलने के तीन दिन बाद सार्वजनिक सुरक्षा आदेश के तहत उसे हिरासत में लेने का आदेश दिया था। हालांकि, गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सरकार एक अन्य मामले में लखवी को हिरासत में ले सकती है।

उन्होंने कहा कि चूंकि जेल से लखवी की रिहाई की विश्वभर में खासकर भारत द्वारा आलोचना की जाएगी, पाकिस्तानी सरकार किसी अन्य मामले में लखवी को हिरासत में ले सकती है जैसा कि उसने एलईजे प्रमुख मलिक इशाक के मामले में किया। सरकार द्वारा जन सुरक्षा आदेश के तहत इशाक की हिरासत बढाने की मांग नहीं करने के बाद इशाक की रिहाई से ठीक पहले उसे हत्या और आतंकवाद के एक मामले में न्यायिक हिरासत में भेजा गया।

इस्लामाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश नूर उल हक कुरैशी ने लखवी के वकील की दलीलें सुनने के बाद लोक व्यवस्था बनाये रखने से जुड़े आदेश पर लखवी की हिरासत पर रोक लगाई। हालांकि सरकारी विधि अधिकारी सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं हुए। अदालत ने सरकार को 15 जनवरी को इस मामले में अगली सुनवाई पर इस संबंध में जवाब देने का निर्देश दिया।

लखवी के अधिवक्ता राजा रिजवान अब्बासी ने कहा कि अदालत ने उनके मुवक्किल की हिरासत की अधिसूचना निलंबित की है। अब्बासी ने कहा कि अदालत ने लखवी की हिरासत निलंबित की क्योंकि एमपीओ के तहत सरकार की अधिसूचना गैरकानूनी थी और इसका कोई ठोस कानूनी आधार नहीं था।

इस्लामाबाद की आतंकवाद निरोधी अदालत के न्यायाधीश ने मुंबई हमले के मामले में लखवी के खिलाफ सबूतों की कमी का हवाला देते हुए 18 दिसंबर को उसे जमानत दी थी लेकिन इससे पहले कि लखवी जेल से रिहा हो पाता, सरकार ने लोक व्यवस्था बनाए रखने से जुड़े कानून के तहत उसे तीन और महीनों के लिए हिरासत में ले लिया। उसे पांच लाख रूपए के मुचलके पर जमानत दी गई थी।

लखवी की रिहाई का आग्रह सरकार द्वारा खारिज कर दिए जाने पर लखवी ने एमपीओ के तहत अपनी हिरासत को इस्लामाबाद उच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती दी थी। लखवी के वकील ने आज की सुनवाई के दौरान उसे जमानत देने वाले निचली अदालत के आदेश की प्रति भी पेश की। आदेश में कमजोर सबूत, गैरजरूरी धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज करने तथा संदिग्ध के खिलाफ सुने हुए सबूतों का हवाला दिया गया।

इसमें कहा गया है कि इस मामले में लखवी को जिस मुख्य सबूत के आधार पर शामिल किया गया वह 21 नवंबर 2012 को मुंबई की एक जेल में फांसी पर लटकाए गए एकमात्र जिंदा बचे हमलावर अजमल कसाब का कबूलनामा था। आदेश के अंतिम पैरा में न्यायाधीश ने हालांकि कहा कि ये टिप्पणियां संभावित प्रकृति की हैं और भविष्य में सुनवाई या इसके परिणाम को प्रभावित नहीं करेगी।

लखवी और छह अन्य आरोपियों- अब्दुल वाजिद, मजहर इकबाल, हमद अमीन सादिक, शाहिद जमील रियाज, जमील अहमद और यूनिस अंजुम- को 26 नवंबर, 2008 को हुए मुंबई हमलों की साजिश रचने और उसे अंजाम देने के लिए आरोपित किया गया है। इन हमलों में कुल 166 लोग मारे गए थे। वर्ष 2009 से इस मामले में मुकदमा चल रहा है।
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