मोबाइल टावर तरंग संबंधी डर दूर करेगी सरकार

मोबाइल टावर तरंग संबंधी डर दूर करेगी सरकार कोच्चि: एक उच्च न्यायालय के आदेश के बाद दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने अपनी प्रौद्योगिकी पर्यवेक्षण इकाई को जागरूकता फैलाने और मोबाइल टावरों से निकलने वाले तरंग का उनके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में कायम डर को दूर करने की कोशिश करने का निर्देश दिया।

टेलीकॉम एनफोर्समेंट रिसोर्स एंड मॉनीटरिंग (टर्म) को भेजे गए एक पत्र में कहा गया है, "(टर्म की इकाई से) अनुरोध किया जाता है कि तरंग का स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव से संबंधित अनुचित डर दूर करने के लिए जागरूकता फैलाने के लिए जरूरी कदम उठाएं।

उल्लेखनीय है कि हाल में गुजरात उच्च न्यायालय ने अपने एक आदेश में कहा था कि यदि निर्धारित मानक अपनाया जाए तो वायरलेस डाटा और मोबाइल संचार के लिए बेस स्टेशन से स्वास्थ्य को कोई खतरा नहीं है।

25 पृष्ठ के इस आदेश में कहा गया था कि संबंधित अधिकारियों को लोगों को बताना चाहिए कि उनके आसपास मौजूद रेडियो तरंग को उनके स्वास्थ्य पर कोई बुरा असर नहीं होगा। डीओटी के पत्र में कहा गया है कि टर्म की अहमदाबाद इकाई ने जागरूकता फैलाने के लिए पहले से कई कदम उठाए भी हैं।

इन तरंगों के बुरे असर को लेकर सामाजिक मंचों पर बहस जारी है और विशेषज्ञों ने यह कहा है कि कुछ परहेज अपनना बेहतर है। टाटा मेमोरियल सेंटर में इस विषय के एक विशेषज्ञ राजेश दीक्षित ने कहा, "मोबाइल टावरों से निकलने वाली तरंग आयनीकृत करने वाली नहीं होती है और इससे डीएनए नहीं टूट सकता, फिर भी कुछ परहेज अपना बेहतर है।

सरकार पहले से कहती आ रही है कि देश में मोबाइल तरंगों की सीमा इंटरनेशनल कमिशन ऑन नॉन-आयोनाइजिंग रेडिएशन प्रोटेक्शन (आईसीएनआईआरपी) मानक का 10वां हिस्सा है और 90 फीसदी सदस्य देश आईसीएनआईआपी मानक का इस्तेमाल करते हैं।

भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) के एक सदस्य आरके अर्नाल्ड ने सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में कहा था,हमें इस मामले में एक संतुलित नजरिया अपनाना होगा।

हमें लोगों के मस्तिष्क से डर दूर करना होगा। इस विषय पर विश्व स्वास्थ्य संगठन भी अध्ययन कर रहा है, जो 2015 के मध्य तक एक रिपोर्ट जारी कर सकता है।
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