16/12 दुष्कर्म: अभी भी न्याय का इंतजार (2 वर्ष पूरे होने पर)

जनता जनार्दन डेस्क , Dec 16, 2014, 15:22 pm IST
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16/12 दुष्कर्म: अभी भी न्याय का इंतजार (2 वर्ष पूरे होने पर) नई दिल्ली: दो साल पहले 16 दिसंबर को हुए दिल्ली में गैंगरेप की आज बरसी है। बीते दो सालों में दोषियों को सजा हुई, नए कानून बने, पर बलात्कार की वारदात नहीं रुकी।

पूरे देश को हिला देने वाली दिल्ली गैंगरेप की घटना को कोई नहीं भूला है। आज ही के दिन यानी 16 दिसंबर 2012 को चलती बस में छह लोगों ने एक लड़की के साथ गैंगरेप किया था।

दिल्ली में कुछ दिन इलाज के बाद पीड़ित लड़की को सिंगापुर के एक अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया गया था, जहां उसने 29 दिसंबर 2012 को दम तोड़ दिया था।

घटना को दो साल बीत चुके हैं। देश में हुए जबरदस्त विरोध-प्रदर्शनों के बाद रेप की घटनाओं के लिए नया कानून भी बनाया गया। कोर्ट में चली सुनवाई के बाद चार बलात्कारियों को कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई है।

गैंगरेप करने वालों में उस वक्त एक नाबालिक भी था। उसके खिलाफ सुनवाई जुवेनाइल बोर्ड में की गई, जिसके बाद बोर्ड उसे तीन साल के लिए सुधार गृह में भेज दिया था।

राष्ट्रीय राजधानी में 16 दिसंबर 2012 को चलती बस में एक 23 वर्षीय फिजियोथेरेपी की प्रशिक्षु के साथ हुई सामूहिक दुष्कर्म की हृदयविदारक घटना ने न सिर्फ पूरे देश को हिला कर रख दिया, बल्कि पूरी दुनिया में भारत की छवि को भी धूमिल किया। लेकिन पीड़िता के परिवार को आज भी न्याय का इंतजार है।

दिल्ली सामूहिक दुष्कर्म कांड के चारों दुष्कर्मियों की फांसी की सजा पर फिलहाल सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है। सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष मार्च 2014 में मामला जाने के बाद से अब तक सिर्फ तीन-चार अहम सुनवाइयां हो सकी हैं और इसके किसी तार्किक परिणति तक पहुंचने में अभी और समय लगने की संभावना है।

दुष्कर्मियों के वकील अपने मामले की सुनवाई बिना किसी पूर्वाग्रह के विस्तार से चाहते हैं, लेकिन पीड़िता के परिवार वालों के लिए न्याय का इंतजार लंबा होता जा रहा है। पीड़िता के पिता ने कहा, "सरकार यदि अभी भी इस तरह के अपराध करने वाले लोगों को कोई स्पष्ट संदेश देना चाहती है तो मेरी बेटी के दुष्कर्मियों को तुरंत सजा दी जानी चाहिए।

राष्ट्रीय राजधानी में रेडियो टैक्सी कंपनी उबेर के एक चालक द्वारा पांच दिसंबर को किए गए दुष्कर्म मामले पर उन्होंने कहा, "इस तरह के दुष्कर्मियों को कानून का कोई भय नहीं रहता। अगर चारों दुष्कर्मियों को फांसी दे दी गई होती तो इससे कुछ भय पनपता और दुष्कर्म की अन्य घटनाओं को रोकने में मददगार साबित होता।"

16/12 दुष्कर्म कांड के दो दोषियों मुकेश और पवन के वकील एम. एल. शर्मा ने कहा, "मैं भी चाहता हूं कि मामला जल्द समाप्त हो, लेकिन सुनवाई विस्तार से होनी चाहिए। कानूनी कार्यवाही एकतरफा नहीं होनी चाहिए।

मैं पीड़िता या न्याय के खिलाफ नहीं हूं, लेकिन मैं निर्दोष को सजा देने के खिलाफ हूं।" शर्मा ने कहा, "मुझे पता है वे निर्दोष हैं और मुझे बस इसे साबित करना है और न्याय की खातिर अदालत को मामले की सुनवाई जल्दबाजी में नहीं करनी चाहिए।"

दिल्ली की एक फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 13 सितंबर 2013 को दुष्कर्म के छह आरोपियों में से चार आरोपियों मुकेश, अक्षय ठाकुर, पवन गुप्ता और विनय शर्मा को मृत्युदंड को सजा सुनाई। दिल्ली उच्च न्यायालय ने 13 मार्च 2014 को चारों दोषियों को मिली सजा बरकरार रखी।

सर्वोच्च न्यायालय ने लेकिन 15 मार्च 2014 को मुकेश और पवन गुप्ता की फांसी पर रोक लगा दी तथा 14 जुलाई को मृत्युदंड की सजा पाए अन्य दोनों दोषियों विनय और अक्षय की फांसी पर भी रोक लगा दी।
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