भेजा फ्राय 2 में भेजा बचा रह जाए तो गनीमत है

जनता जनार्दन संवाददाता , Jun 19, 2011, 13:16 pm IST
Keywords: Bheja Fry 2   भेजा फ्रॉय   पार्ट-1   A heavily taxing   दर्शकों को निराश   No-brainier   कमजोर   Film review   फिल्म समीक्षा.  
फ़ॉन्ट साइज :
भेजा फ्राय 2 में भेजा बचा रह जाए तो गनीमत है नई दिल्ली: आजकल सगल फिल्मों के सीक्वल बनाने का चलन है. इसमें कुछ सीक्वल तो इतिहास रच देते हैं, जैसे मुन्ना भाई एम बी बी एस थी. कुछ हद तक धूम सीरीज़ भी इसमें शामिल है. पर इस हफ्ते रीलिज़ हुई भेजा फ्रॉय 2 वाकई आपके भेजे का कचूमर निकालने के लिए काफ़ी है.

चार साल बाद बॉलीवुड का ओरिजनल इडियट भारत भूषण उर्फ विनय पाठक एक बार फिर भेजा फ्रॉय करने तैयार है। भारत जो टैक्स इंस्पेक्टर है, कैश प्राइज जीतने के लिए वह एक रियलिटी शो में हिस्सा लेता है। जहां उसकी मुलाकात शो की कार्यकारी प्रोड्यूसर रंजिनी से होती है। वह शो जीत जाता है। बड़ी धनराशि के साथ-साथ भूषण को एक क्रूज पर जाने का मौका मिलता है। जहां उसकी मुलाकात बिजनेस टायकून अजित तलवार (केके मेनन), फोटोग्राफर रघु बर्मन और रंजिनी से होती है। इस क्रूज जर्नी में भारत भूषण के साथ क्या-क्या घटनाएं घटती हैं। देखना दिलचस्प होगा।

लंबे समय बाद आ रहा फिल्म का सीक्वल उतना ही मनोरंजक है जितनी भेजा फ्रॉय थी। ये एक साफ सुथरी फिल्म है। जिसमें डॉयलाग ना तो डबल मीनिंग वाले है और न ही अश्लील। ये एक पारिवारिक फिल्म है। जिसमें विनय पाठक और केके मेनन का अभिनय लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

भेजा फ्रॉय का पार्ट-1 हिट होने से दर्शकों को इस फिल्म से बहुत उम्मीदे है। इसलिए दर्शकों का पहले भाग से सीक्वल की तुलना करना लाजमी है। लेकिन बेंचमार्क सीट पर यह फिल्म दर्शकों की उम्मीद को पूरा नहीं करती है। कुछ सीन दर्शकों को निराश कर सकते है। साथ ही फिल्म का दूसरा भाग भी कमजोर है।
 
इस फिल्म के बाद अब कहा जा सकता है कि विनय पाठक छोटे बजट की फिल्मों के बड़े कलाकार हो गए है। ये लग रहा था फिल्म सिर्फ भारत भूषण के लिए ही है तो ऐसा नहीं है केके मेनन ने बिजनेस मैन की भूमिका को उम्मीद से कही ज्यादा बेहतर जिया है। मिनिषा सिर्फ शो पीस ही है। उनके लिए फिल्म में वैसे भी ज्यादा कुछ करने लायक था नहीं। हां इतना जरुर है कि निर्देशक-अभिनेता अमोल गुप्ते ने फोटोग्राफर के रोल में जान डाल दी है।
 
सागर बल्लारी के निर्देशन की तुलना अगर भेजा फ्रॉय पार्ट-1 से की जाए तो सीक्वल में बहुत खामिया नजर आती है। स्टोरीलाइन ठीक नहीं होने से भी थोड़ी दिक्कत डायरेक्शन में नजर आई है। इस बार फिल्म को मैसेज भी नहीं छोड़ती। हां विनय और केके मेनन के बीच क्रूज पर फिल्माएं गए कॉमेडियन शॉट दिलचस्प है।

पार्ट-1 में एक भी गाना नहीं था, लेकिन सीक्वल में चार गाने है। गाना इश्क का कीड़ा पहले ही दर्शकों में अपनी पहचान बना चुका है। डॉयलाग आपको जरुर प्रभावित करेंगे, लेकिन परीक्षित वारियर की  सिनेमेटाग्राफी कुछ खास नहीं है।   

फिल्म विनय पाठक के अभिनय और केके मेनन की डॉयलाग डिलेवरी की वजह से देखने लायक है।
वोट दें

क्या 2019 लोकसभा चुनाव में NDA पूर्ण बहुमत से सत्ता में आ सकती है?

हां
नहीं
बताना मुश्किल
 
stack