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समीक्षा: 'चायवाले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक तिलिस्म'

समीक्षा: 'चायवाले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक तिलिस्म' नई दिल्ली: प्रकाश हिन्दुस्तानी, यह नाम स्वयं ही एक ब्रांड है। अपने लेखन के चलते पत्रकारिता जगत में बहुचर्चितप्रकाश हिन्दुस्तानी का नाम व चेहरा हर पाठक पहचानता है, उनके बारे में जितनी अधिक बात की जाये, उतनी कम हीरहेगी ,इसलिए पिछले दिनों उनके द्वारा लिखी गई पुस्तक की ही बात करते हैं।

“चायवाले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक तिलिस्म” नाम की यह पुस्तक बाजार में आते ही चर्चा में आ गई और अब लोकप्रियता के शिखर की ओर लगातार अग्रसर है।

इस पुस्तक को कोई और लेखक लिखता, तो यह पुस्तक संग्रह योग्य नहीं बन पाती। चूँकि लेखक प्रकाश हिन्दुस्तानी पत्रकार हैं, जिससे पुस्तक के लेखक पर पत्रकार शुरू से अंत तक हावी रहा है।

बॉक्स कोरोगेटर्स एंड ऑफसेट प्रिंटर्स, गोविंदपुरा भोपाल से मुद्रित व साहित्य संस्थान गाजियाबाद से प्रकाशित इस पुस्तक का मूल्य 150 रूपये है।

लेखक ने अपनी पुस्तक देश के 81 करोड़ मतदाताओं को समर्पित करते हुए प्रस्तावना में ही स्पष्ट कर दिया है कि यह पुस्तक नरेंद्र मोदी की जीवनी नहीं है।

वर्ष 2014 का लोकसभा चुनाव कई मायनों में पिछले चुनावों से अलग था। सबसे महत्वपूर्ण बात तो यही रही कि इस चुनाव में प्रचार के केंद्र में एक मात्र नरेंद्र मोदी ही रहे। भारतीय जनता पार्टी की ओर से नरेंद्र मोदी सेनापति के रूप में प्रस्तुत किये गये, तो वे प्रत्येक गैर भाजपाई के निशाने पर आ गये।

पिछले चुनावों में राष्ट्रीय मुददों के साथ स्थानीय मुददे भी नेताओं के भाषणों में सुनाई देते थे, लेकिन इस चुनाव में आम कार्यकर्ता से लेकर राष्ट्रीय नेता तक के भाषणों में सिर्फ नरेंद्र मोदी का ही नाम रहा। प्रचार के दौरान नरेंद्र मोदी भाजपाइयों के लिए नायक रहे और गैर भाजपाइयों के लिए खलनायक।

नरेंद्र मोदी ने इस चुनाव में प्रचार करने का रिकॉर्ड बनाया। कई बार विवादित भाषण दिए, तो कई बार विरोधियों के हमलों का ऐसा जवाब दिया कि विरोधी निरुत्तर हो गये। प्रचार अभियान भी इस बार हाईटेक रहा। ऐसा कोई माध्यम नहीं था, जिसका उपयोग नहीं किया गया। कुल मिला कर इस चुनाव में बहुत कुछ नया हुआ, ऐतिहासिक हुआ।

नरेंद्र मोदी की भूमिका को केंद्र में रखते हुए लेखक प्रकाश हिन्दुस्तानी ने चुनावी परिदृश्य को शब्दों में बाँध कर ऐसी कृति का निर्माण कर दिया है, जिसे आने वाली पीढ़ियाँ पढ़ कर 2014 के चुनाव के परिदृश्य की अनुभूति सहज ही कर लेगीं।

चुनाव के दौरा दिखाई/सुनाई दिए विज्ञापन, भाषण और नरेंद्र मोदी के जादुई असर को जानने/समझने में यह पुस्तक हमेशा सहायक सिद्ध होती रहेगी।
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