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फीफा वर्ल्‍ड कप 2014 : नीदरलैंड को पेनल्टी शूट में हराकर 24 साल बाद फाइनल में पहुंचा अर्जेंटीना

फीफा वर्ल्‍ड कप 2014 : नीदरलैंड को पेनल्टी शूट में हराकर 24 साल बाद फाइनल में पहुंचा अर्जेंटीना रियो डी जेनेरियो: फीफा सॉकर वर्ल्‍डकप 2014 के दूसरे फाइनल मुकाबले में अर्जेंटीना ने नीदरलैंड को पेनल्टी शूट आउट में 4-2 से हराकर फाइनल में प्रवेश कर लिया। गुरुवार मध्‍य रात्रि में खेले इस मुकाबले में कप्तान लियोनेल मेसी की अगुवाई में अर्जेंटीना की टीम 24 साल बाद वर्ल्‍ड कप के फाइनल में पहुंची है। अब 13 जुलाई को फाइनल में अर्जेन्‍टीना का मुकाबला जर्मनी से होगा।

गोलकीपर सर्जियो रोमेरो के बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर अर्जेंटीना ने नीदरलैंड पर जीत हासिल की। दोनों दिग्गज टीमों के बीच दूसरे सेमीफाइनल में निर्धारित 90 मिनट और अतिरिक्त 30 मिनट तक खेल गोलरहित बराबरी पर रहा। इसके बाद पेनल्टी शूटआउट पर फैसला किया गया। इस रोमांचक मुकाबले में निर्धारित समय तक दोनों टीम गोल स्कोर नहीं कर सकी थी। जिसके बाद अतिरिक्त समय में भी कोई गोल नहीं हो पाया, जिससे यह मुकाबला पेनल्टी शूट आउट में चला गया। पेनल्टी शूट में अर्जेंटीना की तरफ से मेस्सी, गराई, अगुएरो, तथारोड्रिग्स ने गोल किया। वहीं, नीदरलैंड के लिए अर्जेन रॉबेन और डर्क कुइट ही गोल स्कोर कर सके तथा रॉन व्लॉर एवं वेस्ते स्नाइडर चूक गए।

एक्स्ट्रा टाइम तक दोनों टीमें एक भी गोल नहीं कर सकी थीं लेकिन पेनल्टी शूटआउट में अर्जेंटीना के गोलकीपर सर्जियो रोमेरो ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दो गोल बचा लिए और अपनी टीम को जीत दिला दी। उन्होंने डच खिलाड़ियों रॉन व्लार और दिग्गज वेस्ले श्नाइडर के शॉट नाकाम कर दिए। हालांकि पूरे मुकाबले के दौरान गेंद नीदरलैंड के खिलाड़ियों के कब्जे में ज्यादा रही, लेकिन गोल पर निशाना साधने के मामले में अर्जेंटीना के खिलाड़ी हावी रहे। अर्जेन्‍टीना की ओर से 5 जबकि नीदरलैंड ने तीन शॉट टारगेट पर मारे। दोनों टीमों को 4-4 कॉर्नर मिले।

अर्जेंटीना के लिए कप्तान लियोनेल मेस्सी, इजेकील गारे, सर्जियो अगुएरो और मैक्सी रौद्रिगेज ने गोल किए जबकि नीदरलैंड के लिये सिर्फ आर्येन रोबेन और डर्क कुएट ही गोल कर सके। मैच के हीरो अर्जेंटीना के गोलकीपर रोमेरो साबित हुए जिन्होंने रोन व्लार और वेसले स्नाइडेर के गोल बचाकर टीम को पांचवीं बार विश्व कप फाइनल में पहुंचाया। दो बार की चैम्पियन अर्जेंटीना का सामना अब तीन बार के विजेता जर्मनी से रविवार को रियो दि जिनेरियो के माराकाना स्टेडियम में होगा। अर्जेन्‍टीना 1990 के बाद पहली बार विश्व कप फाइनल में पहुंचा है जब डिएगो माराडोना की टीम को जर्मनी ने हराया था।

जर्मनी और ब्राजील के बीच पहले सेमीफाइनल में जहां गोलों की बौछार हुई, वहीं दूसरे सेमीफाइनल में गोल करने के बहुत कम मौके बने। मैच हालांकि काफी तनाव और दबाव में खेला गया और किसी टीम ने अपने डिफेंस में सेंध मारने का मौका दूसरे को नहीं दिया। डच टीम मेस्सी को रोके रखने में कामयाब रही। रान ब्लार ने फीफा के चार बार के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी रहे मेस्सी को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया।

डच टीम के मेस्सी कहे जाने वाले रोबिन वान पर्सी पूरे 90 मिनट तक खेले लेकिन अतिरिक्त समय के छठे मिनट में उनकी जगह दूसरे खिलाड़ी को उतारा गया। पेट की समस्या से जूझ रहे वान पर्सी मैच से पहले ही फिट हुए थे। रौद्रिगो पलाशियो को अतिरिक्त समय खत्म होने के पांच मिनट पहले अर्जेंटीना के लिए गोल करने का मौका मिला लेकिन उनका हेडर सीधे डच गोलकीपर जास्पर सिलेसेन के हाथ में चला गया।

पहले हाफ में कोई टीम करीबी मौके नहीं बना सकी। एकमात्र मौका अर्जेंटीना ने 20वें मिनट में मेस्सी की फ्रीकिक पर बनाया लेकिन फिर सिलेसेन ने दाहिने ओर डाइव लगाकर गोल बचा लिया। अर्जेंटीना फिर 75वें मिनट में गोल करने के करीब पहुंचा जब एंजो पेरेज से मिले पास पर गोंजालो हिगुएन ने गेंद गोल की तरफ डाली लेकिन वह साइड नेट से टकराकर निकल गई। आखिरी मिनटों में डच टीम ने भी हमले बोले। वेसले स्नाइडेर ने 90वें मिनट में आर्येन रोबेन को अर्जेंटीना के पेनल्टी क्षेत्र में गेंद दी लेकिन जेवियर मस्कारेनो ने कड़ी कुशलता से उसे बाहर कर दिया। मैच से पहले अर्जेंटीना के महान खिलाड़ी अल्फ्रेडो डि स्टीफेनो की याद में मौन रखा गया। स्टीफेनो का सोमवार को 88 बरस की उम्र में निधन हो गया था।

अब रविवार को अर्जेंटीना और जर्मनी में खिताबी भिडंत होगी। इससे पहले, शनिवार को नीदरलैंड और ब्राजील के बीच तीसरे स्थान के लिए मैच खेला जाएगा।
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