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वेलेंटाइन डे: इनकी याद में धड़कता है हर चाहने वाला दिल

वेलेंटाइन डे: इनकी याद में धड़कता है हर चाहने वाला दिल जयपुर: वेलेंटाइन डे यानी अपने जज्बातों को शब्दों में बयां करने का दिन। इस दिन का हर धड़कते हुए दिल को बेसब्री से इंतजार होता है, लेकिन सवाल यह है कि आखिर वेलेंटाइन डे मनाया क्यों जाता है। चलिए हम आपकी इस जिञासा को थोड़ा शांत कर देते हैं।

तीसरी शताब्दी में रोम में सम्राट क्लॉडियस का शासन था। सम्राट के अनुसार विवाह करने से पुरूषों की शक्ति और बुद्धि कम होती है। इसी विश्वास पर उसने आदेश जारी करवा दिये कि उसका कोई सैनिक और अधिकारी विवाह नहीं करेगा। उनका मानना था कि जवान लड़के शादी शुदा लड़को की तुलना में ज्यादा ताकतवर होते हैं, लेकिन संत वेलेंटाइन ने इस कानून का विरोध किया। उन्होंने चुपके से सैनिकों और अधिकारियों की शादी करवानी शुरू कर दी।

सम्राट को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने संत वेलेंटाइन को गिरफ्तार करवा लिया और फांसी की सजा सुना दी। यह भी कहा जाता है कि जेल में संत वेलेंटाइन ने जेलर की बेटी को अपनी आंखें देकर उसके जीवन में फिर से रोशनी ला दी थी। यह भी कहा जाता है कि लड़की के ठीक हो जाने के बाद संत वेलेंटाइल और उसमें मित्रता हो गई, जो आगे बढ़कर प्रेम संबंध में तब्दील हो गई।

संत वेलेंटाइन ने उस युवती को एक पत्र भी लिखा था, जिसमें लिखा था कि तुम्हारा वेलेंटाइन। आखिरकार सम्राट क्लॉडियस ने 14 फरवरी 269 को संत वेलेंटाइन को फांसी पर चढ़ा। कहा जाता है कि उस दिन के बाद से ही संत वेलेंटाइन की याद में वेलेंटाइन डे मनाया जाने लगा है।

हालांकि अभी भी इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि आखिरकार वेलेंटाइन डे की शुरूआत कहां से हुई। कई शुरूआत क्रिश्चियन शहीदों के नाम वेलेंटाइन बताए गए हैं। 1969 तक कैथोलिक चर्च ने औपचारिक रूप से 11 वेलेंटाइन दिनों को मान्यता दी हुई है। 14 फरवरी को सम्मानित वेलेंटाइन हैं रोम के वेलेटाइन और टेर्नी के वलेंतुनिस। रोम के वेलेटाइन की बात करें तो उन्हें 269 में शहादत मिली और वाया फ्लेमिनिया में उन्हें दफनाया गया।

टेरनी के वलेंतुनिस 197 में बिपश बने और कहा जाता है कि औरेलियन सम्राट के उत्पीड़न के दौरान उनकी हत्या कर दी गई। कैथेलिक कोष में तीसरे वेलेंटाइन का भी जिक्र है, जिनकी शहादत का दिन भी 14 फरवरी माना जाता है। उनकी शहादत अफ्रीका में अपने कई साथियों के साख हुई, लेकिन उनके बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं चल सका।

इसके साथ ही वेलेंटाइन डे मनाने के पीछे दो बातें भी काफी प्रचलित हैं। पहली यह कि इस दिन की शुरूआत प्राचीन पगन फेस्टिवल के बाद हुई थी, जिसके प्रारंभ को चर्च से जोड़ कर भी माना जाता है।

मध्यकाल के यूरोपवासियों की मान्यता के अनुसार, 14 फरवरी के दिन से ही पक्षी प्रेमपूर्वक आपस में मिलना शुरू करते हैं। इसलिए इस दिन को प्यार के प्रतीक के तौर पर मनाया जाता है, हालांकि वैज्ञानिक आधार पर इसे सही नहीं माना जाता।

आज वेलेंटाइन डे है। प्यार का इजहार करने के लिए हर साल 14 फरवरी को वेलेंटाइन डे मनाया जाता है। इस मौके को भुनाने के लिए आज बाजार वैलेंटाइन डे की तैयारियों से जुटे हुए हैं।

वेलेंटाइन डे के लिए लाखों युवा जोड़ों ने जहां इसके लिए तैयारियां की हैं, वहीं इसकी मुखालफत करनेवाले भी तैयार हैं। भोपाल में संस्कृति बचाओ मंच ने गुरुवार को वेलेंटाइन डे के विरोध में जमकर प्रदर्शन किया.।

संस्कृति बचाने की अपील करते हुए मंच के कार्यकर्ताओं ने वेलेंटाइन डे के खिलाफ नारेबाजी की और ग्रीटिंग्स कार्ड जलाकर अपना विरोध जताया। मंच ने ऐलान किया है कि कहीं भी वेलेंटाइन डे के नाम पर अश्लीलता फैलाई गई तो वो लाठी डंडों से उसका विरोध करेंगे।

लेकिन यूपी में प्रेम के पंछियों को हाईकोर्ट से राहत मिली है। अदालत ने वेलेंटाइन डे के दिन लखनऊ के पार्कों के बाहर लव बर्ड्स पर पहरा लगाने से इनकार कर दिया है। अदालत का कहना था कि ऐसा करना नागरिकों के मूलभूत अधिकार का उल्लंघन होगा।

अदालत के सामने दायर याचिका में मांग की गई थी कि लखनऊ डेवेलपमेंट अथॉरिटी के पार्कों के बाहर सुरक्षा लगाई जाए, ताकि जोड़ों को वहां जाने से रोका जा सके। इनमें अलीगंज की नेहरू बाल वाटिका और बेगम हज़रत महल पार्क का नाम ख़ास तौर पर लिया गया था।

लेकिन कोर्ट ने ये कहकर इसे खारिज कर दिया कि संविधान का आर्टिकल-19 नागरिकों को आज़ादी से घूमने का हक देता है।
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