कश्मीर में खुशबू और रंग से महके केसर के खेत

कश्मीर में खुशबू और रंग से महके केसर के खेत पंपोर हाइलैंड्स: दक्षिणी कश्मीर इन दिनों शाही मसाले केसर के फूल खिलने और इस फसल की कटाई शुरू होने से खुशबू और रंग से महक उठा है। पंपोर हाइलैंड्स और कश्मीर घाटी के कुछ अन्य इलाकों में शुष्क मिट्टी पर उगने वाला केसर या जाफरान विश्वभर में बिकने वाला सबसे महंगा मसाला है। इसके प्रत्येक 10 ग्राम की कीमत 1,500 रुपये (24 डॉलर) है।

केसर की सबसे उम्दा किस्म कश्मीर, स्पेन और ईरान से आती है। खाने में इसका प्रयोग रंग और सुगंध के लिए होता है। इसका प्रयोग धार्मिक कामों में भी होता है। वहीं, इत्र, रंगों और औषधियों में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। माना जाता है कि इसमें कामोत्तेजक गुण भी होते हैं।

केसर सिर्फ इसकी ऊंची कीमत के लिए ही शाही मसाला नहीं कहलाता। इसे रोमांस से जोड़ने वाली स्थानीय कहावतों के चलते भी इसे यह नाम प्राप्त है। माना जाता है कि 16वीं शताब्दी में कश्मीर के अंतिम शासक यूसुफ शाह रात की चांदनी में केसर के खेतों में इन फूलों का तिलिस्म देखने निकले थे। वहां विशाल केसर के खेतों में निर्जन स्थान पर एक तन्हा महिला के गीत को सुनकर वह मंत्रमुग्ध हो गए।

उस आवाज की कशिश ने राजा को उस महिला के प्रेम में डुबो दिया और इसलिए राजा ने दरबारियों से उस गायिका को खोजने के लिए कहा। वह ग्रामीण महिला जून निकली। जून के अपने पहले पति से तलाक लेने के बाद यूसुफ शाह ने उससे निकाह किया।

उसे ईसाई नाम हब्बा खातून (रानी) दिया गया। स्थानीय निवासी मुहम्मद ने अफसोस जताते हुए कहा, "सरकार द्वारा नेशनल सैफ्रन मिशन की घोषणा करने के बावजूद इस फसल की उपज प्रत्येक साल घट रही है। अन्य जगहों के मिलावटी जाफरान और दलालों के एकाधिकार ने हमारा जीवन दयनीय बना दिया है।"

केंद्र सरकार ने वर्ष 2010 में नेशनल सैफ्रन मिशन की घोषणा की थी। इस फसल के विकास और सुधार पर वर्ष 2014 तक 373 करोड़ रुपये खर्च किए जाने निश्चित हुए हैं। राज्य सरकार के एक क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया, "मिशन की शुरुआत में केसर उत्पादकों के बीच 9.50 करोड़ रुपये वितरित किए गए थे। अन्य 8.90 करोड़ गुणवत्ता नियंत्रण के लिए परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित करने के लिए तय किए गए थे।"

स्थानीय केसर उत्पादक संघ के महासचिव अब्दुल माजिद वानी ने बताया, "पिछले साल घाटी में आठ टन केसर का उत्पादन हुआ था।" जाफरान उत्पादकों के समस्याओं से जूझने के बावजूद इस शाही मसाले का जादू ऐसा है कि यह कश्मीर की खूबसूरती और भव्यता का पर्याय बन गया है।
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