युवा सांसद हाजिरी में सुस्त, काम में चुस्त

जनता जनार्दन संवाददाता , May 24, 2011, 19:18 pm IST
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युवा सांसद हाजिरी में सुस्त, काम में चुस्त नई दिल्ली: हर क्षेत्र में युवा छाए हुए हैं। हमारी संसद भी इसमें पीछे नहीं है। युवा सांसद काम भी अच्छा कर रहे है, भले संसद में उनकी उपस्थिति कम हो। ये बातें स्वयंसेवी संगठन 'मास फॉर अवेयरनेस' की एक रिपोर्ट से निकलकर सामने आई है।

संगठन की ओर से 'वोट फार इंडिया' अभियान के तहत 15वीं लोकसभा के 2010-2011 के काम-काज पर तैयार 'रिप्रेजेंटेटिव एट वर्क' रिपोर्ट से पता चलता है कि युवा सांसदों की लोकसभा में मौजूदगी भले बेहद कम रही हो, लेकिन काम के मामले में वे अपने वरिष्ठ सांसदों पर भारी पड़ते हैं।

इस रिपोर्ट में लोकसभा के प्रत्येक सांसद के साल भर के कार्यो का विश्लेषण किया गया है। इस संगठन ने पिछले साल भी लोकसभा के 2009-2010 कार्यकाल की समीक्षा की थी और उसे जबरदस्त सराहना मिली थी। संगठन की इस बार की रिपोर्ट में कई दिलचस्प पहलू सामने आए हैं।

रिपोर्ट के संपादक नीरज गुप्ता ने बताया कि सांसदों के काम-काज का विश्लेषण करते समय उनकी उम्र, शैक्षणिक योग्यताओं, व्यवसाय तथा महिला-पुरुष श्रेणी की कसौटी पर परखा गया। इससे भविष्य की राजनीति के संकेत भी मिलते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 2010-2011 के दौरान संसद कुल 72 दिन चली और इस दौरान 260 घंटे 20 मिनट काम हुआ।

2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति के गठन की मांग को लेकर हुए हंगामे तथा अन्य कारणों से कुल 194 घंटे 58 मिनट का समय बर्बाद हुआ और 11,512 बार संसद की कार्यवाही में व्यवधान पड़ा। संसदीय सत्रों में सांसदों की उपस्थिति 75 फीसदी रही।

रिपोर्ट में लोकसभा के काम-काज को 10 भागों में बांटा गया है। पहले भाग में उपस्थिति को शामिल किया गया। रिपोर्ट के अनुसार 12 सांसदों ने 100 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज कराई और लोकसभा के प्रति गंभीरता का प्रदर्शन किया। इनमें सात सांसद कांग्रेस के हैं। राज्यवार देखा जाए तो सर्वाधिक 90 फीसदी से ज्यादा उपस्थिति मणपिुर के सांसदों की रही। इसके बाद मिजोरम, दिल्ली, नागालैंड तथा लक्षद्वीप का नंबर आता है।

उम्र के लिहाज से देखा जाए तो 25 से 40 वर्ष के सांसदों की उपस्थिति 72 प्रतिशत रही, जबकि 41 से 60 वर्ष तथा 60 साल से ऊपर के सांसदों की उपस्थिति क्रमश: 74 एवं 78 प्रतिशत रही। महिला सांसदों ने 78 फीसदी उपस्थिति के साथ पुरुष सांसदों (75 प्रतिशत) को पीछे छोड़ दिया।

रिपोर्ट का दूसरा भाग लोकसभा के प्रश्नकाल पर केंद्रित है। इसके अनुसार मात्र तीन सांसदों ने ही 200 से ज्यादा सवाल पूछे। 100 से अधिक प्रश्न पूछने वाले सांसदों की संख्या 112 रही। लक्षद्वीप, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजरात और केरल से जुड़े सांसदों ने सर्वाधिक प्रश्न पूछे। करीब 80 सांसदों ने एक भी सवाल पूछना जरूरी नहीं समझा। 10 से कम सवाल पूछने वालों की संख्या 179 रही। लोकसभा में सबसे ज्यादा सवाल वित्त विषय पर ही पूछे गए और पूछने वाले भी औद्योगिक पृष्ठभूमि के थे।

लोकसभा के 84 फीसदी सांसदों ने बहस में भाग लिया। महज 14 फीसदी चुने हुए जनप्रतिनिधि ही उत्कृष्ट प्रदशर्न कर पाए। सांसदों ने 'प्राइवेट मेम्बर बिल' का इस्तेमाल करने में कोई रुचि नहीं दिखाई। साल भर में लोकसभा की कार्यवाही 11,512 बार बाधित हुई, जबकि 110 बार स्थगित करनी पड़ी। इस साल कुल 163 बार सांसद गर्भगृह तक पहुंचे, जबकि पिछले साल यह संख्या 113 थी। बहिर्गमन भी 27 बार किया गया।

सांसद विकास निधि का इस्तेमाल सबसे अधिक मिजोरम के सांसदों ने किया। 20 सांसद ऐसे भी रहे, जिन्होंने एक भी पैसा खर्च नहीं किया।
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