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झुग्गियों के बच्चों के लिए अब चलती-फिरती कक्षा

जनता जनार्दन संवाददाता , Aug 13, 2012, 12:04 pm IST
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झुग्गियों के बच्चों के लिए अब चलती-फिरती कक्षा नई दिल्ली:तेरह साल के राजा कुमार ने सपने में भी नहीं सोचा था कि वह कभी स्कूल जाएगा। वह जीने के लिए कचरा बीनता है और दूसरी गली के बच्चों के साथ खेलता है। उसने आज एक सरकारी स्कूल में दाखिला लिया, जिसका चलता-फिरता शिक्षण केंद्र है।

राजा दिल्ली के ओखला इलाके की एक झुग्गी बस्ती में रहता है। उसने चलते-फिरते शिक्षण केंद्र में बुनियादी प्राथमिक शिक्षा लेनी शुरू की है। झुग्गी बस्ती के बच्चों को शिक्षित करने के लिए 'बचपन बचाओ' योजना के तहत इस शिक्षण केंद्र की शुरुआत पिछले महीने ही हुई है।

दक्षिणी दिल्ली में ओखला के पास बने न्यू संजय कैम्प में राजा कुमार ने मीडिया को बताया, "मेरे घर में सिर्फ मेरे पापा कमाते हैं। मेरे पांच भाई-बहन हैं, किसी तरह जी रहे हैं। मुझे परिवार की मदद के लिए काम करना पड़ता है।"

उसने कहा, "मैं भाग्यशाली हूं कि मुझे पढ़ने का एक मौका मिला..मैंने सोचा नहीं था कि कभी ऐसा भी हो सकता है।"

राजा ने कहा, "मुझे आगे की पढ़ाई और कमाई के बारे में बताया जा रहा है।" उसकी चमकती आंखों में अब बेहतर और सुरक्षित जीवन की उम्मीद नजर आ रही थी।

राजा की तरह वैसी ही पृष्ठभूमि वाले कई अन्य बच्चे भी चलते-फिरते शिक्षण केंद्र से जुड़कर बेहतर भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं।

यह शिक्षण केंद्र एक चमचमाती, तड़क-भड़क वाली पीली बस है जो स्कूल से चलकर उन बस्तियों में जाती है जहां के बच्चे आमतौर पर कचरा बीनते हुए या भीख मांगते देखे जाते हैं।

यह स्कूल भले ही पहियों पर चलता हो, लेकिन कक्षा में पूरी औपचारिक व्यवस्था है। बाकायदा रॉल नंबर पुकारा जाता है, हाजिरी रजिस्टर है और शिक्षक-शिक्षिकाएं हैं।पिछले दो हफ्तों में इस शिक्षण केंद्र में बच्चों की उपस्थिति बढ़कर 38 से 53 हो गई है।

यह चलता-फिरता शिक्षण केंद्र न्यू संजय कैम्प, कबाड़ी कैम्प और सोनिया गांधी कैम्प की झुग्गी बस्तियों के बच्चों को पढ़ना-लिखना सिखाने के बाद अब कालकाजी मंदिर, नेहरू प्लेस और तुगलकाबाद रेलवे स्टेशन के आस-पास की झुग्गी बस्तियों में जाएगा।

एक सामाजिक संगठन का अनुमान है कि राष्ट्रीय राजधानी की झुग्गी बस्तियों में 50,000 से अधिक बच्चे हैं जो बुनियादी शिक्षा से वंचित हैं।
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