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हरीश रावत ने किया 'उत्तराखंड की राजस्व पुलिस व्यवस्था' पुस्तक का लोकार्पण

हरीश रावत ने किया 'उत्तराखंड की राजस्व पुलिस व्यवस्था' पुस्तक का लोकार्पण नई दिल्ली के चाणक्य पुरी स्थित उत्तराखंड भवन में आयोजित एक पुस्तक लोकार्पण कार्यक्रम में यह उद्गार केंद्रीय श्रम मंत्री हरीश रावत ने व्यक्त किए। कि 'नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया द्वारा प्रकाशित व देवेन्द्र उपाध्याय द्वारा लिखी गई यह पुस्तक उत्तराखंड राज्य में भूमिसुधार के कार्यक्रमों के अतीत के साथ-साथ आगे का मार्गदर्शन भी करती है। यह पुस्तक इस दिशा में काम करने वालों के लिए उत्प्रेरक की तरह है।' वे नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित व प्रख्यात पत्रकार देवेन्द्र उपाध्याय द्वारा लिखी गई पुस्तक  'उत्तराखंड की राजस्व पुलिस व्यवस्था' के लोकार्पण समारोह में बाले रहे थे।

कार्यक्रम के प्रारंभ में नेशनल बुक ट्रस्ट के निदेशक एम.ए सिकंदर ने आगंतुकों का स्वागत करते हुए बताया कि किस तरह नेशनल बुक ट्रस्ट उत्तराखंड पर केंद्रित कुछ और पुस्तकों का प्रकाशन करने जा रहा है तथा इस राज्य के दूरस्थ अंचलों तक पुस्तकें पहुंचाने के लिए ट्रस्ट किस तरह विशेष प्रयास कर रहा है। उत्तराखंड पत्रकार परिषद के महासचिव अवतार नेगी ने पुस्तक की समीक्षा करते हुए बताया कि कोई 180 साल पुरानी  और देश में अपने तरीके की एकमात्र राजस्व पुलिस व्यवस्था 'मित्र-पुलिस' की अवधारणा का साकार रूप है। 

राजस्व पुलिस के कर्मचारी बगैर किसी वर्दी के आम लोगों की जमीन से जुड़ी समस्याओं के साथ-साथ कानून-व्यवस्था से जुड़े मसलों पर भी मित्रवत योगदान देते हैं। नेगी ने इस पुस्तक के प्रकाशन को उत्तराखंड राज्य हीं नहीं बल्कि देश के लिए बड़ी उपलब्धि निरूपित किया। लेखक श्री देवेन्द्र उपाध्याय ने अपने उदबोधन में बताया कि किस तरह कुछ साल पहले अनिल सिन्हा की प्रेरणा से उन्होंने इस विषय पर एक आलेख लिखा था और बाद में यह एक पुस्तक के रूप में सामने आया।

पुस्तक के लोकार्पण के बाद इस अवसर के मुख्य अतिथी व केंद्रीय मंत्री हरीश रावत ने बेहद सहज शैली में बताया कि उत्तराखंड का भूमि-प्रबंधन बहुत पुराना है, लेकिन इसमें सुधार के कार्य अलग राज्य बनने के बाद अपेक्षित गति नहीं पा सके। रावत ने उम्मीद जताई कि इस पुस्तक को उत्तराखंड के विकास के लिए काम कर रहे सभी लोग अवश्य पढ़ेंगे। मंत्री महोदय ने पुस्तक के कवर पेज की विशेषतौर पर तारीफ करते हुए अनुरेध किया कि इस पुस्तक को केंद्र में रख कर एक विचार गोष्ठी का अयोजन किया जाना चाहिए। कार्यक्रम का संचाल नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया के संपादक पंकज चतुर्वेदी ने किया।
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