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आज के दर्शकों को धोखा नहीं दिया जा सकता : रेवती

आज के दर्शकों को धोखा नहीं दिया जा सकता : रेवती नई दिल्ली: 'मित्र : माई फ्रेंड' व 'फिर मिलेंगे' जैसी फिल्मों का निर्देशन कर चुकीं अभिनेत्री रेवती कहती हैं कि बीते बरसों के दौरान बदलाव आया है। अब लोगों के जेहन में फिल्में लम्बे समय तक नहीं रहतीं लेकिन फिर भी कमजोर सामग्री प्रस्तुत कर दर्शकों को धोखा देना मुश्किल है। यहां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में शामिल होने के लिए पहुंचीं रेवती ने एक साक्षात्कार में कहा, "इन दिनों फिल्में दर्शकों का ध्यान बहुत कम समय के लिए खींच पाती हैं इसलिए आपको उन्हें बहुत थोड़े समय में बहुत कुछ देना होता है। आपको बहुत ज्यादा मेहनत करने, बहुत काम करने की जरूरत महसूस होती है।"

उन्होंने कहा, "आज के लोग बहुत जागरूक हैं क्योंकि वे विश्व सिनेमा देखते हैं। यह मजेदार बात है कि आप आजकल के दर्शकों को धोखा नहीं दे सकते, आपको विस्तार से काम करना पड़ता है। शहरी दर्शकों के लिए ऐसा करना जरूरी है लेकिन अन्य दर्शकों के लिए आपको ऐसी कहानी कहने की जरूरत होती है, जो उनके दिलों को छू सके।"

रेवती दक्षिण के फिल्मोद्योग में एक जाना-पहचाना नाम हैं। उन्होंने तमिल फिल्म 'मन वस्नेय' (1983) से अभिनय की शुरुआत की थी और फिल्मोद्योग में अपनी विशेष जगह बनाई।

आठ साल बाद उन्होंने बॉलीवुड में 'लव' फिल्म से शुरुआत की। इसमें उन्होंने सलमान खान के साथ अभिनय किया था। उन्होंने 'अब तक छप्पन', 'डरना मना है' और 'दिल जो भी कहे' जैसी हिंदी फिल्मों में अभिनय किया।

साल 2002 में उन्होंने 'मित्र: माई फ्रेंड' से निर्देशन की शुरुआत की थी। उनके निर्देशन में बनी अगली फिल्म 2004 में आई 'फिर मिलेंगे' थी। इसमें एचआईवी-एड्स के मुद्दे को उठाया गया था। रेवती मानती हैं कि हर फिल्म के बनने के पीछे एक मकसद होना चाहिए।

उन्होंने कहा, "एक अभिनेत्री के रूप में भी मैं फिल्मों को चुनने में सावधानी बरतती हूं। फिल्म का कोई मकसद होना चाहिए।" 45 वर्षीया रेवती को उनकी लघु फिल्म 'रेड बिल्डिंग व्हेयर द सन सेट्स' के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। इस फिल्म में दिखाया गया है कि अभिभावकों के बीच झगड़े से बच्चे किस तरह प्रभावित होते हैं।

रेवती खुद के अभिनेत्री से निर्देशक बनने को बहुत स्वाभाविक घटना मानती हैं। उन्होंने कहा, "एक अभिनेत्री के रूप में आप फिल्म में एक हिस्सा होते हैं लेकिन फिल्मकार एक कहानी गढ़ने के विचार ले लेकर उसके हर पहलू पर काम करते हुए एक फीचर फिल्म बनाता है, जो बहुत रुचिकर है। शुरुआत में मैंने लघु फिल्मों के जरिए ऐसा करने की कोशिश की, उसके बाद मुझे लगा कि मैं यही करना चाहती थी।"

रेवती फिल्मोद्योग में लगभग तीन दशक बिता चुकी हैं।

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