धर्म-अध्यात्म
आज लगेगा पूर्ण चंद्रग्रहण, भूलकर न करें ये काम जनता जनार्दन संवाददाता ,  Jan 31, 2018
आज साल 2018 का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। साल का पहला चंद्र ग्रहण होने की वजह से इसकी महत्ता काफी बढ़ गई है। इस साल के पहले चंद्र ग्रहण को बेहद खास इसलिए माना जा रहा है क्योंकि आज चंद्र ग्रहण के समय पांच ग्रह मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि आकाश मंडल में अस्त रहेंगे। इसका स्पर्श सायंकाल 5 बजकर 18 मिनट पर होगा, जबकि ग्रहण का मध्यकाल शाम 7 बजे और मोक्ष रात्रि 8 बजकर 42 मिनट पर होगा। ....  समाचार पढ़ें
गोवर्धन पूजा 2017: जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि जनता जनार्दन डेस्क ,  Oct 20, 2017
दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पर्व मनाया जाता है। इस पर्व के दिन शाम के समय खास पूजा रखी जाती है। बता दें कि इसी दिन श्रीकृष्ण ने आज ही के दिन इंद्र का मानमर्दन कर गिरिराज की पूजा की थी। इस दिन मंदिरों में ....  समाचार पढ़ें
 दीवाली में अद्भुत संयोग से बरसेगी लक्ष्मी कृपा जनता जनार्दन संवाददाता ,  Oct 19, 2017
दीपावली की शाम देव मंदिरों के साथ ही गृह द्वार, कूप, बावड़ी, गोशाला, इत्यादि में दीपदान करना चाहिए। रात्रि के अंतिम प्रहर में लक्ष्मी की बड़ी बहन दरिद्रा का निस्तारण किया जाता है। व्यापारी वर्ग को इस रात शुभ तथा स्थिर लग्न में अपने प्रतिष्ठान की उन्नति के लिए कुबेर लक्ष्मी का पूजन करना चाहिए। ....  समाचार पढ़ें
 करवा चौथ और 'महत्व' भूलकर भी ना करें ये गलतियां कृष्णा तिवारी ,  Oct 08, 2017
हिंदू पंचाग के अनुसार कार्तिक माह के चौथे दिन होता है। पंरपराओं के अनुसार इस दिन शादीशुदा महिलाएं या जिनकी शादी होने वाली हैं वो अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत करती हैं। ये व्रत सुबह सूरज उगने से पहले से लेकर और रात्रि में चंद्रमा निकलने तक रहता है। ये एकदिवसीय त्योहार अधिकतर उत्तरी भारत के राज्यों में मनाया जाता है। हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश, पंजाब, राज्यस्थान ....  समाचार पढ़ें
नित्य मानस चर्चाः धर्म परायन सोइ कुल त्राता, राम चरन जा कर मन राता दिनेश्वर मिश्र ,  Sep 20, 2017
वही गुणी है, वही ज्ञानी है, वही पृथ्वी का भूषण है, वही पंडित है, वही दानी है, वही धर्म परायण है, वही कुल का रक्षक है, वही नीतिज्ञ है, वही परम बुद्धिमान है, वही वेदज्ञ है, वही कवि है, वही विद्वान है तथा वही रणधीर है जो निश्छल-भाव से श्रीरघुबीर का भजन करता है। वह देश धन्य है, जहाँ श्रीगंगाजी हैं, वह स्त्री धन्य है जो पातिब्रत-धर्म का पालन करती है, वह राजा धन्य है, जो न्याय करता है और वह ब्राह्मण धन्य है, जो अपने धर्म पर अडिग रहता है। ....  समाचार पढ़ें
नित्य मानस चर्चाः जहँ लगि साधन बेद बखानी, सब कर फल हरि भगति भवानी दिनेश्वर मिश्र ,  Sep 19, 2017
श्रीमद्भागवत् में वर्णन आता है कि जब ब्रज में मक्खन चुराते हुए भगवान को एक गोपी पकड़ लेती है, तो भगवान बड़े भोलेपन से कहते हैं--गोपी! क्या यह तुम्हारा घर है? मैं इसे अपना घर समझकर भीतर आ गया था। इसका अर्थ है कि वस्तुतः स्वामी तो एकमात्र ईश्वर ही है, पर जीव ऐसा स्वामी बन बैठा है कि जिसने भगवान को ही चोर की उपाधि दे दी है। वस्तुतः ईश्वर की वस्तु पर हम अपना ही अधिकार मानते हैं। ....  समाचार पढ़ें
नित्य मानस कथाः संत हृदय नवनीत समाना, कहा कबिन्ह परी कहइ न जाना राकेश उपाध्याय ,  Sep 18, 2017
जो भी लोग भागवत धर्म का पालन करने वाले है, चाहे वे बहुत ज्ञानी हों, महापंडित हों, सन्यासी हों, तपस्वी हों, सिद्ध महापुरुष हों, विरक्ति हों और चाहे बहुत बड़े विज्ञानी ही क्यों न हों पर श्री राम के भजन के बिना वे भी भव सागर से पार नहीं हो सकते क्यों की वे तारण हार हैं, उन्होंने बहुतों को तारा है। ....  समाचार पढ़ें
नित्य मानस कथाः श्रुति पुरान सब ग्रंथ कहाहीं, रघुपति भगति बिना सुख नाहीं रामवीर सिंह ,  Sep 16, 2017
भुशुण्डिजी कह रहे हैं कि गरुड़जी! भगवान शिव (जो जगद्गुरू हैं), ब्रह्माजी (सृष्टि के रचयिता), शुकदेवजी (भगवान व्यास के गर्भज्ञानी पुत्र ), सनकादिक मुनि (जो आदिज्ञानी हैं और ब्रह्माजी के पुत्र हैं), देवर्षि नारद (जो भगवान के मन कहे जाते हैं) तथा अन्य ब्रह्मतत्व में लीन निपुण मुनिजन, सभी एक मत से स्वीकार करते हैं कि संसार सागर को पार करने के लिए और आनन्द सिंधु में डुबकी लगाने के लिए "करिअ राम पद पंकज नेहा"। ....  समाचार पढ़ें
नित्य मानस कथाः एहि बिधि सकल जीव जग रोगी, सोक हरष भय प्रीति बियोगी रामवीर सिंह ,  Sep 15, 2017
व्यक्ति में सही सही आत्मावलोकन की शक्ति पैदा करने की सामर्थ्य केवल सनातन वैदिक धर्म के पास है। जब व्यक्ति अपनी आंतरिक वृत्तियों का अवलोकन दृढ़ता से निष्पक्ष होकर करेगा तो संभव है कि समझ पड़े कि मुझे जो भौतिक उपलब्धि हुई है,उसमें मेरी इच्छा और यत्न का कारण कुछ और ही है। मेरी इतनी क्षमता नहीं थी। जिस परिवेश में जन्म मिला,जीवन में जैसे लोग मिले ,जो कार्यक्षेत्र मिला ,वह सब मेरे स्वयं के प्रयत्न से नहीं वल्कि मेरी जन्मजन्मांतर की पोषित वृत्ति के अनुरूप ही मिला है।मेरी पात्रता पहले ही आकलित की जा चुकी है। मैं कुछ मानसिक रोग साथ लाया हूँ। ....  समाचार पढ़ें
नित्य मानस कथाः मोह सकल ब्याधिन्ह कर मूला, तिन्ह ते पुनि उपजहिं बहु सूला रामवीर सिंह ,  Sep 14, 2017
गरुड़जी ने सात प्रश्न किए थे। छ: प्रश्नों के उत्तर देने के बाद अब मानस रोग संबंधित सातवें प्रश्न का उत्तर भुशुण्डिजी दे रहे. भुशुण्डिजी कह रहे हैं कि व्यक्ति के दुख का कारण कोई अन्य व्यक्ति या वस्तु नहीं है। मानस रोग ही दुख के कारण हैं। फिर ये रोग अथवा ब्याधि क्या हैं ? तो कहते हैं "मोह सकल ब्याधिन कर मूला"। अर्थात मोह (अज्ञान ) से ही सारे मानस रोग उत्पन्न होते हैं। ....  समाचार पढ़ें
वोट दें

क्या विजातीय प्रेम विवाहों को लेकर टीवी पर तमाशा बनाना उचित है?

हां
नहीं
बताना मुश्किल