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संस्कृति
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गणेशोत्सव की धूम से गुंजायमान रहा नोएडा का आदित्य सेलेब्रिटी होम्स जनता जनार्दन संवाददाता ,  Sep 29, 2018
नोएडा के आदित्य सेलेब्रिटी होम्स में गणेत्सोत्सव बेहद धूमधाम और भव्यता से मना. 13 सितंबर को श्री गणेश जी के आगमन और स्थापना से उत्सव की शुरुआत हुई. इसके पश्चात हर दिन सुबह-शाम दोनों वक्त प्रसाद, भोग और आरती के साथ भजन, कीर्तन, सत्संग आदि का आयोजन तो हुआ ही बच्चों और बड़ों के लिए कैसे ये दिन यादगार हों इसकी भी व्यवस्था की गयी थी. ....  समाचार पढ़ें
सावन माह में जान लें वो खास बातें जिनसे शिव होंगे प्रसन्न जनता जनार्दन संवाददाता ,  Jul 29, 2018
इस साल वैसे तो सावन महीने की शुरुआत 27 जुलाई 2018 से हो जायेगी, लेकिन उदया तिथि में सावन का पहला दिन 28 जुलाई 2018 को पड़ेगा इसलिए वास्तविक सावन का आरंभ तभी से माना जाएगा। इसके बाद 26 अगस्त 2018 को सावन मास का आखिरी दिन होगा। 26 अगस्त को रविवार पड़ रहा है, इसलिए सावन का आखिरी सोमवार 20 अगस्त को होगा यानि इस महीने में अबकी बार 4 सोमवार पड़ेंगे। ....  समाचार पढ़ें
फादर्स डे 2018: गूगल ने आज होम पेज पर बनाया डूडल जनता जनार्दन संवाददाता ,  Jun 17, 2018
दुनिया का सबसे बड़ा सर्च इंजन गूगल आज फादर्स डे मना रहा है. गूगल ने आज 109वां फादर्स डे पर अपने होम पेज पर डूडल लगाया है. भारत समेत कई देशों में 17 जून, 2018 को फादर्स डे के रूप में मनाया जा रहा है. इस वर्ष 109वां फादर्स डे सेलिब्रेट किया जा रहा है. यह दिन हर साल जून के तीसरे रविवार को मनाया जाता है. ....  समाचार पढ़ें
विश्व चित्रगुप्त प्रगटोत्सव की तैयारियां का हुआ शुभारम्भ आकांक्षा सक्सेना ,  Feb 06, 2018
विश्व चित्रगुप्त प्रगटोत्सव की तैयारियां आरम्भ हो गयी हैं। भगवान चित्रगुप्त जी के अवतरण पर्व देश - विदेश में पुरे हर्षोल्लास के साथ चैत पूर्णिमा के दिन मनता आ रहा है। इस वर्ष यह 31 मार्च को मनाया जायेगा। कायस्थवाहिनी अंतर्राष्ट्रीय ने इसकी भव्य तैयारियों के लिए अपने संगठन से आहवाहन किया है ;भगवान चित्रगुप्त जी जो प्राणियों के चित्त में गुप्त रूप से विराजित होकर उनके शुभ-अशुभ कर्मों का लेखा-जोखा रखने वाले प्रभु श्री चित्रगुप्त जी का अवतरण पर्व देश में चैत ....  समाचार पढ़ें
गूगल ने साल 2018 का स्वागत पेंगुइन परिवार के उगते सूरज को निहारने वाले डूडल से किया अजय पुंज ,  Jan 01, 2018
सर्च इंजन गूगल ने साल 2018 का स्वागत एक खूबसूरत डूडल से किया है जिसमें एक पेंगुइन परिवार उगते सूरज को निहार अपने घर लौटने की तैयारी कर रहा है. यह डूडल धरती पर बदलते पर्यावरण में नई उम्मीदें ढूंढ़ रहा है. इससे पहले कल नए साल की पूर्व संध्या पर भी एक पेंगुइन और तोते को नए साल का स्वागत करते दिखाया गया था. ....  समाचार पढ़ें
नये साल की पूर्व संध्याः गूगल पेंगुइन और तोते का डूडल बना मना रहा जनता जनार्दन संवाददाता ,  Dec 31, 2017
गूगल ने साल के अंतिम दिन पर खास अंदाज में लोगों को बधाई दी है. गूगल ने आज एक अनोखा डूडल बनाया है. गूगल डूडल में देखा जा सकता है कि कुछ पेंगुइन और तोते अपने स्वदिष्ट परंपराओं का आनंद उठा रहे हैं और और रिंरिंग के साथ इस अवसर का जश्न मना रहे हैं. इस दिन सभी अपने हाथों से आतिशबाजियां करते हैं और सोचते हैं कि और कितना समय साथ में गुजार सकते हैं. ....  समाचार पढ़ें
गीता के कर्मयोग का ज्वलंत उदाहरण हैं हरियाणा की बेटियां: अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव 2017 में राष्ट्रपति जनता जनार्दन संवाददाता ,  Nov 25, 2017
भारत के राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द आज भगवान श्री कृष्ण की कर्मभूमि कुरुक्षेत्र के दौरे पर गीता पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन करने पहुंचे, जहां उन्होंने श्रीमद्भगवत गीता की महत्ता का उल्लेख किया. ....  समाचार पढ़ें
निर्जला एकादशी: इस एकादशी व्रत से भीम को मिला स्वर्ग, आप भी पाएं लाभ जनता जनार्दन डेस्क ,  Jun 05, 2017
पांचों पांडवों में भीमसेन सबसे अधिक खाने वाले थे। इनके लिए सबसे कठिन कार्य था भूखे रहना। इस कारण से यह कोई व्रत नहीं करते थे। लेकिन अन्य सभी भाई एकादशी व्रत रखते थे। एक बार महर्षि व्यास जी पांडवों के पास आए तो भीमसेन अपना प्रश्न लेकर महर्षि के पास पहुंचे। ....  समाचार पढ़ें
कोरियन कल्चरल सेंटर के 'ड्रीम प्रॉजेक्ट 2016' में बिखरा संगीत का जादू जनता जनार्दन संवाददाता ,  Jul 22, 2016
भारत और दक्षिण कोरिया के रिश्ते को मजबूत बनाने की गरज से हुए 'ड्रीम प्रॉजेक्ट 2016' का समापन समारोह लाजपत नगर स्थित, कोरियन कल्चरल सेंटर में हुआ. कार्यक्रम की शुरुआत निदेशक किम कुम प्योंग द्वारा दीप प्रज्वलित कर हुई. इसके अंतर्गत संगीत सीखने की ललक रखने वाले मेधावी छात्रों को चयनित कर ट्रेनिग दी गई थी. ....  समाचार पढ़ें
अमित मौर्य ,  Jul 31, 2018
धर्म सत्ता स्थापित करने का गैर राजनीति उपकरण जब -जब और जहां-जहां बना संस्कृत विकृति हो ही गयी ...संस्कृति छद्म और पाखण्ड से परे एक सात्विक परम्परा होती है ...वैदिक युग के बाद त्रेता में राम के नेतृत्व में धर्म और राजनीति का घाल मेल हुआ परिणाम सामने आया ...जर (आधिपत्य ), जोरू (पत्नी ) और जमीन के विवादों का वहिरुत्पाद "आध्यात्म " कहा जाने लगा ... ....  लेख पढ़ें
सोनपुर मेलाः बिहार के गौरवशाली इतिहास का प्रतीक जनता जनार्दन संवाददाता ,  Nov 02, 2017
मोक्षदायिनी गंगा और गंडक नदी के संगम और बिहार के सारण और वैशाली जिले के सीमा पर ऐतिहासिक, धार्मिक और पौराणिक महत्व वाले सोनपुर क्षेत्र में लगने वाला सोनपुर मेला बिहार के गौरवशाली इतिहास का प्रतीक है। प्रत्येक वर्ष कार्तिक महीने से प्रारंभ होकर एक महीने तक चलने वाले इस प्रसिद्ध मेले का उद्घाटन हो गया। प्राचीनकाल से लगने वाले इस मेले का स्वरूप कलांतर में भले ही कुछ बदला हो, लेकिन इसकी महत्ता आज भी वही है। ....  लेख पढ़ें
महीना भर चलता है विश्व प्रसिद्ध सोनपुर मेला जनता जनार्दन संवाददाता ,  Nov 14, 2016
गंगा और गंडक नदी के संगम पर ऐतिहासिक, धार्मिक और पौराणिक महत्व वाला सोनपुर मेला एक महीना चलता है। विश्व प्रसिद्ध यह मेला शनिवार से शुरू हुआ। इस मेले को 'हरिहर क्षेत्र मेला' अैर 'छत्तर मेला' के नाम से भी जाना जाता है। ....  लेख पढ़ें
भारत के मन का सांस्कृतिक सृजन है दीपपर्व हृदयनारायण दीक्षित ,  Oct 29, 2016
भारतीय अनुभूति का विराट प्रकाशरूपा ही है। पूर्वजों ने प्रकाश दीप्ति अनुभूति को दिव्यता कहा। सूर्य प्रकाश में वही दिवस है। इसी की अंत: अनुभूति दिव्यता या डिवाइनटी है। इसलिए जहां जहां दिव्यता वहां वहां देवता। ....  लेख पढ़ें
इतिहास बन गया डोली का अस्तित्व जनता जनार्दन डेस्क ,  Jan 21, 2016
चलो रे डोली उठाओ कहार..पिया मिलन की ऋतु आई..। यह गीत जब भी बजता है, कानों में भावपूर्ण मिसरी सी घोल देता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि इसमें छिपी है किसी बहन या बेटी के उसके परिजनों से जुदा होने की पीड़ा के साथ-साथ नव दाम्पत्य जीवन की शुरुआत की अपार खुशी! जुदाई की इसी पीड़ा और मिलन की खुशी के बीच की कभी अहम कड़ी रही 'डोली' आज आधुनिकता की चकाचांैध में विलुप्त सी हो गई है जो अब ढूढ़ने पर भी नहीं मिलती। ....  लेख पढ़ें
पितृपक्ष में पिंडदानियों के लिए तैयार 'मोक्षधाम' गया मनोज पाठक ,  Sep 27, 2015
पितरों को मोक्ष दिलाने की कामना के साथ पुरखों को पिंडदान करने के लिए बिहार के गया आने वाले देश-दुनिया के पिंडदानियों के स्वागत के लिए गया पूरी तरह तैयार है।प्रशासन और गयापाल पंडा समाज के द्वारा तीर्थनगरी गया में आने वाले लोगों के रहने की व्यवस्था की गई है जबकि धर्मशाला, होटल, निजी आवास पिंडदानियों से भर गए हैं। ....  लेख पढ़ें
विवाह के मायनों पर प्रश्नचिह्न् जनता जनार्दन डेस्क ,  Sep 24, 2015
भारत में विवाह को 'करार' का रूप दिया जाना अटपटा जरूर लगता है, लेकिन बदलते परिवेश में यह अपरिहार्य हो गया है। जिस तेजी से समाज, उसकी सोच और मान्यताओं में बदलाव आया है, उसके चलते विवाह का 'एग्रीमेंट' भी जरूरी हो गया है।सोशल मीडिया के दखल, संचार क्रांति और अपरिचितों से साइबर संपर्क के बाद 5-10 वर्षो में देखते-देखते ऐसी अनगिनत घटनाएं हो चुकी हैं, जिनसे विवाह के मायनों पर ही प्रश्नचिह्न् लग गए हैं। ....  लेख पढ़ें
डीकांचल पर्वत से हुई होलिका दहन की शुरुआत जनता जनार्दन डेस्क ,  Mar 05, 2015
होली जीवन में उमंग और उत्साह भरने वाला त्योहार है। ऐसा माना जाता है कि रंगों के इस पर्व की शुरुआत बुंदेलखंड की उस पहाड़ी से हुई, जिसे डीकांचल पर्वत कहा जाता है। इस पर्वत पर भक्त प्रह्वलाद को जलाने की कोशिश में बुआ होलिका स्वयं जल गई थी। बाद में लोगों ने रंग-अबीर उड़ाकर खुशियां मनाईं, तभी से फाल्गुन की पूर्णिमा पर पूरे देश में होलिका दहन की परंपरा चली आ रही है।डीकांचल पर्वत बेतवा नदी के किनारे स्थित है। यह झांसी जिले के एरच कस्बे के डिकौली गांव की हद में आता है। यह वह इलाका है, जो राजा हिरण्यकश्यप के राज्य की राजधानी हुआ करता था। हिरण्यकश्यप खुद को भगवान मानता था। उसे यह पसंद नहीं था कि उसके राज्य में किसी और की पूजा-अर्चना की जाए। ....  लेख पढ़ें
पितृपक्ष विशेष: पिंडदान से पितरों की मुक्ति जनता जनार्दन डेस्क ,  Sep 08, 2014
हमारी संस्कृति में पितरों का स्थान देवताओं से भी उच्च है। पितरों की प्रसन्नता के बिना देवता भी प्रसन्न नहीं होते। श्राद्ध का अर्थ अपने देवों, परिवार, संस्कृति और ईष्ट के प्रति श्रद्धा अभिव्यक्त कर उन्हें तृप्त करना है।भारतीय संस्कृति में मृत्यु को महोत्सव माना है। जहां जन्म निश्चित है तो मृत्य भी अटल है और इसी सत्य को हमारे पूर्वजों ने स्वीकार किया है। मृत्यु के बाद अपने पुरखों की स्मृति को संजोने या उनकी तृप्ति के जतन करने का अवसर ही पितृ पक्ष के रूप में उपस्थित होता है। ....  लेख पढ़ें
'मत भूल मोदी मैं सूर्यपुत्री तापी हूं. . . . . . .! रामकिशोर पंवार रोंढावाला ,  Jul 21, 2014
आदिकाल से लेकर अंत तक भारत एवं भारतीय संस्कृति में नदी -नारी दोनो को ही जीवन दयानी के रूप के रूप मूें पूजा जाता रहेगा। जहां एक ओर नारी जन्म देती है तो वही दुसरी ओर नदी मोक्ष प्रदान करती है। एक सच तो यह भी है कि प्राचिन इतिहास की अनेक सभ्यताओं का विकास और विनाश नदियों के किनारे हुआ है। इतिहास के पन्नो में छपी कहानियां एवं उन सभ्याताओं के अवशेष बताते है कि अभी तक की प्रमाणित तथ्य एवं प्रमाण बताते है कि किसी भी सभ्य समाज एवं संस्कृति के विकास और विनाश के पीछे नदी - नारी का मान - सम्मान जुड़ा रहा है। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि किसी नदी या नारी के मान - सम्मान को जब - जब ठेस पहुंची है तब - तब नया इतिहास लिख गया है। ....  लेख पढ़ें
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