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धर्म-अध्यात्म
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हम पहुँचे प्रयागराज तीर्थस्थल: जहाँ गंगा जमुना और सरस्वती नदियों का एक जगह मिलन होता अमिय पाण्डेय ,  Jan 24, 2021
गंगा, यमुना, सरस्वती, कावेरी, गोदावरी, कृष्णा, सिंधु, क्षिप्रा, ब्रह्मपुत्र आदि सभी नदियों के अपने-अपने संगम है। हिंदू धर्म के तीन देवता हैं शिव, विष्णु और ब्रह्मा और तीन देवियां हैं पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती। इसीलिए सभी जगह त्रिवेणी का महत्व और बढ़ जाता है। त्रिवेणी का अर्थ है वह स्थान जहां तीन नदियां आकर मिलती हों। जहां तीन नदियों का संगम होता हो। प्रयाग की गंगा नदी में एक स्थान ऐसा है जहां तीन नदियों का मिलन होता है। संगम और त्रिवेणी वस्तुत: एक ही स्थान है जहां गंगा, यमुना, सरस्वती का संगम होता है। यह दुर्लभ संगम विश्व प्रसिद्ध है। गंगा, यमुना के बाद भारतीय संस्कृति में सरस्वती को महत्व अधिक मिला है। लेकिन सवाल यह उठता है कि यहां गंगा और यमुना तो स्पष्ट नजर आती है लेकिन सरस्वती नहीं, तो फिर यह कैसे त्रिवेणी संगम हुआ? दरअसल इसके पीछे एक कथा है। यह कथा श्रीमद्भागवत पुराण में बड़े ही विस्तार से मिलती है। सरस्वती पूर्व काल में स्वर्णभूमि में बहा करती थी। स्वर्णभूमि का बाद में नाम स्वर्णराष्ट्र पडा। धीरे धीरे कालान्तर में यह सौराष्ट्र हो गया। किन्तु यह सौराष्ट्र प्राचीन काल में पुरा मारवाड़ भी अपने अन्दर समेटे हुए था। सरस्वती यहां पर बड़े ही प्रेम बहती थी। नित्य इनकी पूजा और अर्चना होती थी। धीरे धीरे चूंकि इस प्रदेश के लोग यवनों के संपर्क में आकर यवन आचार विचार के मानने वाले होने लगे तो सरस्वती ब्रह्माजी से अनुमति लेकर मारवाड़ एवं सौराष्ट्र छोड़ कर प्रयाग में आकर वास करने लगी और तब से सरस्वती के वहां से चले आने के बाद वह पूरी भूमि ही मरू भूमि में परिवर्तित हो गयी जिसे आज राजस्थान के नाम जाना जाता है। ....  समाचार पढ़ें
शनिदेव को वर्ष 2021 में रखें शांत, इस बार नहीं बदल रही है शनि की चाल जनता जनार्दन संवाददाता ,  Jan 01, 2021
पंचांग के अनुसार 2 जनवरी 2021 का दिन बहुत ही शुभ है. इस दिन चतुर्थी की तिथि है. पौष मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है. इस गणेश जी की पूजा करने का विधान है. गणेश जी को विघ्नहर्ता भी कहा जाता है, ये सभी प्रकार के संकटों को दूर करने वाले देव माने गए हैं. ....  समाचार पढ़ें
तीर्थ यात्रा के दौरान इन नियमों का जरूर करें पालन जनता जनार्दन संवाददाता ,  Dec 26, 2020
हिंदू धर्म में तीर्थयात्रो का विशेष महत्व है. वेदों और पुराणों में भी तीर्थयात्रा करने का महत्व माना गया है. तीर्थयात्रा का उद्देश्य ईश्वर के करीब रहने की अनुभूति करना और पुण्य प्राप्त करना होता है. ....  समाचार पढ़ें
जानें, कब मनाई जाएगी गीता जयंती, क्यों मानवता के लिए जरुरी है जनता जनार्दन संवाददाता ,  Dec 19, 2020
प्रत्येक साल मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन इसे मनाया जाता है. हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था. इस साल 25 दिसंबर को गीता जयंती मनाई जाएगी. गीता को हिंदू धर्म सार ग्रंथ माना जा सकता है. धर्म, कर्म, अध्यात्म, ब्रह्म, जीवसभी विषयों पर इसमें चर्चा की गई है. गीता की शिक्षाएं युगों युगों से मानवता को सत्य की राह दिखाती आ रही ....  समाचार पढ़ें
लक्ष्मी जी का आर्शीवाद चाहिए तो इन 3 बातों को अच्छे ढंग से जान लें जनता जनार्दन संवाददाता ,  Dec 17, 2020
अहंकारी मनुष्य को लक्ष्मी जी पसंद नहीं करती हैं लक्ष्मी जी अहंकारी व्यक्ति को पसंद नहीं करती हैं. रावण ज्ञानी और शक्तिशाली था, लेकिन अहंकारी था. इसलिए रावण की सोने की लंका भी नष्ट हो गई. समझदार व्यक्ति को अहंकार से दूर रहना चाहिए. ....  समाचार पढ़ें
मासिक शिव रात्रि पर ऐसे करें भगवान शिव को प्रसन्न, आर्थिक और वैवाहिक जीवन की परेशानियां होंगी दूर जनता जनार्दन संवाददाता ,  Dec 12, 2020
महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि होती है. और इस विशेष दिन भगवान शिव और माता पावती की पूजा अर्चना का खूब लाभ मिलता है. इस बार 13 दिसंबर यानि कि रविवार को मासिक शिवरात्रि का व्रत किया जाएगा. इस दिन आप भी व्रत करके भगवान शिव को प्रसन्न कर सकते हैं. और पा सकते हैं उनके आर्थिक और वैवाहिक जीवन को खुशहाल ब ....  समाचार पढ़ें
भगवान श्री कृष्ण के पैरों तले थे ये पवित्र चिन्ह जनता जनार्दन संवाददाता ,  Dec 05, 2020
मार्गशीर्ष के महीने में भगवान कृष्ण की उपासना का विधान होता है यानि इस महीने इनकी आराधना की जाए तो अति शुभ फलों की प्राप्ति की जा सकती है. इसीलिए कृष्ण से जुड़ी एक अहम जानकारी आपको हम दे रहे हैं. क्या आप जानते हैं कन्हैया के पैरों तले यानि उनके तलवे पर कुछ पवित्र चिन्ह थे जिन्हें शुभता का संकेत माना जाता है. कहा जाता है कि अगर इन चिन्हों में से एक भी चिन्ह किसी के तलवे पर हो तो वो मनुष्य किस्मत का धनी होता है. चलिए बताते हैं उन्हीं विशेष चिन्हों के बारे में. ....  समाचार पढ़ें
खरीद लें कार, बाइक और मकान, लगने जा रहा है खरमास जनता जनार्दन संवाददाता ,  Dec 05, 2020
खरमास का आरंभ होने जा रहा है. हिंदू धार्मिक मान्यता के अनुसार खरमास में शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं, इसके साथ ही मांगलिक कार्यों पर भी रोक लग जाएगी. खरमास कब से लग रहे हैं, जानते हैं. ....  समाचार पढ़ें
अघोरेश्वर अवधूत भगवान राम जी का 29वाँ निर्वाण दिवस क्रीं कुण्ड शिवाला में श्रद्धा पूर्वक मनाया गया अमिय पाण्डेय ,  Dec 01, 2020
वह मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर तथा पूजा आदि की प्रचलित अवधारणा से बिल्कुल भिन्न विचार रखते थे। उनका कहना था कि पत्थरों, ईंटो से निर्मित देवालयों में यदि विश्वास चिपका तो सर्वनाश है। 29 नवम्बर 1992 को उन्होंने अमेरिका के कैलिफोर्निया में पद्मासन में शरीर छोड़ा। भक्तों के दर्शन के लिए उनका शरीर उसी अवस्था में वाराणसी लाया गया था। इस दिन उनका परिनिर्वाण दिवस धूमधाम से मनाया जाता है। ....  समाचार पढ़ें
इस साल का आखिरी चंद्र ग्रहण लगेगा नवंबर में, जानें तारीख जनता जनार्दन संवाददाता ,  Nov 10, 2020
साल 2020 का आखिरी दूसरा महीना नवंबर चल रहा है और इस मास में इस साल का आखिरी चंद्रग्रहण लगाने जा रहा है. साल का आखिरी चंद्रग्रहण नवंबर मास की 30 तारीख़ दिन सोमवार को लगेगा. इस साल में कुल 6 {चंद्र ग्रहण -4 और सूर्य ग्रहण-2} ग्रहण लगने हैं. जिसमें से आखिरी चंद्रग्रहण 30 नवंबर को और आखिरी सूर्य ग्रहण दिसंबर में लगेगा. ....  समाचार पढ़ें
अपने घर पर ही रहकर मनायें गुरू पूर्णिमा का पर्व: सिद्धार्थ गौतम राम जी जनता जनार्दन संवाददाता ,  Jun 14, 2020
अपने घर पर ही रहकर मनायें गुरू पूर्णिमा का पर्व: सिद्धार्थ गौतम राम जी वाराणसी: देश भले ही अनलॉक हो गया है। लेकिन इस वैश्विक महामारी कोरोना वायरस का खतरा बना हुआ है । ऐसी स्थिति मे अपने भक्तों को संक्रमण से दूर रखने के लिए विश्व विख्यात अघोरपीठ औघोराचार्य बाबा कीनाराम अघोर शोध एवं सेवा संस्थान क्रीकुण्ड शिवाला के पीठाधीश्वर अघोराचार्य बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी ने कहा कि आप सभी से विनम्र निवेदन है कि कोरोना वैश्विक महामारी कोविड19 के प्रकोप के कारण सम्पूर्ण मानव जाति के अस्तित्व पर संकट उत्पन्न हो गया है। ....  लेख पढ़ें
स्वामी सहजानन्द सरस्वती: जिनके जीवन गाथा में निहित है जगत सन्देश गोपाल जी राय ,  Feb 21, 2019
ह ठीक है कि उनके जीते जी जमींदारी प्रथा का अंत नहीं हो सका। लेकिन यह उनके द्वारा ही प्रज्ज्वलित की गई ज्योति की लौ ही है जो आज भी बुझी नहीं है, और चौराहे पर खड़े किसान आंदोलन को मूक अभिप्रेरित कर रही है। यूं तो आजादी मिलने के साथ हीं जमींदारी प्रथा को कानून बनाकर खत्म कर दिया गया। लेकिन आज यदि स्वामीजी होते तो फिर लट्ठ उठाकर देसी हुक्मरानों के खिलाफ भी संघर्ष का ऐलान कर देते। दुर्भाग्यवश, किसान सभा भी है और उनके नाम पर अनेक संघ और संगठन भी सक्रिय हैं, लेकिन स्वामीजी जैसा निर्भीक नेता दूर-दूर तक नहीं दिखता। किसी सियासी मृगमरीचिका में भी नहीं। ....  लेख पढ़ें
जब करपात्री जी मिले अघोरेश्वर अवधूत भगवान राम से अमिय पाण्डेय ,  Nov 19, 2018
बात करीब 1957 की है, बाबा जशपुर पैलेस मे थे,उन दिनो राजा साहब के गुरू स्वामी करपात्री जी भी महल मे ही प्रवास कर रहे थे, दरअसल राजा विजयभूषण जू देव का प्रथम दर्शन बाबा से अष्टभुजी( विँध्याचल) मे हुआ था,वहाँ पर किसी ने किशोर अवधूत की महिमा के बारे मे राजपरिवार को बताया थाl, फिलहाल इस घटना के पहले बाबा २-३ बार जशपुर पैलेस राजासाहब के अनुनय विनय पर जा चुके थे ....  लेख पढ़ें
अमित मौर्य ,  Jul 31, 2018
धर्म सत्ता स्थापित करने का गैर राजनीति उपकरण जब -जब और जहां-जहां बना संस्कृत विकृति हो ही गयी ...संस्कृति छद्म और पाखण्ड से परे एक सात्विक परम्परा होती है ...वैदिक युग के बाद त्रेता में राम के नेतृत्व में धर्म और राजनीति का घाल मेल हुआ परिणाम सामने आया ...जर (आधिपत्य ), जोरू (पत्नी ) और जमीन के विवादों का वहिरुत्पाद "आध्यात्म " कहा जाने लगा ... ....  लेख पढ़ें
मानस मीमांसाः बाल्मीकि रामायण व रामचरित मानस में मूल अन्तर दिनेश्वर मिश्र ,  Sep 16, 2017
बाल्मीकिजी राम के समकालीन थे। उन्हें कहीं- कहीं दशरथ के मंत्रियों के समूह में सम्मिलित होना भी बताया गया है। अतः वे सर्वश्रेष्ठ राजा के रूप में राम को सर्व सद्गुण-संपन्नता के साथ अधिष्ठापित करते हैं। किन्तु गोस्वामीजी का मुख्य उद्देश्य राम की ईश्वरता की ओर श्रोता का ध्यान आकृष्ट करना रहा है। बाल्मीकि के राम अनुकरणीयता की दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ हैं । ....  लेख पढ़ें
मानस मीमांसाः तुलसीदास के राम ब्यक्ति नहीं ब्रह्म, पूज्य व आराध्य, ऐतिहासिक दृष्टि दिनेश्वर मिश्र ,  Sep 15, 2017
दक्षिण तो दक्षिण, उत्तर में भी राम निर्विवाद नहीं हैं । यहाँ भी उन्हें एक ओर वर्ण-ब्यवस्था के आधार पर आलोचना का विषय बनाया जा रहा है। राम शुद्र बिरोधी और ब्राह्मणवादी हैं. कोई आश्चर्य नहीं होगा कि कुछ दिनों के बाद ब्राह्मणों को क्षत्रिय राम से विरत रहने की प्रेरणा दी जाय। श्रीराम को ब्राह्मण द्वेषी सिद्ध किया जाय ,क्योंकि उन्होंने महा विद्वान रावण का बध किया था। तब राम किसके पूज्य व आराध्य रह जायेंगे?यह सब ऐतिहासिक दृष्टि की देन है। ....  लेख पढ़ें
मानस मीमांसाः श्री राम और श्री कृष्ण लीला उतनी सत्य जितना यह जगत दिनेश्वर मिश्र ,  Sep 14, 2017
महाभारत के मुख्य नायक पांडव हैं और प्रतिद्वंद्वी उनके ही बन्धु कौरव हैं। दोनों राज्य के लिए संघर्ष करते हुए, करोड़ों ब्यक्तियों को कट जाने देते हैं। रामचरितमानस में बन्धुत्व के आदर्श राम और भरत हैं, जो एक दूसरे के लिए राज्य का परित्याग करने में संतोष का अनुभव करते हैं। स्वभावतः संघर्ष -प्रिय मानव मन, कौरवों-पांडवों के चरित्र को अपना आदर्श मान लेता है। ....  लेख पढ़ें
मानस मीमांसाः निज अनुभव अब कहौं खगेसा, बिनु हरि भजन न जाहिं कलेसा दिनेश्वर मिश्र ,  Sep 12, 2017
भक्ति में भगवान के दर्शन भी हो सकते हैं--यह भक्ति की विशेषता है, जबकि ज्ञान की परानिष्ठा होने पर भी भगवान के दर्शन नहीं होते। रामायण में भी भक्ति को मणि की तरह बताया है किन्तु ज्ञान को तो दीपक की तरह बताया है। दीपक को तो जलाने में घी, बत्ती आदि की जरूरत होती है और हवा लगने से वह बुझ भी जाता है, पर मणि को न तो घी, बत्ती की जरूरत है और न ही वह हवा से बुझती ही है ....  लेख पढ़ें
मानस मीमांसाः निर्मल मन जन सो मोहि पावा, मोहिं कपट छल छिद्र न भावा दिनेश्वर मिश्र ,  Sep 11, 2017
एक तो ज्ञान का, पुरुषार्थ का मार्ग है, जिससे हम बुद्धि को निर्मल बनायें। पर तुलसीदासजी तो नन्हें बालक की तरह हैं। वे मानते हैं कि अगर बड़ा बालक हो, तो उसे अपनी गन्दगी तो धोना ही पड़ेगा, क्योंकि ब्यक्ति तो मल का ही बना है- गंदगी दूर करने के लिए पहले कपड़े को साबुन से धोएँ और बाद में स्वच्छ जल से कपड़े में लगे साबुन को धोएँ। इसी तरह से साधना और सत्कर्म से मलिनता को धोने के उपरान्त फिर साधन को भी धो डालिए। और वह भी शुद्ध जल से । ....  लेख पढ़ें
मानस मीमांसाः अस संजोग ईस जब करई, तबहुँ कदाचित सो निरुअरई दिनेश्वर मिश्र ,  Sep 09, 2017
विचार तो मथानी है। मथानी चलाइए, यह तो बिल्कुल ठीक है, लेकिन यह तो देख लीजिए कि आप मथानी चला कहाँ रहे हैं? आप पानी में मथानी चलाते रहिए,दिन रात परिश्रम करते रहिए तो भी उस पानी से मक्खन निकलेगा क्या? इसलिए अंतःकरण में यदि केवल पानी भरा हो, तो फिर विचार मंथन से क्या निकलेगा। और अगर वह पानी गंदा हो तो मंथन से उभर कर गंदगी ही तो ऊपर आयेगी। ....  लेख पढ़ें
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