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धर्म-अध्यात्म
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अघोरेश्वर अवधूत भगवान राम जी का 29वाँ निर्वाण दिवस क्रीं कुण्ड शिवाला में श्रद्धा पूर्वक मनाया गया अमिय पाण्डेय ,  Dec 01, 2020
वह मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर तथा पूजा आदि की प्रचलित अवधारणा से बिल्कुल भिन्न विचार रखते थे। उनका कहना था कि पत्थरों, ईंटो से निर्मित देवालयों में यदि विश्वास चिपका तो सर्वनाश है। 29 नवम्बर 1992 को उन्होंने अमेरिका के कैलिफोर्निया में पद्मासन में शरीर छोड़ा। भक्तों के दर्शन के लिए उनका शरीर उसी अवस्था में वाराणसी लाया गया था। इस दिन उनका परिनिर्वाण दिवस धूमधाम से मनाया जाता है। ....  समाचार पढ़ें
इस साल का आखिरी चंद्र ग्रहण लगेगा नवंबर में, जानें तारीख जनता जनार्दन संवाददाता ,  Nov 10, 2020
साल 2020 का आखिरी दूसरा महीना नवंबर चल रहा है और इस मास में इस साल का आखिरी चंद्रग्रहण लगाने जा रहा है. साल का आखिरी चंद्रग्रहण नवंबर मास की 30 तारीख़ दिन सोमवार को लगेगा. इस साल में कुल 6 {चंद्र ग्रहण -4 और सूर्य ग्रहण-2} ग्रहण लगने हैं. जिसमें से आखिरी चंद्रग्रहण 30 नवंबर को और आखिरी सूर्य ग्रहण दिसंबर में लगेगा. ....  समाचार पढ़ें
वाराणसी: भैंसासुर बाबा का श्रृंगार हुआ संपन्न अंकुर मिश्रा ,  Oct 21, 2020
वाराणसी- कई वर्षो से चलता आ रहा है ये श्रृंगार बाबा भैंसासुर का जहाँ भक्तो की काफी भीड़ होती है कई भक्त यहाँ के बाबा के भक्त है जहाँ बाबा को क्षेत्र के डीह बाबा के रूप में माना जाता है क्षेत्र की काफी महिलायें यहाँ आज के दिन भजन कीर्तन का आयोजन करती है यहॉ काफी संख्या में भक्तों की भीड़ होती है भंडारे का भी आयोजन किया जाता है व लॉक डाउन होने के कारण सांस्कृतिक कार्यक्रम को नही करवाया गया व आयोजन को रद्द किया गया ,बाबा को प्रसाद में मदिरा, गांजा, फल, फूल, माला ,गजरा, व दिया कि जली बत्ती पसंद है ....  समाचार पढ़ें
मां दुर्गा के 5 शक्तिशाली मंत्र बदल सकते हैं आपकी किस्मत जनता जनार्दन संवाददाता ,  Oct 19, 2020
नवरात्रि में मां दुर्गा के शक्तिशाली मंत्रों का जाप करना सबसे श्रेष्ठ माना गया है. ऐसी मान्यता है कि नवरात्रि के पर्व में मां दुर्गा के शक्तिशाली मंत्रों का जाप करने से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. नवरात्रि के दिनों में इन मंत्रों का जाप करने मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं. ....  समाचार पढ़ें
सूर्यदेव शनि के पिता हैं फिर भी इनके बीच कट्टर शत्रुता है जनता जनार्दन संवाददाता ,  Oct 03, 2020
भगवान सूर्य जब अपने पुत्र को देखने पत्नी छाया से मिलने गए, तब शनि ने उनके तेज के कारण अपने नेत्र बंद कर लिए. सूर्य ने अपनी दिव्य दृष्टि से देखा और पाया कि उनका पुत्र तो काला है. उन्हें भ्रम हुआ कि यह उनका पुत्र नहीं हो सकता है. इस भ्रम के चलते ही उन्होंने अपनी पत्नी छाया को त्याग दिया. इस वजह से कालांतर में शनि अपने पिता सूर्य का कट्टर दुश्मन हो गए. ....  समाचार पढ़ें
ॐ में समाया है ब्रह्मांड का रहस्य, जानें इसका महत्व जनता जनार्दन संवाददाता ,  Sep 30, 2020
हिंदू धर्म में सभी मन्त्रों का उच्चारण ऊँ से ही शुरु होता है. किसी भी मंत्र से पहले यदि ॐ जोड़ दिया जाए तो वह पूर्णतया शुद्ध और शक्ति-सम्पन्न हो जाता है। किसी देवी-देवता, ग्रह या ईश्वर के मंत्रों के पहले ॐ लगाना आवश्यक होता है, जैसे, श्रीराम का मंत्र — ॐ रामाय नमः, विष्णु का मंत्र — ॐ विष्णवे नमः, शिव का मंत्र — ॐ नमः शिवाय, प्रसिद्ध हैं। ....  समाचार पढ़ें
अघोराचार्य श्री बाबा कीनाराम जी, बाबा कीनाराम चालीसा अमिय पाण्डेय ,  Sep 27, 2020
आप सभी भक्तो के लिए हम लेकर आये है कीनाराम चालीसा जहा आपको पहली बार कीनाराम चालीसा किसी न्यूज़ में मिलेगा क्योकि भक्तो के लिए जनता जनार्दन पर  ....  समाचार पढ़ें
अघोर पीठ बाबा कीनाराम स्थल: श्री सर्वेश्वरी समूह का 60वाँ स्थापना दिवस मनाया गया अमिय पाण्डेय ,  Sep 22, 2020
वाराणसी: प्रधान कैम्प कार्यालय, रविन्द्रपुरी कालोनी स्थित अघोर शोध एवं सेवा संस्थान ,बाबा कीनाराम स्थल स्थित पर सर्वेश्वरी समूह का 60 वाँ स्थापना दिवस अघोराचार्य बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी के सानिध्य में समाजिक दूरी का पालन करते हुए मनाया गया । इसी क्रम श्री सर्वेश्वरी समूह का वरिष्ठ  संस्थापक सदस्य उपाध्यक्ष श्री श्याम नारायण पाण्डेय जी  द्वारा विधिविधान से कलश स्थापित कर एवं सर्वेश्वरी ध्वज के आरोहण के साथ किया गया। ....  समाचार पढ़ें
व्यक्ति की सफलता में सबसे बड़ी बाधा होती हैं ये तीन चीजें: चाणक्य नीति जनता जनार्दन संवाददाता ,  Sep 05, 2020
चाणक्य भारत के श्रेष्ठ विद्वानों में से एक माने जाते हैं. चाणक्य एक शिक्षक होने के साथ साथ कुशन रणनीतिकार, अर्थशास्त्री, समाज शास्त्री भी थे. इसके साथ ही वे स्वयं में एक प्रबुद्ध व्यक्ति थे. चाणक्य की चाणक्य नीति व्यक्ति को सही ढंग से जीवन जीने के लिए प्रेरित करती है. इसीलिए चाणक्य नीति आज भी प्रासंगिक है. जो व्यक्ति चाणक्य नीति का नित्य अध्ययन करता है और चाणक्य नीति की बातों को अपने जीवन में उतारता है, ऐसे व्यक्ति जीवन में ऊंचाइयां प्राप्त करते हैं. ....  समाचार पढ़ें
ऐसा अद्भुत संयोग आया है 165 साल के बाद, 1 सितंबर से शुरू होगा पितृ पक्ष जनता जनार्दन संवाददाता ,  Aug 29, 2020
हिन्दू पंचांग के मुताबिक इस साल का पितृ पक्ष 01 सितम्बर से शुरू होकर 17 सितम्बर 2020 तक चलेगा. यानी कि इस साल पितृ पक्ष की कुल अवधि 17 दिनों की होगी. हिन्दू पंचांग के मुताबिक यह पितृ पक्ष भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि से शुरू होकर आश्विन मास की अमावस्या तक चलता है जिसमें पितृ तर्पण किया जाता है. हिन्दू धर्म के मुताबिक जो भी व्यक्ति पितृ पक्ष के इन दिनों में अपने पूर्वजों का तर्पण करता है. उस व्यक्ति को उसके पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. जिसके फलस्वरूप व्यक्ति के जीवन की सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं. ....  समाचार पढ़ें
अपने घर पर ही रहकर मनायें गुरू पूर्णिमा का पर्व: सिद्धार्थ गौतम राम जी जनता जनार्दन संवाददाता ,  Jun 14, 2020
अपने घर पर ही रहकर मनायें गुरू पूर्णिमा का पर्व: सिद्धार्थ गौतम राम जी वाराणसी: देश भले ही अनलॉक हो गया है। लेकिन इस वैश्विक महामारी कोरोना वायरस का खतरा बना हुआ है । ऐसी स्थिति मे अपने भक्तों को संक्रमण से दूर रखने के लिए विश्व विख्यात अघोरपीठ औघोराचार्य बाबा कीनाराम अघोर शोध एवं सेवा संस्थान क्रीकुण्ड शिवाला के पीठाधीश्वर अघोराचार्य बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी ने कहा कि आप सभी से विनम्र निवेदन है कि कोरोना वैश्विक महामारी कोविड19 के प्रकोप के कारण सम्पूर्ण मानव जाति के अस्तित्व पर संकट उत्पन्न हो गया है। ....  लेख पढ़ें
स्वामी सहजानन्द सरस्वती: जिनके जीवन गाथा में निहित है जगत सन्देश गोपाल जी राय ,  Feb 21, 2019
ह ठीक है कि उनके जीते जी जमींदारी प्रथा का अंत नहीं हो सका। लेकिन यह उनके द्वारा ही प्रज्ज्वलित की गई ज्योति की लौ ही है जो आज भी बुझी नहीं है, और चौराहे पर खड़े किसान आंदोलन को मूक अभिप्रेरित कर रही है। यूं तो आजादी मिलने के साथ हीं जमींदारी प्रथा को कानून बनाकर खत्म कर दिया गया। लेकिन आज यदि स्वामीजी होते तो फिर लट्ठ उठाकर देसी हुक्मरानों के खिलाफ भी संघर्ष का ऐलान कर देते। दुर्भाग्यवश, किसान सभा भी है और उनके नाम पर अनेक संघ और संगठन भी सक्रिय हैं, लेकिन स्वामीजी जैसा निर्भीक नेता दूर-दूर तक नहीं दिखता। किसी सियासी मृगमरीचिका में भी नहीं। ....  लेख पढ़ें
जब करपात्री जी मिले अघोरेश्वर अवधूत भगवान राम से अमिय पाण्डेय ,  Nov 19, 2018
बात करीब 1957 की है, बाबा जशपुर पैलेस मे थे,उन दिनो राजा साहब के गुरू स्वामी करपात्री जी भी महल मे ही प्रवास कर रहे थे, दरअसल राजा विजयभूषण जू देव का प्रथम दर्शन बाबा से अष्टभुजी( विँध्याचल) मे हुआ था,वहाँ पर किसी ने किशोर अवधूत की महिमा के बारे मे राजपरिवार को बताया थाl, फिलहाल इस घटना के पहले बाबा २-३ बार जशपुर पैलेस राजासाहब के अनुनय विनय पर जा चुके थे ....  लेख पढ़ें
अमित मौर्य ,  Jul 31, 2018
धर्म सत्ता स्थापित करने का गैर राजनीति उपकरण जब -जब और जहां-जहां बना संस्कृत विकृति हो ही गयी ...संस्कृति छद्म और पाखण्ड से परे एक सात्विक परम्परा होती है ...वैदिक युग के बाद त्रेता में राम के नेतृत्व में धर्म और राजनीति का घाल मेल हुआ परिणाम सामने आया ...जर (आधिपत्य ), जोरू (पत्नी ) और जमीन के विवादों का वहिरुत्पाद "आध्यात्म " कहा जाने लगा ... ....  लेख पढ़ें
मानस मीमांसाः बाल्मीकि रामायण व रामचरित मानस में मूल अन्तर दिनेश्वर मिश्र ,  Sep 16, 2017
बाल्मीकिजी राम के समकालीन थे। उन्हें कहीं- कहीं दशरथ के मंत्रियों के समूह में सम्मिलित होना भी बताया गया है। अतः वे सर्वश्रेष्ठ राजा के रूप में राम को सर्व सद्गुण-संपन्नता के साथ अधिष्ठापित करते हैं। किन्तु गोस्वामीजी का मुख्य उद्देश्य राम की ईश्वरता की ओर श्रोता का ध्यान आकृष्ट करना रहा है। बाल्मीकि के राम अनुकरणीयता की दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ हैं । ....  लेख पढ़ें
मानस मीमांसाः तुलसीदास के राम ब्यक्ति नहीं ब्रह्म, पूज्य व आराध्य, ऐतिहासिक दृष्टि दिनेश्वर मिश्र ,  Sep 15, 2017
दक्षिण तो दक्षिण, उत्तर में भी राम निर्विवाद नहीं हैं । यहाँ भी उन्हें एक ओर वर्ण-ब्यवस्था के आधार पर आलोचना का विषय बनाया जा रहा है। राम शुद्र बिरोधी और ब्राह्मणवादी हैं. कोई आश्चर्य नहीं होगा कि कुछ दिनों के बाद ब्राह्मणों को क्षत्रिय राम से विरत रहने की प्रेरणा दी जाय। श्रीराम को ब्राह्मण द्वेषी सिद्ध किया जाय ,क्योंकि उन्होंने महा विद्वान रावण का बध किया था। तब राम किसके पूज्य व आराध्य रह जायेंगे?यह सब ऐतिहासिक दृष्टि की देन है। ....  लेख पढ़ें
मानस मीमांसाः श्री राम और श्री कृष्ण लीला उतनी सत्य जितना यह जगत दिनेश्वर मिश्र ,  Sep 14, 2017
महाभारत के मुख्य नायक पांडव हैं और प्रतिद्वंद्वी उनके ही बन्धु कौरव हैं। दोनों राज्य के लिए संघर्ष करते हुए, करोड़ों ब्यक्तियों को कट जाने देते हैं। रामचरितमानस में बन्धुत्व के आदर्श राम और भरत हैं, जो एक दूसरे के लिए राज्य का परित्याग करने में संतोष का अनुभव करते हैं। स्वभावतः संघर्ष -प्रिय मानव मन, कौरवों-पांडवों के चरित्र को अपना आदर्श मान लेता है। ....  लेख पढ़ें
मानस मीमांसाः निज अनुभव अब कहौं खगेसा, बिनु हरि भजन न जाहिं कलेसा दिनेश्वर मिश्र ,  Sep 12, 2017
भक्ति में भगवान के दर्शन भी हो सकते हैं--यह भक्ति की विशेषता है, जबकि ज्ञान की परानिष्ठा होने पर भी भगवान के दर्शन नहीं होते। रामायण में भी भक्ति को मणि की तरह बताया है किन्तु ज्ञान को तो दीपक की तरह बताया है। दीपक को तो जलाने में घी, बत्ती आदि की जरूरत होती है और हवा लगने से वह बुझ भी जाता है, पर मणि को न तो घी, बत्ती की जरूरत है और न ही वह हवा से बुझती ही है ....  लेख पढ़ें
मानस मीमांसाः निर्मल मन जन सो मोहि पावा, मोहिं कपट छल छिद्र न भावा दिनेश्वर मिश्र ,  Sep 11, 2017
एक तो ज्ञान का, पुरुषार्थ का मार्ग है, जिससे हम बुद्धि को निर्मल बनायें। पर तुलसीदासजी तो नन्हें बालक की तरह हैं। वे मानते हैं कि अगर बड़ा बालक हो, तो उसे अपनी गन्दगी तो धोना ही पड़ेगा, क्योंकि ब्यक्ति तो मल का ही बना है- गंदगी दूर करने के लिए पहले कपड़े को साबुन से धोएँ और बाद में स्वच्छ जल से कपड़े में लगे साबुन को धोएँ। इसी तरह से साधना और सत्कर्म से मलिनता को धोने के उपरान्त फिर साधन को भी धो डालिए। और वह भी शुद्ध जल से । ....  लेख पढ़ें
मानस मीमांसाः अस संजोग ईस जब करई, तबहुँ कदाचित सो निरुअरई दिनेश्वर मिश्र ,  Sep 09, 2017
विचार तो मथानी है। मथानी चलाइए, यह तो बिल्कुल ठीक है, लेकिन यह तो देख लीजिए कि आप मथानी चला कहाँ रहे हैं? आप पानी में मथानी चलाते रहिए,दिन रात परिश्रम करते रहिए तो भी उस पानी से मक्खन निकलेगा क्या? इसलिए अंतःकरण में यदि केवल पानी भरा हो, तो फिर विचार मंथन से क्या निकलेगा। और अगर वह पानी गंदा हो तो मंथन से उभर कर गंदगी ही तो ऊपर आयेगी। ....  लेख पढ़ें
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