May 18, 2014: नई दिल्ली: आज से ग्यारह वर्ष पूर्व 3 मार्च के 2003 के न्यूज वीक में प्रकाशित कवर पेज पर मादी को प्रोफाइल और प्रोफाइल उस  के नीचे लिखा ‘कैप्शन’ अभी तक याद है, जिसमें लिखा था &...

by राधेश्याम तिवारी
Apr 14, 2014: नई दिल्ली: हत्वो वा प्राप्स्यसि  स्वर्ग  जित्वावा  भेक्ष्यसे महीम्तस्मादुत्तिष्ठ कौन्तेय युद्धाय कृतनिष्चयःया तो तू मारा जा कर स्वर्ग को भोगेगा या संग्र...

by राधेश्याम तिवारी
Feb 19, 2013: भारत की प्रमुख जांच एजेंसी सीबीआई की छवि को लेकर जितनी निपुणता के साथ ‘स्पेशल 26 फिल्म’ को परदे पर लाया गया है,  वह एक उल्लेखनीय पक्ष है। संभव है कि  इसकी बोल्डनेस को प्रच...

by राधेश्याम तिवारी
Feb 08, 2012: कपिल सिब्बल जैसे अपराध शास्त्र के विशेषज्ञों से राजनीतिक समझ की उम्मीद करना फिजूल है जिसका प्रायश्चित कांग्रेस को करना पड़ रहा है। यदि कांग्रेस ने प्रारंभ से ही पुत्र मोह में न फंस कर राज...

by राधेश्याम तिवारी
Jan 23, 2012: क्या साहित्य इस प्रकार की वस्तु है जिसका उत्सव मनाया जा सकता है? इस पर बात तो गंभीरता से की जा सकती है लेकिन जिस प्रकार से उत्सव मनाया  जा रहा है वह कतई गंभीरता के लायक नहीं है। ...

by राधेश्याम तिवारी
Jan 17, 2012: भारतीय प्रवासी सम्मेलन अटल बिहारी बाजपेयी की अनर्गल कविता है जिसका अर्थ एक  दषक वाद भी किसी की समझ में नहीं आया । असल में भारतीय संस्कारो की सबसे बड़ी फजीहत यह है कि वे अतीत के मोह बंधन स...

by राधेश्याम तिवारी
Aug 23, 2011: आदरणीय अन्ना साहब, आपको और आपके द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए गए मुहिम को मेरा नमस्कार ।लगभग तीन दशकों की देश की मुरदा राजनीति में जो गतिशीलता पैदा की है निश...

by राधेश्याम तिवारी
Jul 06, 2011: प्रधानमंत्री ने केवल चुने हुए पांच पत्रकारों से बातकर के अपना पक्ष रखने की जो कोशिश की है, उसका संकेत अच्छा नहीं है। यह पूरी तरह से प्रधानमंत्री कार्यालय के मीडिया प्रबंधन की असफल...

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May 21, 2011: अपराध और सेक्स में एक गहरा संबंध है जिसे हालीवुड या बालीवुड की लगभग सभी फिल्मे जो अपराधिक विषय पर बनाई जाती है उनमें देखाया जाता है। अपराध मानसिकता वाले लोगों को असल में शांति स्त्रियों के गो...

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May 07, 2011: भारत में बीजेपी के सिन्हा कहें या सेना के सिंह कहें, कहने मात्र से सब कुछ नहीं हो जाता। यहां तो राष्ट्रीय चरित्र यह है कि पाकिस्तान में ओसामा को मार कर अमेरिकी सैनिक चले गए और भारत इसी बात पर...

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राधेश्याम तिवारी
राधेश्याम तिवारी लेखक राधेश्याम तिवारी हिन्दी व अग्रेज़ी के वरिष्ठतम स्तंभकार, पत्रकार व संपादकों में से एक हैं। देश की लगभग सभी पत्र-पत्रिकाओं में आपके लेख निरंतर प्रकाशित होते रहते हैं। फेस एन फैक्ट्स के आप स्थाई स्तंभकार हैं। ये लेख उन्होंने अपने जीवनकाल में हमारे लिए लिखे थे. दुर्भाग्य से वह साल २०१७ में असमय हमारे बीच से चल बसे

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