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जीएसटी के असर को बेअसर करने में जुटे चालबाज व्यापारी

जय प्रकाश पाण्डेय , Jul 04, 2017, 5:27 am IST
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जीएसटी के असर को बेअसर करने में जुटे चालबाज व्यापारी 'एक राष्ट्र, एक बाजार और एक कर' के लुभावने नारे के बीच देश की अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदलने का दावा करने वाला गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स यानी कि जीएसटी एक जुलाई को आधी रात से ही लागू हो गया है, पर उसका असर कहीं दिख नहीं रहा. व्यापारियों ने चोर रास्ते निकाल लिए हैं, और फिलहाल रजिस्ट्रेशन न होने का हवाला देकर, या कच्चा बिल काट कर काम चलाने लगे हैं, जिससे सरकार को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है. दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस महत्त्वाकांक्षी योजना को लागू करने के लिए अफसरशाही को जो मुस्तैदी दिखानी चाहिए थी, वह नहीं दिखी. नतीजतन सरकार से लेकर, व्यापारी और आमजनों में उहापोह की स्थिति है.

सरकार के तमाम प्रयासों व प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री और वित्त सचिव की तमाम अपीलों के बावजूद देश के कई बड़े शहरों, जिनमें दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद शामिल है में व्यापारियों की हड़ताल यह बताती है कि केंद्र सरकार भले ही सत्ता की हनक से गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स 1 जुलाई से लागू कर दिया है और नई कर प्रणाली को कुछ और दिनों के लिए टालने की इंडस्ट्री के ही एक वर्ग की मांग ठुकरा दी है, पर इससे उसने कोई बड़ा तीर नहीं मार लिया है. जानकारी, जागरुकता और व्यवस्थागत दिक्कर से जुड़ी खामियों पर अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो नोटबंदी की तरह का सही फैसला होने के बावजूद, देश की अर्थव्यवस्था का ‘टर्निंग प्वायंट' करार दी जाने वाली यह प्रणाली, आमजनों के लिए काफी भारी पड़ सकती है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली की अगुआई में सरकार का दावा था कि जीएसटी के चलते आम लोगों को काफी फायदा होगा. इससे देशवासियों के बाजार की दुनिया हमेशा के लिए बदल जाएगी. यह एक ऐसा टैक्स है, जो टैक्स के भारी जाल से आमजन और व्यापारियों को मुक्ति दिलाएगा. जीएसटी आने के बाद बहुत सी चीजें सस्ती हो जाएगी, जबकि कुछ चीजें महंगी भी हो जाएंगी, लेकिन सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि टैक्स का पूरा सिस्टम आसान हो जाएगा. व्यापारियों को 18 से ज्यादा टैक्सों से छुटकारा मिल जाएगा और पूरे देश में सिर्फ एक टैक्स जीएसटी जमा करना होगा. पर करोड़ तक का ट्रन ओवर करने वाले मध्यम शहरों के व्यापारियों ने भी चार-पांच इंट्रप्राइजेज खोल कर, अपने अकाउंटेंटों की मार्फत सरकार को धता बताने का जुगाड़ कर लिया है.

कई राज्य सरकारों और व्यापारी संगठनों ने दिक्कतों का हवाला देकर इसे लागू करने की तारीख आगे खिसकाने की मांग की थी, जिनमें पश्चिम बंगाल सबसे आगे था. पश्चिम बंगाल समेत कम से कम छह राज्यों ने जीएसटी कानून पारित नहीं किया था. जीएसटी के मौजूदा स्वरूप को लागू करना असंभव बताते हुए, बंगाल सरकार ने इसकी तारीख कम से कम एक महीने बढ़ाने का अनुरोध किया था. कई व्यापारिक संगठनों ने भी इसके विभिन्न प्रावधानों और तकनीकी दिक्कतों पर आपत्ति जताई थी.

व्यापारियों का दावा था कि जीएसटी लागू करने की तारीख सिर पर है, पर तकनीकी दिक्कतें कम होने का नाम नहीं ले रहीं. जीएसटी पंजीकरण के समय प्रक्रियागत समस्याओं का सामना करना आम बात है. कोई महीने भर से ऑनलाइन पंजीकरण के लिए जीएसटी नेटवर्क सुचारू रूप से काम नहीं कर रहा था. इसकी वजह से ई-वे बिल बनाने में दिक्कत हो रही थी. ऑनलाइन बनने वाले इस डिलीवरी नोट के बिना एक जुलाई के बाद सामानों का परिवहन संभव नहीं होता. सरकार ने इसीलिए यहां छूट दे दी.

तकनीकी दिक्कतों की वजह से पहली मई को जीएसटी नेटवर्क वेबसाइट को बंद करना पड़ा था. पहली जून को दोबारा इसके खुलने के बावजूद हालत में ज्यादा सुधार नहीं आया. कर्नाटक चैंबर्स आफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की टैक्सेशन कमिटी के अध्यक्ष बी.टी.मनोहर का कहना था कि, 'जब कोई व्यापारी ऑनलाइन पंजीकरण के लिए अपना ब्योरा भरता है तो आखिरी पेज पर यह पोर्टल एरर दिखाने लगता है. इसकी वजह से एप्लीकेशन रजिस्ट्रेशन नंबर (एआरएन) नहीं मिल पाता, और एआरएन के बिना व्यापारी जीएसटी पहचान हासिल नहीं कर सकते.

इतना ही नहीं, एप्लीकेशन रजिस्ट्रेशन नंबर यानी एआरएन के बिना टैक्स इनवॉयस और बिक्री का बिल भी नहीं बन सकता. ऐसे में अगर सरकार पहली जुलाई से जीएसटी लागू करने के प्रति गंभीर थी, तो उसे सुनिश्चित करना चाहिए था कि 30 जून या उससे पहले देश के तमाम व्यापारियों को जीएसटी पहचान मिल जाए, ताकि टैक्स बाबू व्यापारियों को परेशान न करने पाएं.

व्यापारियों के सुर में सुर मिलाते हुए बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य के वित्त मंत्री अमित मित्र ने तो अध्यादेश जारी कर अपने राज्य में इसे टालने का फैसला भी कर लिया. ममता की दलील थी, 'हमने जिन 66 वस्तुओं पर कर की दरें घटाने की मांग की थी, उसे केंद्र ने मान लिया है. अब केंद्र अपनी खामी दूर करे और तब तक इसे टाल दे.' व्यापारियों की मुश्किलों को देखते हुए बंगाल सरकार ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की बजाय अध्यादेश का रास्ता चुना. बंगाल के अलावा जम्मू-कश्मीर, मेघालय और कर्नाटक में भी अब तक इससे संबंधित विधेयक को हरी झंडी नहीं मिली है.

बावजूद इसके केंद्र ने इसे लागू किया. बड़े घरानों के मीडिया समूह बड़ी रकम ले इसके प्रचार-प्रसार में जुटे हैं.. राजस्व सचिव हसमुख अधिया का कहना है , 'जीएसटी लागू करने में देरी की अफवाहें पूरी तरह गलत हैं. कृपया, इन अफवाहों से भ्रमित न हों.' वित् मंत्तरालय ने भी यह दावा किया है कि 1 जुलाई से इस ऐतिहासिक व्यवस्था को लागू करने के लिए तैयारी 'जोरों' पर हैं. पर वह भी यह स्पष्ट नहीं कर रहा कि तैयारी पूरी हो चुकी है.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पहली जुलाई से जीएसटी लागू करने के बाद दावा किया कि अब टैक्स चोरों की खैर नहीं. जेटली ने कहा कि कुछ लोग परेशान हैं, क्योंकि अब तक वे अपनी बिक्री के आंकड़े छिपाते आए थे, लेकिन जीएसटी आने के बाद अब यह संभव नहीं हो पाएगा. और जो बेइमानी करने की कोशिश करेगा, अब उसे आसानी से पकड़ा जा सकेगा. उनके मुताबिक, कर चुकाना देशभक्ति है और जो ऐसा नहीं करता है, वो देश से गद्दारी करता है. इसलिए ऐसा करना जरूरी था, भारत को एक विकसित देश बनाने के लिए सरकार को संसाधनों की जरूरत होती है और इसलिए ठोस कदम उठाया गया है.

वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता वाली जीएसटी काउंसिल ने जीएसटी लागू करने से 1,200 सामानों और 500 सेवाओं पर टैक्स की दरें तय कर चुकी है. काउंसिल ने सभी सेवाओं और वस्तुओं को 5, 12, 18 और 28 पर्सेंट के टैक्स स्लैब में रखा है. जीएसटी लागू होने से पहले और बाद में  उपभोक्ता बाजार में भारी हलचल है. तमाम उपभोक्ता कंपनियों ने पहली जुलाई से जीएसटी के चलते कीमतें बढ़ने की दलील देकर आम लोगों को पहले भी खरीदारी के लिए लुभाया, और अब पुराने माल को बिना बिल पर खरीददारी के लिए बढ़ावा दे रहे हैं. हालांकि सरकार भी लोगों को जागरूक करने में लगी है, पर जीएसटी से वाकई क्या कुछ बदला, इसका अंदाज लगने में अभी वक्त लगेगा.
जय प्रकाश पाण्डेय
जय प्रकाश पाण्डेय 14 साल की उम्र से अख़बारों में लेखन शुरू कर देने वाले जय प्रकाश पाण्डेय ने राजनीति विज्ञान से स्नातकोत्तर और पत्रकारिता सहित 8 विषयों से स्नातक की डिग्री हासिल की और पत्रकारिता के अपने जुनून के चलते डॉक्टरेट अधूरा छोड़ दिया। दिल्ली में एक समाचार एजेन्सी के कार्यकारी संपादक, और एक बड़े पत्रिका समूह के प्रकाशकीय संपादक बने। हर विषय पर लिखा और चर्चित हुए। फिलहाल, आन लाइन मीडिया के चर्चित पोर्टल समूह 'फेस एन फैक्ट्स' के प्रबंध संपादक और ड्रीम प्रेस कंसलटेंट्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं।

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