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अगस्ता वेस्टलैंड, कांग्रेस और राजनीति

अगस्ता वेस्टलैंड, कांग्रेस और राजनीति भारतीय जनता पार्टी आक्रामक है, न केवल राष्ट्रवाद के मसले पर बल्कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी. अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलिकॉप्टर की डील पर इटली की कोर्ट से आए फैसले ने उसे ऐसा हथियार मुहैया करा दिया है, जिससे कांग्रेस पहली बार न केवल बचाव की मुद्रा में है, बल्कि भाजपा ने वह स्थितियां पैदा कर दी हैं की कांग्रेस पार्टी की पूरी ताकत 'प्रथम परिवार' को बचाने में ही खर्च हो जाए.

इटली के मिलान कोर्ट ने यूपीए टू के शासन में 3600 करोड़ रुपए के अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलिकॉप्टर डील पर चल रहे मुकदमें में फैसला देते हुए, तब के भारतीय सत्ता प्रतिष्ठानों और लोगों द्वारा घुस लेने का जिक्र किया है. बीजेपी लीडर और राज्यसभा के नॉमिनेटेड मेंबर सुब्रमण्यम स्वामी, जिन्होंने इस मसले पर संसद में डिबेट छेड़ा है के मुताबिक, मिलान कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि इस हेलिकॉप्टर डील में बड़े लेवल पर करप्शन हुआ था. कोर्ट ने अपने फैसले में तब यूपीए की चेयरपर्सन रही सिग्नोरा (सोनिया) गांधी का नाम चार बार और तब के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का नाम दो बार लिया है.

दरअसल यूपीए सरकार ने अपने पहले शासनकाल में अगस्ता वेस्टलैंड कंपनी से वीवीआईपी के लिए 12 हेलिकॉप्टरों के खरीद की डील की थी, यह डील 3,600 करोड़ रुपए की थी. पर  इस डील में 10% हिस्सा रिश्वत में दिए जाने की बात सामने आने के बाद यूपीए सरकार ने फरवरी 2010 में डील रद्द कर दी थी. पर तब तक 3 हेलिकॉप्टर आ चुके थे, जो आज भी दिल्ली के पालम एयरबेस पर खड़े हैं, और इनका इस्तेमाल आजतक नहीं हुआ. तब एयरफोर्स चीफ रहे एसपी त्यागी सहित 13 लोगों पर केस दर्ज किया गया था.

इटली में दायर हुए करप्शन केस में अब मिलान कोर्ट ऑफ अपील्स ने भी फैसला देते हुए यह माना है कि इस हेलिकॉप्टर डील में करप्शन हुआ और इसमें इंडियन एयरफोर्स के पूर्व चीफ एसपी. त्यागी भी शामिल थे. कोर्ट दस्तावेजों के मुताबिक भारतीय अफसरों और नेताओं को 90 करोड़ से लेकर 225 करोड़ रुपए की रिश्वत दी गई. कोर्ट ने वीवीआईपी हेलिकॉप्टर बनाने वाली कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड के चीफ जी. ओरसी को इस मसले पर दोषी ठहराते हुए, उन्हें साढ़े चार साल जेल की सजा सुनाई है.

इटली में छप रही मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोर्ट दस्तावेजों में यह बताया गया है कि अगस्ता वेस्टलैंड ने कैसे कांग्रेस प्रेसिडेंट सोनिया गांधी और उनके करीबी सहयोगियों, जिनमें पीएम मनमोहन सिंह और नेशनल सिक्युरिटी एडवाइजर एमके नारायणन शामिल हैं के साथ लॉबिंग की और किस तरह से रिश्वत में दी गई 225 करोड़ रुपए की रकम में से 52% हिस्सा नेताओं को, 28% ब्यूरोक्रैट्स को और 20% रकम एयरफोर्स के अफसरों को बतौर रिश्वत दिया गया.

मिलान कोर्ट की रूलिंग में डील का जो ब्योरा है, उसके मुताबिक मार्च 2008 में एक बिचौलिए क्रिस्टियन मिकेल ने अगस्ता वेस्टलैंड के इंडिया हेड पीटर ह्युलेट को एक पत्र लिखा था, जिसमें कहा गया था कि 'सिग्नोरा (सोनिया) गांधी वीआईपी हेलिकॉप्टर्स के पीछे ड्राइविंग फोर्स हैं. इसी तरह - 2013 में अगस्ता वेस्टलैंड के सीईओ ग्युसेपी ओरसी ने जेल से एक लेटर लिखा कि इटली के पीएम या एक सीनियर डिप्लोमैट को पीएम मनमोहन सिंह से बात करनी चाहिए. मिडिलमैन के लेटर्स में 'एपी' नामक व्यक्ति का जिक्र है, इशारा सोनिया गांधी के पॉलिटिकल सेक्रेटरी अहमद पटेल से है. वरिष्ठ कांग्रेस नेता ऑस्कर फर्नांडीज का भी जिक्र है. फैम वर्ड का इस्तेमाल एयरफोर्स चीफ रहे एसपी त्यागी के फैमिली मेंबर के लिए किया गया था.

जब इटली कोर्ट के फैसले से यह साफ हो चुका है कि अगस्टा वेस्टलैंड मामले में भारतीय नेताओं, अधिकारियों ने रिश्वत ली थी, तब भारतीय जांच एजेंसी सीबीआई की जिम्मेदारी और बढ़ गई है. इस फैसले पर होहल्ला मचने के साथ ही सीबीआई ने अपने स्तर से दोषियों पर नकेल कसना शुरू कर दिया है. उसने इस सौदेबाजी के बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल की गिरफ्तारी के लिए इंटरपोल से मदद मांगने की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर रखी है. एजेंसी ने इंटरपोल से मिशेल को गिरफ्तार करने को कहा है. वह फिलहाल ब्रिटेन में रहता है. उसके खिलाफ 4 जनवरी को रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था.

हालांकि मिलान कोर्ट के दस्तावेजों में सोनिया-मनमाेहन का जिक्र तो किया गया है, उनसे सम्पर्क साधने की कोशिशों और उनसे लॉबिंग की बात तो कही गई है, लेकिन उन्होंने साफ तौर पर गलत क्या किया है, इसका जिक्र नहीं हुआ है. पर सत्ता पक्ष के लिए यह एक मसला तो है ही. संसद में बीजेपी अपनी बातों को मनवाने के लिए अब इसी मसले को हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है. राज्यसभा में को कांग्रेस को घेरने का जिम्मा बीजेपी लीडर सुब्रमण्यम स्वामी उठा रहे हैं, तो लोकसभा में मीनाक्षी लेखी के जिम्मे यह काम है.

संसद के बाहर वित्त मंत्री अरुण जेटली, दूसरे केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद डिबेट को बढ़ाएंगे. प्रसाद ने तो कहना भी शुरू कर दिया है कि जब रिश्वत देने वाले कन्विक्ट हो चुके हैं, तो रिश्वत लेने वाले खामोश क्यों हैं? वह भी तब जब 2013 में तब के रक्षामंत्री एके एंटनी ने ही कहा था कि डील में करप्शन हुआ और पैसे का लेन-देन भी किया गया. अब उन्हें बताना चाहिए कि इसमें कांग्रेस के नेता शामिल थे या नहीं? इटली के साथ-साथ भारतीय मीडिया में भी इस मसले के उछलने के बाद रक्षा मंत्रालय ने रोम में भारतीय दूतावास से कोर्ट के फैसले को लेकर रिपोर्ट तलब की है.

साफ है कि वीवीआईपी हेलीकॉप्टर डील में हुए घोटाले का मामला अब कांग्रेस के लिए दूसरा 'बोफोर्स घोटाला' बनता जा रहा है. 80 के दशक में हुए बोफोर्स घोटाले ने तब भी कांग्रेस को बड़ा झटका दिया था और साल 1989 में हुए आम चुनावों में कांग्रेस को काफी नुकसान भी हुआ था. ये दोनों ही घोटाले विदेशों से जुड़े हैं. बोफोर्स घोटाला स्वीडन में हुआ, तो अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला इटली में हुआ. बोफोर्स घोटाले ने तब भारतीय राजनीति और सैन्य सिस्टम को हिला कर रख दिया था. तब भी गांधी-नेहरू परिवार पर उंगलियां उठी थीं.

दरअसल कांग्रेस ने अपनी यह दुर्गति खुद कराई है. कार्यकर्ता तो दूर पार्टी ने चाटुकारों की एक ऐसी फौज विकसित कर ली, जो गांधी परिवार के ग्लैमर की कमाई तो खाना चाहते हैं, पर जनता के बीच उनकी जड़ें नहीं जमने देना चाहते. आलम यह है कि पार्टी के शुभेच्छुओं की जगह पैसे वाले एजेंटों ने ले ली है. जिन्हें यही नहीं पता कि इमेज सुधारनी किसकी है. जो रण्नीति बनाते समय यह भूल जा रहे कि यह भारत है, अमेरिका नहीं, और वहां भी कट्टरपंथी डोनाल्ड ट्रंप सब पर भारी हैं. समय बदल रहा है, पर किस ओर, देखना, भुगतना दिलचस्प होगा.
जय प्रकाश पाण्डेय
जय प्रकाश पाण्डेय 14 साल की उम्र से अख़बारों में लेखन शुरू कर देने वाले जय प्रकाश पाण्डेय ने राजनीति विज्ञान से स्नातकोत्तर और पत्रकारिता सहित 8 विषयों से स्नातक की डिग्री हासिल की और पत्रकारिता के अपने जुनून के चलते डॉक्टरेट अधूरा छोड़ दिया। दिल्ली में एक समाचार एजेन्सी के कार्यकारी संपादक, और एक बड़े पत्रिका समूह के प्रकाशकीय संपादक बने। हर विषय पर लिखा और चर्चित हुए। फिलहाल, आन लाइन मीडिया के चर्चित पोर्टल समूह 'फेस एन फैक्ट्स' के प्रबंध संपादक और ड्रीम प्रेस कंसलटेंट्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं।

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