शानदार ऑड-ईवनः बधाई मुख्यमंत्री जी!

शानदार ऑड-ईवनः बधाई मुख्यमंत्री जी! देश में अपने आपको सर्वोपरि समझने वाले हमारे माननीय जनप्रतिनिधियों को कायदे से देश में लागू कानूनों का पालन करना चाहिए, पर होता इसका उल्टा है. या तो मीडिया में सुर्खियां बटोरने के लिए या फिर अपने अहंकार की तुष्टि के लिए ज्यादातर इसे तोड़ने में अपनी शान समझते हैं. देश की राजधानी दिल्ली इनदिनों ऑड-ईवन पार्ट-2 से दो-चार है. पर संसद सद्स्यों ने दिल्ली सरकार द्वारा मुहैया कराई गई वाताकूल बसों में यात्रा न कर इस नियम को तोड़ते हुए यात्रा की. 

ऑड-ईवन मतलब, सम-विषम. अभी दिल्ली की सड़कों पर एक दिन ऑड और उसके अगले दिन ईवन नंबर की गाड़ियां चल रही हैं. ऑड-ईवन का मतलब है गाड़ी की नंबरप्लेट का आख़िरी नंबर सम है या विषम. मसलन 15 अप्रैल को ऑड नंबर वाली गाड़ियां और 16 अप्रैल को ईवन नंबर के वाहन. यही क्रम तीस अप्रैल तक. एक दिन ऑड, एक दिन ईवन. पर नाम के ही अनुरूप इसके अपने लाभ और नुकसान हैं, मतलब इसका उजला पक्ष भी है और काला पक्ष भी.

यह अलग बात है कि दिल्ली में अरविन्द केजरीवाल की अगुआई वाली आम आदमी पार्टी की सरकार द्वारा 'ऑड-ईवन' योजना राजधानी की सड़कों पर गाड़ियों की गिनती कम कर पल्युशन रोकने की एक ऐसी कोशिश है, जिसके परिणाम के बारे में पहले पता नहीं था. वैसे तो यह फ़ॉर्मूला दिल्ली में और दिल्ली के बाहर पंजीकृत सभी गाड़ियों पर ऑड-ईवन नंबर प्लेट के हिसाब से लागू हुआ है. तमाम बड़े लोगों, संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों, जरूरी सेवाओं, सीएनजी से चलने वाली, इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड कारों को इसमें छूट होगी. दोपहिया वाहनों को भी इसमें शामिल नहीं किया गया है.

चीन वह पहला देश था, जिसने साल 2008 में बीजिंग ओलंपिक से पहले नंबर नियम लागू किया था, लेकिन तब उसे कामयाबी नहीं मिली थी. बीजिंग के बाद दिल्ली इस नियम को लागू करने वाला दुनिया का दूसरा शहर था. दिल्‍ली में पहली बार जनवरी में जब ऑड-ईवन मुहिम शुरु की गई, तो इसकी कामयाबी को लेकर न सिर्फ शंकाएं थीं, बल्कि शुरु में तो काफी लोगों ने इसकी खूब आलोचना भी की थी.

लगा था कि यह योजना असफल होगी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की छवि को धक्का लगेगा. पर हुआ इसका ठीक उलटा. 'ऑड-ईवन' मुहिम शुरु होने के बाद इसके जो नतीजे आए उसे देखकर लोग चौंक गए, और दिल्ली वालों ने इसे कुनैन की गोली मानकर निगलना शुरू कर दिया, जिसके नतीजे शुरुआत में भले ही कड़वे हों, पर उनका आखिर, शहर और शहर के लोगों की सेहत के लिए अच्छा है.

दिल्ली में 'ऑड-ईवन' मुहिम की कामयाबी को अब चीन ने भी अनुकरणीय बताया है. बीजिंग के म्यूनिसपल कमीशन के परिवहन उपायुक्त झू तियान ने सम विषम नंबर नियम को प्रदूषण से निपटने में सहायक बताते हुए इससे सबक लेकर बीजिंग में फिर से इसे चलाने की बात कही है. उनका कहना है कि 'ऑड-ईवन' नियम दिल्ली के प्रदूषण को दूर करने और यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने में मददगार साबित हो रहा है. पर इसका स्थाई प्रभाव तब आएगा, जब इसे लंबे समय तक माकूल तरीके से लागू किया जाए.
 
झू के मुताबिक दिल्ली ने इसे स्थाई बनाने की इच्छाशक्ति दिखाकर चीन को प्रभावित किया है. प्रदूषण से निपटने के लिहाज से 'ऑड-ईवन' नियम बेहद कामयाब सूत्र है, लेकिन बीजिंग में बेहद सघन आबादी के कारण इस नियम के दौरान पैदा होने वाली यातायात समस्या को देखते हुए इसे सिर्फ ओलंपिक जैसे बड़े आयोजनों के समय ही लागू किया जा सकता है. दिल्ली में 25 लाख कारों की तुलना में बीजिंग में 55 लाख कारें हैं. इसी तरह बीजिंग में सार्वजनिक परिवहन में 25 हजार बसों की तुलना में दिल्ली को 4500 बसों का सहारा है.

जाहिर है दिल्ली के पास बीजिंग की तुलना में सीमित संसाधन, फिर भी यहां ऑड-ईवन का पहला चरण तो सफल हुआ ही 15 अप्रैल से लागू होकर 30 अप्रैल तक चलने वाले ऑड-ईवन पार्ट-2 में भी अब तक कोई खास दिक्कत नहीं हुई है. सड़कों पर ट्रैफिक स्मूथ रहता है और प्रदूषण पर थोड़ा ही सही, कंट्रोल तो होता ही है. हालांकि दिल्ली सरकार अपनी इस मुहिम के बावजूद मिडिल और अपर मिडिल क्लास के लोगों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम की तरफ मोड़ नहीं पाई है.

इसी तरह इस नियम को पूरी तरह से लागू कराने के लिए उनके पास वालंटियर भी नहीं हैं. दिल्ली में ज्यादातर मध्यवर्ग के लोगों, जिनमें नौकरीशुदा और व्यावसायी, दोनों वर्ग शामिल है, के पास ड्राईवर नहीं हैं, और बच्चों को स्कूलों तक छोड़ने का काम घर का ही कोई सदस्य करता है, उनके लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं. अमूमन ऐसे बच्चों को सुबह के वक्त स्कूल छोड़ने का काम पुरूष सदस्य करता था, क्योंकि महिलाएं घर के काम में व्यस्त होती थीं, और स्कूल से वापस लाने का काम महिलाएं करतीं थीं, पर ऑड-ईवन ने यह व्यवस्था हिला दी है.

इसी तरह ऐप बेस्ड टैक्सी सर्विस और ऑटो वालों की मनमानी भी लोगों की मजबूरी देख कर बढ़ी है. काफी शिकायतों के बाद दिल्ली सरकार ने घोषणा की कि अगर टैक्सी और ऑटो वाले ज्यादा किराया वसूलें, तो करें तो लोग हेल्पलाइन नंबर 011-42400400 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं. ऑड-ईवन के दौरान किराया बढ़ाने को लेकर ऐप आधारित टैक्सियों की मनमानी तो इस कदर बढ़ गई थी कि सीएम अरविंद केजरीवाल को ट्वीट करना पड़ा कि उन टैक्सियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी, जो सरकार द्वारा तय रेट से ज़्यादा पैसे वसूलेंगे. उनके परमिट रद्द होंगे और वाहनों को ज़ब्त किया जाएगा.

सीएम के ट्वीट के बाद हालांकि इन कंपनियों की मनमानी थोड़ी कम हुई पर किराए में बढ़ोतरी का बचाव करते हुए उबेर ने कहा है कि मांग बढ़ने पर तम मानकों के अनुसार किराया बढ़ ही जाता है. फिर भी 'दिल्ली सरकार द्वारा परमिट रद्द करने और वाहन जब्त करने की चेतावनी को देखते हुए हम तत्काल प्रभाव से दिल्ली में किराए में बढ़ोतरी को अस्थायी रूप से रोक रहे हैं.' ऐप बेस दूसरी कार सर्विस ओला ने भी कहा कि, 'दिल्ली में सरकार के ऑड-ईवन पहल के समर्थन में हमने पीक प्राइसिंग, व्यस्त समय में किराए में इजाफा, को अस्थायी रूप से वापस ले लिया है.'

कहने के लिए तो इस योजना को सही ढंग से लागू करने के लिए पूरे शहर को 11 ज़ोन में बांटा गया है. हर ज़ोन में दस सेक्टर हैं.  हर सेक्टर में एक मोबाइल प्रवर्तन टीम है. यह टीम दस बिंदुओं पर फ़ोकस कर रही है, जिनमें शहर के सभी अहम रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, अस्पताल, स्कूल-कॉलेज, कारोबारी केंद्र, शहर की सीमाएं और भीड़भाड़ वाले इलाक़े शामिल हैं. यातायात विभाग ने 200 ऐसे चौराहे छांटे हैं, जहां कर्मचारी अपनी टीमों के साथ तैनात रह रहे हैं. शहर में कुछ खास जगहों पर 10 सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं. ट्रैफ़िक पुलिस, परिवहन विभाग और अधिकारी सड़क पर उतरेंगे और नियमों का उल्लंघन करने वालों का मोटर व्हीकल एक्ट के तहत 2000 रुपए का चालान कट रहा है.

चूंकि सीएनजी के वाहनों को इससे छूट है इसलिए सीएनजी के स्टीकरों की खरीद में तमाम धांधलेबाजी हुई है. एक ने तो सीएम पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए स्याही भी फेंक दी. उसी की तरह कई लोगों ने सीएनजी के स्टीकरों को लेकर हेराफेरी के आरोप लगाएं हैं. पुरानी नंबर प्लेट की कारों में डबल नंबर प्लेट का खेल भी सामने आया है. कुछ लोगों का मानना है कि दोपहिया वाहनों पर इसे लागू किए बिना सड़क पर वाहनों की भीड़ कम नहीं की जा सकती.  सबके अपने-अपने मत हैं, हो सकते हैं, पर इसी योजना के चलते फॉर्च्युन मैगजीन ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को 50 महानतम नेताओं की सूची में जगह दी है. दिल्ली के पल्युशन से जो लोग दो-चार हैं उन्हें यह पता है, कि सड़क की दिक्कतें, जीवन के लिए जरूरी सांसों से ज्यादा बड़ी नहीं.
जय प्रकाश पाण्डेय
जय प्रकाश पाण्डेय 14 साल की उम्र से अख़बारों में लेखन शुरू कर देने वाले जय प्रकाश पाण्डेय ने राजनीति विज्ञान से स्नातकोत्तर और पत्रकारिता सहित 8 विषयों से स्नातक की डिग्री हासिल की और पत्रकारिता के अपने जुनून के चलते डॉक्टरेट अधूरा छोड़ दिया। दिल्ली में एक समाचार एजेन्सी के कार्यकारी संपादक, और एक बड़े पत्रिका समूह के प्रकाशकीय संपादक बने। हर विषय पर लिखा और चर्चित हुए। फिलहाल, आन लाइन मीडिया के चर्चित पोर्टल समूह 'फेस एन फैक्ट्स' के प्रबंध संपादक और ड्रीम प्रेस कंसलटेंट्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं।

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