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प्रभु जी! यह भारतीय रेल है

जय प्रकाश पाण्डेय , Mar 04, 2016, 9:13 am IST
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प्रभु जी! यह भारतीय रेल है हर साल, सरकार चाहे जिसकी हो, जब भी बजट पेश होता है, लगता है सब कुछ कितना हसीन व अच्छा है. संसद में नेताओं का भाषण, सत्ता पक्ष की तालियां, टीवी चैनलों पर जानकारों की बहसें, अखबारों की हेडिंगे और व्यापारी वर्ग की उत्कंठा. आर्थिक उत्सव का सा शमां. लगता है, आगे और अच्छा होगा, अच्छा होने वाला है, पर अगले कुछ ही दिनों में सारी चीजें 'ढाक के तीन पात' की तर्ज पर हवा हो जाती हैं.

मोदी सरकार में ' अच्छे दिनों' का वादा था, इसलिए उनसे उम्मीदें और भी ज्यादा हैं. वैसे भी प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी सपनों के बड़े सौदागर हैं. लच्छेदार भाषा, लोकलुभावन योजनाएं, सपनों का साम्राज्य, बेशुमार जुमले और अंतहीन वादे... हमें यह मानने में कोई गुरेज नहीं कि आजाद भारत में जनता के साथ भी इस कदर व्यापार करने वाला कोई दूसरा नेता नहीं हुआ, पर इन सबसे माहौल तो बनता है, अफसोस जनता के हालात नहीं बदलते.

जाहिर है प्रधानमंत्री की देखादेखी, उनके मंत्री और नौकरशाह भी वही कर रहे हैं., तब रेलमंत्री सुरेशप्रभु का बजट उनसे अलग कहां होता? कहते हैं बजट सालाना जमा-खर्चों का लेखा-जोखा होता है, पर यहां तो 2020 तक की बातें कही जा रही हैं. फिर विकास के जिस मॉडल की बात की जा रही है, उसमें आम जनता से ज्यादा व्यापारी वर्ग का भला देखा गया है.

रेलवे के विकास में जन सुविधाओं के हिस्सेदारी की जगह व्यापार हित और रेलवे के निजीकरण ने ले ली है. यही नहीं, सुरेश प्रभु के दूसरे रेल बजट में वेस्ट बंगाल, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों का ख्याल इसलिए रखा गया है, क्योंकि वहां जल्द ही चुनाव होने वाले हैं. कोलकाता में मेट्रो, 2019 तक कोलकाता-दिल्ली फ्रेट कॉरिडोर, चेन्नई में सबअर्बन सेक्शन, चेन्नई-दिल्ली के बीच फ्रेट कॉरिडोर, चेन्नई में भारत का पहला ऑटो हब, तो केरल के तिरुवनंतपुरम में रेलवे द्वारा कॉम्प्रिहेंसिव सब-अर्बन सिस्टम बनाने की बात चुनावी घोषणा का हिस्सा लगता हैं.

पंजाब में चुनाव के मद्देनजर आम आदमी पार्टी को घेरने के लिए, दिल्ली में रिंग रोड की तर्ज पर रिंग रेल की घोषणा, अहमदाबाद-मुंबई के बीच हाई स्पीड कॉरिडोर, मुंबई में एलिवेटेड ट्रेन, बुजुर्गों के लिए 50 पर्सेंट कोटा, धार्मिक स्थलों के स्टेशनों का रेनोवेशन, मध्य प्रदेश के हबीबगंज को देश का पहला मॉडल स्टेशन और वर्ल्ड क्लास स्टेशन बनाने के लिए फिर से टेंडर बुलाए जाने की बात में नया क्या है, सिवाय इसके की वहां कमीशन के चक्कर में टेंडर खोले नहीं जा रहे.

रेल बजट की दूसरी बातों से पहले जरा उन हकीकतों से दो-चार होते हैं, जिनसे आम आदमी का, हमारा-आपका रोजाना पाला पड़ता है. इस सरकार ने पिछले साल जब पूरी दुनिया में तेल के दाम बेतरह गिर रहे थे, तब रेल यात्री भाड़ा बढ़ाया था. आलम यह था कि प्लेट्फार्म टिकट तक के दाम बढ़ा दिए गए थे. रिजर्वेशन कराने की सुविधा नब्बे दिन से बढ़ा कर 120 दिन कर दी गई थी, पर टिकट आपको वेटिंग के ही मिलने थे. आलम यह है कि अगर आप एजेंट से टिकट खरीदते हैं, तो आप कल क कन्फर्म टिकट पा सकते हैं, वरना हेड ऑफिस कोटे तक की गारंटी नहीं.

पहले रेलवे में रेल नीर मिलता था, पानी खराब होने पर आप उसकी शिकायत कर सकते थे. अब हर ट्रेन में हर स्टेशन तक पर पानी बोतलों के अलग-अलग ब्रांड. इसी तरह रेलवे पहले कैटरिंग की क्वालिटी और क्वांटिटी खुद से परखता था. मोदी जी के वीजन की दुहाई देने वाले इसी रेलमंत्री जी ने कैटरिंग की ठेकेदारी दे दी. उसके बाद इन कैटरर्स के काम करने का अंदाज देखिए. पिछले दिनों हरिद्वार से बिलासपुर होते हुए पुरी जाने वाली ट्रेन के एसी कोच में यात्रियों को बेहद खराब खाना मिला. शिकायत पर जवाब मिला सेठ ने साठ करोड़ देकर ठेका हासिल किया है. पैसे तो आप लोगों से ही वसूल होंगे.

हफ्ते -दो हफ्ते बाद हरियाणा के जाट आंदोलन के दौरान रेलवे ने ओड़िशा से, मध्य प्रदेश से, छत्तीसगढ़ से दिल्ली आने वाली ट्रेनों को क्यों कैंसिल कर दिया, समझ से परे है. हजारों लोग परेशान, बेहाल. तत्काल टिकट कटाकर चलने वालों को रास्ते में किसी ट्रेन में साफ बेड रोल नहीं. तो किसी में सादी थाली नहीं. मील ऑन व्हील्स कंपनी की करामात यह है कि उनके कर्मचारी आपको 110 रुपए से नीचे का खाना नहीं देंगे. जो सरकार अपने लोगों की यात्रा का, जो रेल अपने यात्रियों की सुविधा का ख्याल नहीं रख सकती, उसे किसी भी तरह से बड़बोलापन शोभा नहीं देता.

अभी रेलमंत्री जी ने चार नई तरह की ट्रेनों तेजस, हमसफर, अंत्योदय और उदय का एलान किया है. दावा यह है कि तेजस 130 किमी/घंटा की रफ्तार से चलेगी. हमसफर पूरी तरह से थर्ड एसी होगी. अंत्योदय एक्सप्रेस में कोई भी रिजर्वेशन कोच नहीं होगा. सिर्फ जनरल बोगियां होंगी और यह लंबी दूरी की ट्रेन होगी. उदय डबल डेकर ट्रेन होगी, जिसे बिजी रूट पर रात में चलाया जाएगा. बात मजेदार है, पर जो ट्रेनें पहले से चल रही हैं, उनका, उनके यात्रियों का क्या? रेलवे स्टेशनों की गंदगी का आलम यह है कि देश की राजधानी में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म तक पर आप बिना नाक पर रूमाल रखे नहीं बैठ सकते.

सरकार कहती है, 2020 तक यात्री जब चाहे, तब उसे टिकट मिलेगा. 2020 तक 95 फीसदी ट्रेनें राइट टाइम पर चलाने का टारगेट है. यह 'रेल बजट 2016'  है या पंचवर्षीय योजना. रेलमंत्री ने यात्री ट्रेन की औसत स्पीड 80 किमी करने का लक्ष्य तय किया, पर कब तक? कोई समय सीमा? महिलाओं के लिए 24 घंटे हेल्पलाइन नंबर - 182 की बात कही गई, पर अभी आलम क्या है? दावे यह भी हैं कि ट्रेनों में 65 हजार एडिशनल बर्थ लगेंगे. जनरल बर्थ में मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट होगा, इस साल के अंत तक ट्रेनों में 17 हजार बायो टॉयलेट लगेंगे. हर कैटेगरी में 33 पर्सेंट सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व होंगी.सीनियर सिटिजन का कोटा 50 फीसदी तक बढ़ाया गया है. हर ट्रेन में 120 लोअर बर्थ/सीट रि‍जर्व रखी जाएंगी.

कुछ घोषणाएं इतनी लच्छेदार भाषा में हैं कि कानों को सुकून देती हैं, पर इनके पीछे आम आदमियों से ज्यादा निजी हलके को लाभ पहुंचाने का मकसद है. जैसे दावा यह किया गया कि 400 स्टेशनों को निजी भागीदारी से डेवलप किया जाएगा. यात्रियों की शिकायत के लिए नई फोन लाइन शुरू होगी.311 स्टेशनों पर सीसीटीवी सिक्युरिटी होगी. व्हीलचेयर की ऑनलाइन सुविधा दी जाएगी. अगले तीन महीनों में फॉरेन कार्ड्स पर भी ई-रिजर्वेशन किया जा सकेगा.139 हेल्पलाइन से ही टिकट कैंसल कराए जा सकेंगे. ट्रेनों में सफाई के लिए क्लीन माय कोच फैसिलिटी शुरू की जाएगी. 408 स्टेशनों पर ई-कैटरिंग की सेवा शुरू होगी. टिकट पर ऑप्शनल इन्श्योरेंस फैसिलिटी. 2500 ऑटोमेटिक वाटर वेंडिंग मशीनें लगेंगी. दो साल में 400 स्टेशनों को वाई-फाई किया जाएगा, साफ है ये सारा काम टेंडर पर होगा.

पर इससे उलट कुछ जन सुविधाओं का जायजा लीजिए. रेस्ट रूम में हर घंटे के हिसाब से बुकिंग होगी. रि‍टायरिंग रूम की ऑनलाइन बुकिंग शुरू की गई है. पैसेंजरों को ट्रैवल इन्श्योरेंस पॉलि‍सी भी दी जाएगी. आईआरसीटीसी खानपान सेवा में सुधार करेगी, यानी अब तक सेवा का स्तर खराब था?  बेबीफूड और हॉट वाटर की सुविधा स्टेशनों पर दी जाएगी. 2500 किलोमीटर ब्रॉडगेज का ठेका दिया जाएगा. रेलमंत्री प्रभु रेलवे के आधुनिकीकरण पर 5 साल में 8.5 लाख करोड़ के ख़र्च का लक्ष्य रख रहे हैं. यह पैसा वह कहां से जुटाएंगे, स्पष्ट नहीं.
 
सुरेश प्रभु ने अपने बजट भाषण में यह साफ कहा कि रेल बजट में पीएम मोदी का विजन है. उनका दावा है कि हमारा प्रयास है कि नागरिकों को ऐसा सिस्टम मिले, जिस पर वे नाज कर सकें. वह यह भी कहते हैं कि हम लोगों की अरसे से चली आ रही मांगों पर ध्यान दे रहे हैं. रेल मंत्री का दावा है कि यात्री की गरिमा, रेल की गति और देश की प्रगति हमारा लक्ष्य है. यह बजट भारत के आम नागरिकों की हसरतों का आइना है. क्या वाकई ऐसा है? अगर हां, तो रेल मंत्री जी, अभी तो सिर्फ इतना कर दीजिए कि ट्रेनें टाइम से चलें, रिजर्वेशन में दलालों का बोलबाला कम हो, लोगों को ट्रेनों में ठीक से खाना मिले. लोग सुरक्षित व सुखद यात्रा कर सकें. आमीन!
जय प्रकाश पाण्डेय
जय प्रकाश पाण्डेय 14 साल की उम्र से अख़बारों में लेखन शुरू कर देने वाले जय प्रकाश पाण्डेय ने राजनीति विज्ञान से स्नातकोत्तर और पत्रकारिता सहित 8 विषयों से स्नातक की डिग्री हासिल की और पत्रकारिता के अपने जुनून के चलते डॉक्टरेट अधूरा छोड़ दिया। दिल्ली में एक समाचार एजेन्सी के कार्यकारी संपादक, और एक बड़े पत्रिका समूह के प्रकाशकीय संपादक बने। हर विषय पर लिखा और चर्चित हुए। फिलहाल, आन लाइन मीडिया के चर्चित पोर्टल समूह 'फेस एन फैक्ट्स' के प्रबंध संपादक और ड्रीम प्रेस कंसलटेंट्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं।

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