आतंक के आगे हारती गोलियां

आतंक के आगे हारती गोलियां लंदन में एक सिरफिरे ने सीरिया पर अमेरिकी-योरोपीय हमलों के जवाब में मेट्रो रेल में बेकुसूर लोगों को चाकुओं से गोद दिया. इससे दो दिन पहले अमेरिका में एक पाकिस्तानी दंपति ने पार्टी कर रहे लोगों पर स्वचालित हथियारों से हमला कर चौदह लोगों को मार गिराया. आतंकवाद और हिंसा के नाम पर होने वाले हमले किसी कंप्युटर वायरस की तरह बढ़ने लगे हैं. इससे पहले जुमे के दिन माली में आतंकवादी-जिहादियों ने एक बड़े होटल पर हमला कर लगभग एक सौ सत्तर लोगों को बंधक बना लिया था. जिन्हें बाद में सेना ने छुड़ा लिया, पर बंधकों के जीवन पर अचानक छाए दहशत के ये घंटे इनके जीवन से कभी जाने वाले नहीं.

इसी तरह इस्लामिक स्टेट ने 'पेरिस विफोर रोम' नामक वीडियो जारी कर अमेरिकी राष्ट्रपति भवन 'ह्वाइट हाउस' को उड़ा देने की धमकी दी है. माली का हमला और आईएस का यह वीडियो पेरिस के इस दावे के बाद आया है, जिसमें उसने एक दिन पहले ही अपने उपर हुए हमले के आतंकवादियों को मार गिराने का दावा किया था.
 
दरअसल इस्लाम बनाम इसाईयत की इस लड़ाई में दुनिया पीस रही है. जिहादियों द्वारा बीते शुक्रवार को पेरिस में किए गए हमले के जवाब में अमेरिकी लड़ाकू विमानों की अगुआई में फ्रांस ने सीरिया के उन ठिकानों पर बम बरसाने शुरू कर दिए थे, जिन्हें वह इस्लामिक स्टेट का गढ़ मानता है.

जिहादियों द्वारा फ्रांस के पेरिस शहर में सौ मिनट के अंदर अलग-अलग जगहों पर किए गए हमले में 129 लोग मारे गए थे. समूची दुनिया फ्रांस के साथ दुख की उस घड़ी में शरीक भी हुई, पर फ्रांस का दुख इससे कम नहीं हुआ. चूंकि हमलावरों ने एक ईसाई बहुल देश में अल्लाह हो अकबर का नारा लगाते हुए हमला किया था, इसलिए इसे ईसाईयत बनाम इस्लाम के पारंपरिक जंग के तौर पर भी देखा जा रहा है. दूसरे नजरिए से यह कट्टरपंथिता बनाम उदारवाद के बीच का भी झगड़ा है.

फ्रांस ने अपने पहले हवाई हमले में सीरिया में इस्लामी चरमपंथियों की कथित राजधानी राका में मौजूद 'इस्लामिक इस्टेट' के ठिकानों पर भारी बमबारी की है. इस हमले के तुरंत बाद फ्रांस के रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि, इस हवाई हमले में जिन पहले ठिकानों को नष्ट किया गया है, उनका इस्तेमाल दाएश ('इस्लामिक इस्टेट' को अरबी भाषा में इसी नाम से बुलाते हैं) एक कमांड पोस्ट, जिहादियों की नियुक्ति के केंद्र और हथियारों एवं युद्ध सामग्री के डिपो के रूप में करता था. दूसरा ठिकाना आतंकियों के प्रशिक्षण शिविर के रूप में प्रयोग किया जाता था.

फ्रांसीसी रक्षा मंत्रालय ने यह भी खुलासा किया था कि हवाई हमला बोलने के लिए विमान जॉर्डन और संयुक्त अरब अमीरात से रवाना हुए. ये हमले अमेरिकी बलों के साथ तालमेल करते हुए बोले गए. इस हमले में आतंकियों के ट्रेनिंग कैंप और कमांड पोस्ट को निशाना बनाया गया.

फ्रांस के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इन हवाई हमलों में सेना की ओर से 'इस्लामिक इस्टेट' के हथियारों के गोदामों को भी निशाना बनाया गया है. फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने अपने देश के इतिहास के अब तक के इस सबसे भयावह हमले को 'युद्धक कृत्य' करार देते हुए यह संकल्प लिया था कि फ्रांस इस्लामिक स्टेट पर बिना किसी दया के जवाबी कार्रवाई करेगा.

अपनी बात को 48 घंटा पूरा होने से पहले ही ओलांद ने अंजाम दे दिया. उधर फ्रांसीसी पुलिस इस हमले के तुरंत बाद से सघन अभियान चलाए हुए थी, जिसे दूसरे पश्चिमी देशों की पुलिस और इंटरपोल का समर्थन हासिल हो गया है. सीरिया पर हमले के बाद अब यह साफ हो चुका है कि इस लड़ाई में सेना भी शामिल हो गई है.
फ्रांस के गृह मंत्री बर्नार्ड कजानेव ने बेल्जियम के अपने समकक्ष जेन जैंबन के साथ बातचीत के बाद स्पष्ट कर दिया था कि, हम जिहादियों के नेटवर्क को नष्ट करने के लिए एकसाथ मिलकर काम करने के प्रति प्रतिबद्ध हैं. जांच का दायरा योरोप के बाकी देशों तक जारी हो जाने के बाद पुलिस ने पेरिस के उत्तरी उपनगर बोबिग्नी में भी खोजबीन की थी, लेकिन इसके नतीजे नहीं बताए थे.

दरअसल, पेरिस पर आतंकवादी हमलों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा इराक और सीरिया में इस्लामिक स्टेट समूह के खिलाफ सैन्य कार्रवाई बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंसक वारदातों,  चरमपंथ और आतंकवाद को रोकने के लिए दुनिया भर में आतंकी ठिकानों पर हवाई बमबारी करने के पक्ष में है. लंबे समय से पश्चिम एशिया के विशेषज्ञ रहे एंथनी कोरडेसमैन का कहना है कि, 'इस्लामिक इस्टेट' पर बमबारी करने के लिए आप पाषाण युग में नहीं जा सकते.

खुद भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, जो ब्रिक्स सम्मेलन में दुनिया के सबसे ताकतवर नेताओं के साथ बैठक कर रहे थे, ने भी ब्रिक्स के अपने भाषण की पहली लाइन में ही कहा कि, 'हम पेरिस में घटी खौफनाक आंतकी घटना का एकजुट होकर कड़ी भर्त्सना करते हैं. हम सिनाई में मारे गए लोगों के लिए रूस के साथ अपनी सहानुभूति और समर्थन व्यक्त करते हैं. अंकारा और बेरूत भी आतंकवाद के बढ़ते प्रभाव की याद दिलाते हैं, और यह मानते हैं कि आतंकवाद के खिलाफ पूरी मानवता को एकजुट होकर खड़ा होना होगा.'

पिछले डेढ़ सालों में ऐसा पहली बार हुआ कि कांग्रेस ने भी प्रधानमंत्री के मानवता और आतंकवाद संबंधी बयान की सार्वजनिक तौर पर तारीफ की है. प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में इस बात पर भी जोर दिया कि, 'आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए समूची दुनिया को मिल कर पहल करने की जितनी अधिक आवश्यकता अभी है, उतनी पहले कभी नहीं थी. इसलिए मेरा आग्रह है कि ब्रिक्स राष्ट्रों के लिए भी 'आतंकवाद से जंग' पहली प्राथमिकता होनी चाहिए.'

अब जब कि इस्लामिक स्टेट के खिलाफ अमेरिका के समर्थन से फ्रांस और पश्चिमी राष्ट्रों ने सीरिया पर हमला बोल दिया है, तब यह जानना जरूरी है कि क्या, युद्ध से शांति पाई जा सकती है? अगर ऐसा होता तो प्रथम विश्व युद्ध के बाद दूसरे विश्व युद्ध की नौबत ही न आती. फिर इराक अमेरिका युद्ध, सीरिया, इजराइल, उत्तरी कोरिया, अफगानिस्तान, तालिबान, अलकायदा और इस्लामिक स्टेट के खूनखराबे ही नहीं, भारत-पाकिस्तान की सीमाओं पर भी इतनी गोलीबारी न होती. जैसा कि फ्रांस पर आतंकवादी हमले के तुरंत बाद पोप फ्रांसिस ने चेतावनी देते हुए कहा भी कि, 'फ्रांस पर हमला तीसरे विश्व युद्ध का एक हिस्सा है.'

संयोग से महात्मा गांधी ने भी तीसरे विश्व युद्ध के बारे में 8 दिसंबर 1947 को कुछ इस तरह लिखा था: ' इनदिनों तीसरे विश्वयुद्ध की बड़ी बातचीत हो रही है. अगर तीसरा विश्वयुद्ध होता है, तो यह संदिग्ध है कि भारत को इसमें नहीं घसीटा जाएगा. लेकिन मैं इस सवाल को फिलहाल छोड़ता हूं, और विश्वास के साथ कह सकता हूं कि यह केवल भारत के ऊपर है, कि वह न केवल अपने को युद्ध से दूर रखे बल्कि अपने विश्वास की ताकत से दुनिया के सामने युद्ध की निरर्थकता को सिद्ध कर दे. लेकिन अभी जब भाई- भाई का गला काट रहा है, मैं इस बात का वादा कैसे कर सकता हूं?'

शायद यही वजह है कि न केवल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व में शांति स्थापना के लिए गांधी जी के सत्य, अहिंसा से जुड़े उपदेशों पर दुनिया को चलने का आह्वान किया, बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी इसी रविवार को हिंदू महासभा द्वारा महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे की 66वीं बरसी को ‘बलिदान दिवस’ के रुप में मनाए जाने की कड़ी निंदा की है. संघ के वरिष्ठ विचारक एम जी वैद्य ने साफ-साफ कहा कि गोडसे को ‘गौरवान्वित’ करने की किसी भी तरह की कोशिश को सही नहीं ठहराया जा सकता है.

आरएसएस विचारक ने आगे बढ़ते हुए कहा कि गांधी और गोड़से की विचारधाराएं अलग हो सकती हैं, लेकिन वैचारिक मतभेद की लड़ाई को उसी माध्यम से ही लड़ा जाना चाहिए और इसके लिए रक्तपात की कोई जगह नहीं है. वैद्य ने साफ किया कि कुछ लोग कहते हैं कि गोडसे को महिमा मंडित करने से हिन्दुत्व का गौरव बढ़ेगा, पर मेरा मानना है कि इससे धर्म का नाम खराब होगा. उन्होंने यह भी माना कि गांधी की हत्या से हिन्दुत्व पर उलटा असर पड़ा है.

भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज़ हुसैन ने भी कहा कि उनकी पार्टी महात्मा गांधी के सिद्धांतों और दर्शन में विश्वास करती है और गोडसे को उनका हत्यारा मानती है. हालांकि अमेरिकी और पश्चिमी समाज भी एक तरफ मानवता की बात करता है, दूसरी तरफ बम और गोले बरसाता है. उसी का नतीजा है कि समूचा विश्व आज युद्ध के मुहाने पर खड़ा है. अगर समय रहते हम नहीं चेते और बुद्ध और महात्मा गांधी के उपदेशों को असल जीवन में नहीं उतारा, तो वह दिन दूर नहीं, जब दुनिया हिंसा की आग में लड़ -झगड़ कर खुद नष्ट हो जाएगी.
जय प्रकाश पाण्डेय
जय प्रकाश पाण्डेय 14 साल की उम्र से अख़बारों में लेखन शुरू कर देने वाले जय प्रकाश पाण्डेय ने राजनीति विज्ञान से स्नातकोत्तर और पत्रकारिता सहित 8 विषयों से स्नातक की डिग्री हासिल की और पत्रकारिता के अपने जुनून के चलते डॉक्टरेट अधूरा छोड़ दिया। दिल्ली में एक समाचार एजेन्सी के कार्यकारी संपादक, और एक बड़े पत्रिका समूह के प्रकाशकीय संपादक बने। हर विषय पर लिखा और चर्चित हुए। फिलहाल, आन लाइन मीडिया के चर्चित पोर्टल समूह 'फेस एन फैक्ट्स' के प्रबंध संपादक और ड्रीम प्रेस कंसलटेंट्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं।

वोट दें

क्या 2019 लोकसभा चुनाव में NDA पूर्ण बहुमत से सत्ता में आ सकती है?

हां
नहीं
बताना मुश्किल
 
stack