'शिव सेना' की इस पटखनी का सबक

जय प्रकाश पाण्डेय , Nov 02, 2015, 5:57 am IST
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'शिव सेना' की इस पटखनी का सबक शिव सेना के पिछले काफी दिनों से आक्रामक रहे तेवर का लाभ उसे आखिर मिल ही गया और शिव सेना ने मुबंई के उपनगर कल्याण-डोंबीवली निकाय चुनाव में जीत हासिल कर ली. इस चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना गठबंधन के बीच की दरारें काफी खुलकर सामने आईं थीं. सेना ने 120 में से 52 सीटों पर जीत हासिल की, वहीं भाजपा को केवल 41 सी्टें मिलीं, जबकि राज्य में मुख्यमंत्री उनका है. दो सीटों पर मतदान नहीं हुए थे.

वैसे तो यह दोनों पार्टियां महाराष्ट्र की मौजूदा सरकार में सहयोगी हैं, लेकिन मुंबई के उपनगर नगर निकाय चुनाव में दोनों एक दूसरे को कड़ी टक्कर देते नज़र आए. एक तरह से यह चुनाव दोनों ही पार्टियों के लिए प्रतिष्ठा का मुद्दा बन गया था. अलग से चुनाव लड़ने का फैसला शिवसेना का था और इसके बाद पूरे अभियान में दोनों पार्टियों के बीच इतनी कड़वाहट दिखाई दी कि पिछले हफ्ते तो शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने गठबंधन से हाथ खींच लेने की धमकी भी दे डाली थी.

वैसे तो भारतीय जनता पार्टी और शिव सेना, दोनों ही दलों की राजनीतिक विचारधारा लगभग समान है. दोनों के लिए ही हिन्दुत्व, विकास और स्वाभिमान प्राथमिक हैं और दोनों ही दल न केवल महाराष्ट्र में मिलजुलकर सरकार चला रहे हैं, बल्कि केंद्र में भी, भले ही भाजपा को जरूरत न हो, एनडीए की नीतियों के समर्थक और भाजपा की एक सहयोगी के तौर पर शिवसेना ने राष्ट्रीय स्तर पर अपने को स्थापित करने की कोशिश की थी.

फिर अचानक से ऐसा क्या हो गया कि भाजपा के खिलाफ शिवसेना ने हमले शुरू कर दिए, और अब तो आलम यह है कि शिव सेना के भाजपा पर आक्रमण की धार ने, उसके घोषित विरोधियों, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बसपा, जनता दल युनाइटेड, राष्ट्रीय जनता दल को भी पीछे छोड़ दिया है.शिवसेना ने इनदिनों हर संभावित फोरम पर, चाहे वह उसका अखबार 'सामना' हो, कार्यकर्ताओं की बैठक हो, रैली हो, या प्रेस विज्ञप्ति,  भाजपा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है.

मुंबई में हर दिन शिव सेना कोई न कोई शगूफा छोड़ती है. अभी 21 अक्तूबर को ही शिवसेना ने बीजेपी और पीएम नरेंद्र मोदी पर पोस्टर वार के जरिए हमला बोला. शिवसेना मुख्‍यालय के बाहर एक बड़ा पोस्‍टर लगाकर शिवसेना ने भाजपा को पुराने दिनों की याद दिलाई. इस पोस्टर में भाजपा के कई बड़े नेताओं की शिवसेना के संस्‍थापक स्वर्गीय बाला साहेब ठाकरे के सामने सम्मान से सिर झुकाती हुई फोटुएं चस्पां थीं. पोस्टर पर लिखा था,  'जो गर्व से सिर उठा रहे हैं, वो कभी बाला साहेब के चरणों में सिर झुकाते थे.'

शिवसेना के इस पोस्‍टर में पीएम नरेंद्र मोदी के अलावा भाजपा के वरिष्‍ठ नेता लालकृष्‍ण आडवाणी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री नीतिन गडकरी के अलावा वर्तमान राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, रांकापा नेता शरद पवार और दूसरे नेता बाला साहेब ठाकरे से मिलते हुए या उनके सामने सिर झुकाते नजर आ रहे थे. पोस्टर में शिवसेना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ढोंगी भी करार दिया था. भाजपा का कहना था कि यह फोटो मोदी और बाला साहेब ठाकरे की मुलाकात के दौरान की थी, और बाला साहेब की उम्र और उनके सम्मान को देखते हुए मोदी के ऐसा करने में गलत क्या था? भाजपा के लोगों के एतराज के बाद बीएमसी ने शिवसेना के इस मोदी विरोधी पोस्टर को हटा दिया था, पर तब तक मीडिया के जरीए यह पोस्टर और उसका मजमून देश भर में प्रचारित-प्रसारित हो गया था.

महाराष्ट्र में पाकिस्तान के कलाकारों-क्रिकेटरों के विरोध को लेकर भी भाजपा और शिवसेना के बीच तनातनी बढ़ी थी. आलम यह था कि इसी सोमवार को ही बीसीसीआई के मुंबई कार्यालय में भारत-पाकिस्तान के बीच संभावित द्विपक्षीय क्रिकेट सीरीज को लेकर बीसीसीआई प्रमुख शशांक मनोहर और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष शहरयार खान की मुलाकात शिवसेना कार्यकर्ताओं के तोड़फोड़ और हंगामे के चलते स्थगित कर दी गई थी.

इस तरह के माहौल का असर यह हुआ कि पहले तो सुरक्षा कारणों के चलते भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच चल रही मौजूदा सीरीज के अंपायर अलीम डार ने हटने की घोषणा की और उनके बाद मैचों की कमेंट्री कर रहे पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर वसीम अकरम और शोएब अख्तर ने भी पाकिस्तान वापस लौटने का फैसला कर लिया. शिवसैनिकों की ओर से किए गए विरोध-प्रदर्शन और हंगामे को देखते हुए इन दोनों पूर्व क्रिकेटरों ने यह फैसला लिया था.

इससे पहले पाकिस्तान के मंत्री रहे खुर्शीद कसूरी की किताब के मुंबई में लोकार्पण के मसले पर भी शिवसेना ने कभी लाल कृष्ण आडवाणी के करीबी रहे सुधीन्द्र कुलकर्णी के चेहरे पर कालिख पोत दी थी और जब भाजपा के तमाम केंद्रीय नेताओं ने इस घट्ना की आलोचना कर दी, तो एक कदम आगे बढ़कर शिवसेना ने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में कुलकर्णी को मुंबई पर 26/11 को हुए आतंकी हमले के दोषी अजमल कसाब से जोड़ते हुए कहा कि भारत को आतंकवादियों से उतना खतरा नहीं है, जितना इनके जैसे लोगों से है. शिवसेना का तर्क था कि देशभक्त होना और देश की सुरक्षा करना महाराष्ट्र का काम है और हम अपना काम कर रहे हैं.

अक्तूबर में ही शिवसेना ने मुंबई में पाकिस्तानी गजल गायक उस्ताद गुलाम अली के प्रस्तावित संगीत कार्यक्रम को भी बाधित करने की धमकी दी थी, जिसके बाद वह कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया था. कहते हैं कि इस कार्यक्रम के आयोजक ने शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से मिल कर कार्यक्रम होने देने की अपील भी की थी, पर उनके न मानने के चलते कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया था. कार्यक्रम रद्द होने के बाद गुलाम अली ने कहा था, 'मैं नाराज नहीं हूं, बहुत आहत हूं. भारत में मुझे हमेशा प्यार मिला.'

शिवसेना ने हिन्दू नववर्ष के पहले दिन 25 हजार करोड़ के एलईडी घोटाले को भी उजागर किया था. संजय राउत ने तब लिखा था  कि केंद्र सरकार ने एलईडी बल्ब लगाने का ठेका एक मृत कंपनी को दिया है, जिसमें करीब 25 हजार करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है.  मुंबई के मरीन लाइंस के समुद्री किनारे को ‘क्वीन नेकलेस’ के नाम से जाना जाता है, जहां शिवसेना के विरोध के बावजूद एलईडी बल्ब लगवाया गया था.

दरअसल महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना सरकार के एक साल पूरा होने के बाद से ही शिवसेना के तेवर तीखे हो गए हैं. वह भाजपा पर हमले कर दबाव बढ़ा कर सत्ता में, चाहे वह मुंबई हो या दिल्ली, अपनी हिस्सेदारी तो बढ़ाना चाहती ही है. पर अपने ही सहयोगी को मुसीबत में डाल कर, आरोप लगा कर और बार-बार नीचा दिखाकर शिवसेना  यह भी बताना चाह्ती है कि कट्टर हिन्दूवाद और कथित जनहित के मसले पर वह अपने सहयोगियों को भी नहीं बख्शेगी. तय है फिलहाल इसका लाभ तो शिवसेना को स्थानीय निकाय चुनाव में मिल ही गया है. भाजपा अगर कुछ करना चाहती है, तो उसे हर हलके में काम करना होगा. केवल गाल बजाने से तो बात बनने वाली अब नहीं है.
जय प्रकाश पाण्डेय
जय प्रकाश पाण्डेय 14 साल की उम्र से अख़बारों में लेखन शुरू कर देने वाले जय प्रकाश पाण्डेय ने राजनीति विज्ञान से स्नातकोत्तर और पत्रकारिता सहित 8 विषयों से स्नातक की डिग्री हासिल की और पत्रकारिता के अपने जुनून के चलते डॉक्टरेट अधूरा छोड़ दिया। दिल्ली में एक समाचार एजेन्सी के कार्यकारी संपादक, और एक बड़े पत्रिका समूह के प्रकाशकीय संपादक बने। हर विषय पर लिखा और चर्चित हुए। फिलहाल, आन लाइन मीडिया के चर्चित पोर्टल समूह 'फेस एन फैक्ट्स' के प्रबंध संपादक और ड्रीम प्रेस कंसलटेंट्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं।

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