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इंद्राणी मुखर्जी! समाज के लिए चुनौती भी, और आईना भी

इंद्राणी मुखर्जी! समाज के लिए चुनौती भी, और आईना भी यह कम कमाल की बात नहीं कि पूर्वोत्तर के एक राज्य असम की दसेक साल पहले तक कि एक अनजान सी महिला ने हमारे अब तक के सभ्य कहे जाने वाले समाज की चूलें हिला दी, और देश हतप्रभ होकर देखता रह गया. सोशल फोरम, यानी फेसबुक, ट्वीटर और लिंकडिन पर अपने आपको समझदार बताने वाला हर शख्स इन दिनों मीडिया, खासकर इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया के हमारे साथियों को इस बात पर कोसने में लगा है कि जब देश आरक्षण आंदोलन, महंगाई, पूर्व फौजियों के 'वन रैंक- वन पेंशन' की मांग, मजदूर समस्या, बिहार चुनाव की सुगबुगाहट और सीमा पर घुसपैठ के बीच नेताओं के बहुरूपिएपन जैसे गंभीर मसलों से जूझ रहा है, तब भाई लोग बजाय उस पर चर्चा करने और बहस कराने के, शीना मर्डर केस की बखिया उधेड़ने में लगे हैं. कहीं ऐसा तो नहीं कि ऐसा साजिशन किया जा रहा है, ताकि जरूरी मसलों से लोगों का ध्यान हट सके.

वाकई समाचार चैनलों को खोलने के बाद शीना मर्डर केस की अतिरेक कवरेज देखने पर किसी को भी एक बारगी यही लग सकता है, पर इससे इस मसले की गंभीरता कम नहीं होती. वजह, जैसा कि फिल्म एक्ट्रेस सोनाक्षी सिन्हा ने अपने कमेंट में कहा, " एक युवा लड़की ने अत्यंत ही घृणित ढंग से अपनी जिंदगी खो दी...वह अपने अभिभावकों द्वारा मार दी गई और लोग मजाक बना रहे हैं! यह वाकई आत्ममंथन का वक्त है."  सोनाक्षी की प्रतिक्रिया का सबसे ताकतवर शब्द है, 'आत्ममंथन'... और तेजी से आगे बढ़ने की ललक लिए, किसी भी ढंग से पैसा कमाने, शोहरत बटोरने और अपनी अतृप्त महत्त्वाकांक्षाओं को येन-केन-प्रकारेण परवान चढ़ाने वाले समाज में यही शब्द 'आत्ममंथन' सबसे ज्यादा मिसिंग है.

पर कब तक? आज नहीं, तो कल हमको, आपको, हममें से हर एक को, हमारे पूरे समाज को इस ओर सोचना ही होगा, और अगर हम नहीं चेते, तो आज नहीं तो कल, हममें से हर एक के घर से निकल आएंगी कई-कई इंद्राणी, संजीव खन्ना, पीटर, राहुल... फिर कितनी शीनाओं की चढ़ेगी बलि? किधर जाएगा हमारा समाज? शीना हत्याकांड कोई आम अपराध नहीं है. वैसे तो अपराध, अपराध होता है, और किसी भी सभ्य समाज में उसकी कोई जगह नहीं है, पर बहुत कम अपराध ऐसे हैं, जो हमारे समाज की बुनियाद को, मानवता को, हमारी संवेदना को, अब तक कि मानवीय कही जाने वाली सभ्यता को हिलाने का माद्दा रखते हैं. शीना हत्याकांड भी उन्हीं मे से एक है. क्योंकि इसमें पैसा है, सेक्स है, महत्त्वाकांक्षा है, फरेब है, हत्या है, झूठ है, साजिश है...यानी वह सब कुछ है, जो इनसानी गिरावट की निशानी हो सकता है.

शीना हत्याकांड में मानवीय संबंधों पर आस्था की नींव हिला देने की क्षमता है. शीना की अपनी ही सगी मां द्वारा हत्या और उससे उलझी हुई कड़ियां यह सवाल उठाती हैं कि आखिर पति का पत्नी के साथ, मां का बच्चों के साथ, बाप का बेटी के साथ, दादा का पोती-पोते के साथ, भाई का बहन के साथ, प्रेमिका का प्रेमी के साथ, मालिक का नौकर के साथ, दोस्त का दोस्त के साथ संबंध कैसा हो? क्या ऐसे ही होते हैं रिश्ते? क्या पैसे की हवस और शोहरत की महत्त्वाकांक्षा इस कदर हर रिश्ते को अपनी आगोश में ले लेती है कि अपराध एक घातक पाप की श्रेणी में तब्दील हो जाए. इंद्राणी मुखर्जी द्वारा संचालित इस पाप वाली श्रेणी के अपराध में निहित हैं: अनाचार, लालच, कपट, छल, वासना, व्यभिचार, झूठ, साजिश, पैसा और गिरावट...

शायद इसीलिए दूसरी जरूरी बातों पर चर्चा के साथ- साथ जरूरी है शीना हत्याकांड के हर पहलू, हर कोण पर चर्चा, जिसकी मुख्य सूत्रधार थी, शीना की अपनी सगी मां इंद्राणी मुखर्जी. आखिर कौन थी यह शीना, और कौन है यह इंद्राणी मुखर्जी, जिसने हमारे समूचे समाज को, उसमें पनप रहे रिश्तों को, विश्वास के ताने-बाने को इस कदर झकझोर दिया,  इसे जानने के लिए हमें लौटना होगा गुवाहाटी, वह भी 70 के दशक में...वहां उपेन्द्र कुमार बोरा और दुर्गा रानी बोरा नाम के एक दम्पति की एक बेटी थी. प्यार से इन्होंने उसका नाम रखा था परी. अपने नाम की तरह ही वह थी बला की खूबसूरत. पर वह परियों की तरह सरल नहीं थी, पर उसके सपने जरूर उंची उड़ान भरते थे.

कहते हैं, जब परी बहुत छोटी थी, तब उसके पिता ने ही उसके साथ रिश्ते बना लिये थे. नतीजतन वह चंचल और बेलगाम हो गई. जब परी आठवीं में थी, तभी वह अपने साथ मिशनरी स्कूल में पढ़ने वाले एक मंत्री के बेटे के साथ भाग गई. पर यह मौज ज्यादा वक्त तक नहीं चला और वह वापस लौट आई. पर इस एक घटना के बाद से उसमें एक साथ अपने से बड़े, हम उम्र और अपने से छोटी उम्र के लोगों से एक-दूसरे से छिपाकर पैरलल संबंध रखने की लत लग गई. पुरुषों को कैसे नचाना है, और अपने काबू में रखना, यह उसने बहुत छोटी उम्र में ही सीख लिया था. मंत्री पुत्र वाली मौजमस्ती के बाद स्कूल की पढ़ाई पूरी होते ही वह शिलांग चली गई. वहां कॉलेज की पढ़ाई के दौरान भी उसने कम गुल नहीं खिलाए और फिर सिद्धार्थ दास नाम के शख्स को अपने प्यार में फंसा लिया या फंस गई जो भी कहें.

कन्फर्म तो नहीं है, पर कहते हैं कि परी इस शादी तक इंद्राणी बन चुकी थी. इस बीच उसने दो बच्चों को जनम दिया, जिनके नाम रखे शीना और मिखाइल. ये बच्चे इंद्राणी ने अपने सौतेले पिता से पैदा किए, या फिर सिद्धार्थ दास से, यह भी एक राज है. क्योंकि गुवाहाटी के स्कूलों में इनके मां - बाप की जगह इंद्राणी के मां-बाप का ही नाम लिखा है. इसीलिए वह इन बच्चों को अपने कथित बाप -कम- प्रेमी के हवाले गुवाहाटी छोड़ कर कलकत्ता चली आई, जहां उसने सिद्धार्थ से अलग हो कर संजीव खन्ना नाम के शख्स से शादी कर लिया. इन दोनों की शादीशुदा जिंदगी सिर्फ उस दिन तक ठीक-ठाक चली, जब तक संजीव के पास मौज-मस्ती के लिए पैसे थे. इसी मस्ती के बीच इंद्राणी ने संजीव से एक बेटी पैदा की विधि खन्ना. लेकिन विधि जब पांच साल की थी, तब इंद्राणी ने संजीव को छोड़ कर अपनी महत्त्वाकांक्षा के पंखों की उड़ान भरी और मुंबई जा पहुंची.

यहां रिसेप्शनिस्ट रहते हुए इंद्राणी ने स्टार टीवी के इंडिया के कर्ता-धर्ता पीटर मुखर्जी को फंसाया. पीटर की अपनी पहली पत्नी शबनम से दो लड़के हैं राहुल और रॉबिन. इंद्राणी का नाम मुंबई के टैबलॉइड्स में सबसे पहले 2002 में तब सामने आया, जब वह ब्रॉडकास्ट इंडस्ट्री के तब के सबसे ताकतवर शख्स प्रतिम ऊर्फ पीटर मुखर्जी ( तब 46 साल के ) साथ मस्ती कर रही थी. खबर थी कि पीटर खुद से 16 साल छोटी महिला को डेट कर रहे हैं और जल्द ही दोनों शादी करने वाले हैं. इंद्राणी तब शादीशुदा थी और उसने अपनी एक बेटी की बात पीटर को बताई थी.

पीटर से कथित शादी के बाद इंद्राणी कोई छोटी-मोटी शख्सियत नहीं रह गई थी. अब वह सोशलाइट थी, करोड़ों की मालिक थी. उस के पास दुनियावी चीज़ों की कोई कमी नहीं थी. पर पीटर मुखर्जी के साथ-साथ इंद्राणी मुखर्जी के दूसरों से भी रिश्ते थे, यहां तक कई पुराने प्रेमियों से, पुराने पति से भी. पर यह केवल फन और उसकी शारीरिक-मानसिक बीमारी के ही चलते था, ऐसा नहीं है. पीटर मुखर्जी उससे 16 साल बड़ा था, और इसीलिए उसके प्यार में अंधा भी था. इंद्राणी ने अपनी संतानों के बारे में पीटर को सही जानकारी ही नहीं दी थी. शीना को उसने अपनी बेटी की जगह बहन बताया था.

ब्रिटेन में पैदा हुए पीटर को स्टार के मालिक रूपर्ट मर्डोक ने भारत में अपना कारोबार बढ़ाने के लिए चुना था. स्टार इंडिया के सीईओ के तौर पर पीटर सिर्फ मर्डोक के बिजनेस को ही कामयाबी के साथ आगे नहीं बढ़ा रहे थे, बल्कि भारतीय दर्शकों के लिए मनोरंजक शो को ‘कौन बनेगा करोड़पति’ और ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ के साथ आगे बढ़ रहे थे. पीटर उस वक्त मीडिया के चहेते थे और उनकी कथित ग्लैमरस पत्नी इंद्राणी को भी ऐसा ही रुतबा मिला. इस जोड़े का नाम तब और चर्चा में आया जब पीटर ने स्टार इंडिया से अलग होने का फैसला किया और प्रतिद्वंदी ब्रॉडकास्ट नेटवर्क लॉन्च करने का ऐलान किया.

वह इंद्राणी ही थी, जिसने पीटर को ऐसा जोखिम उठाने के लिए तैयार किया था और इसी वजह से INX नेटवर्क बना भी. आधिकारिक रूप से, इस दंपति के पास आईएनएक्स मीडिया के 50 फीसदी स्टेक्स हैं. बाकी स्टेक न्यू सिल्क रूट, तेमासेक होल्डिंग और न्यू वेरनॉन प्राइवेट इक्विटी जैसे निवेशकों के बताए जाते हैं. 7 मनोरंजन और समाचार चैनलों वाले ग्रुप INX नेटवर्क की फाउंडर और सीईओ बनने के बाद भी इंद्राणी की हवस नहीं रूकी. पार्टियों मे गुलछर्रे उड़ाना उसका खास शगल था. मुंबई में जमने के बाद वह अपनी बड़ी बेटी शीना को अपनी बहन बता कर मुंबई ले आई. पीटर से उसने अपनी शादियों और पुराने इश्क की बातें छिपा रखीं थीं. जाहिर है, पीटर को केवल एक शादी और एक बेटी विधि का पता था.

इसीलिए बाद में जब पीटर के लड़के राहुल का शीना के साथ रिश्ता बन गया, तो इंद्राणी नाराज हो गई. पर इसके पीछे इंद्राणी की नैतिकता नहीं, बल्कि उसका स्वार्थ था. इससे  INX नेटवर्क में उसके मालिकाना हक की स्थियां बदल सकतीं थीं. इधर हाई प्रोफाइल लॉन्चिंग और मीडिया में जोरदार प्रचार के बावजूद  INX नेटवर्क ने ब्रॉडकास्ट बाजार में कोई अहम मौजूदगी दर्ज करा पाने में कामयाबी हासिल नहीं की. इसी वक्त, इंद्राणी का मशहूर पत्रकार वीर सांघवी के साथ झगड़ा सतह पर आ गया. सांघवी ने INX न्यूज वेंचर बतौर सीईओ ज्वाइन किया था, लेकिन एक चेयरपर्सन के तौर पर इंद्राणी कमान अपने हाथ में चाहती थी. सांघवी की उनके साथ लड़ाई स्वतंत्रता के लिए ही थी.

अव्यवस्था और वित्तीय कुप्रबंधन की वजह से 2009 में मुखर्जी गुट को पीछे हटना पड़ा. कहते हैं, इस बीच इंद्राणी का शीना के साथ राहुल से उसके रिश्तों को लेकर झगड़ा काफी बढ़ गया. 2012 में एक रोज इंद्राणी ने अपने और शीना के बीच जारी विवाद को सुलझाने के बहाने शीना को बांद्रा में मिलने के लिए बुलाया, फिर अपनी कार में बैठा लिया. कार में ड्राइवर श्याम मनोहर राय के अलावा उसका दूसरा पति संजीव खन्ना भी बैठा था. इन सबने मिलकर पहले तो गला दबा कर शीना की हत्या कर दी. बाद में उसके टुकड़े-टुकड़े कर बोरे में बंद कर मुंबई से करीब 103 किलोमीटर दूर ले जा कर रायगढ़ जिले के जंगल में जला दिया. 2 मई, 2012 को रायगढ़ पुलिस को एक महिला की अधजली लाश के कुछ हिस्से मिले भी. पुलिस ने मरने वाली की शिनाख्त करने की कोशिश की, मगर कोई फायदा नहीं हुआ. शिनाख्त ना होने और कोई सबूत ना मिलने की वजह से रिपोर्ट लिखने के बाद पुलिस ने अधजली लाश का अंतिम संस्कार कर दिया.

इधर इंद्राणी लोगों को बताती रहती कि शीना अमेरिका में पढ़ने गई है. 21 अगस्त, 2015 को तब तक सब कुछ सही चलता रहा, जब तक मुंबई पुलिस ने 43 साल के श्याम मनोहर राय नाम के एक शख्स को गिरफ्तार नहीं कर लिया. राय को अवैध रूप से पिस्टल रखने के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया. पुलिस ने जब उससे पूछताछ की, तो राय ने अचानक बताया कि वह पहले भी कई जुर्म कर चुका है. इनमें 2012 में किया गया एक मर्डर भी शामिल था.

उसने यह भी बताया कि मर्डर करने के बाद उसने लाश को रायगढ़ के जंगलों में जला और दफना दिया था. इस सूचना पर मुंबई पुलिस ने जब रायगढ़ पुलिस से संपर्क किया, तो पता चला कि मई 2102 में सचमुच एक महिला की जली हुई लाश के कुछ हिस्से मिले थे. इसी के बाद मुंबई पुलिस की एक टीम फौरन रायगढ़ रवाना हो जाती है. वहां राय की बताई जगह पर खुदाई की जाती है, तो पता चलता है कि राय सच बोल रहा है. खुदाई में एक महिला की लाश के कुछ और हिस्से मिलते हैं. इसके बाद मुंबई पुलिस राय से जब और सख्ती से पूछताछ करती है, तब वह पहली बार बताता है कि कुछ वक्त पहले तक वह पीटर मुखर्जी की पत्नी इंद्राणी मुखर्जी का ड्राइवर था, और इंद्राणी के कहने पर ही उसने शीना बोरा नाम की एक महिला का कत्ल कर लाश को रायगढ़ के जंगल में दफना दिया था.

राय के खुलासे और शुरूआती सबूत हाथ आते ही पुलिस ने इंद्राणी मुखर्जी को मुंबई में उनके घर से गिरफ्तार कर लिया. पहले तो इंद्राणी न सिर्फ राय के इल्‍जामों से इनकार करती रही, बल्कि यही कहती रही कि शीना उसकी बहन है और तीन साल से अमेरिका में रह रही है. मगर जब राय से उसका सामना कराया गया, तो आखिरकार वह टूट गई, और कत्ल की बात उसने कबूल कर ली.

पुलिस के मुताबिक रिश्ते के अलावा इस कत्ल के पीछे पैसा भी एक मकसद हो सकता है.  इस बीच पुलिस ने इंद्राणी के पूर्व पति संजीव खन्ना को भी कोलकाता से गिरफ्तार कर लिया. शीना मर्डर केस में हो रहे खुलासों से फिल्मों के सस्पेंस को भी पीछे छोड़ दिया है. दुनिया के सामने शीना इंद्राणी की बहन थी, लेकिन शीना की मौत के बाद पता चला कि दरअसल, इंद्राणी तो शीना की मां थी. कत्ल की यह वारदात जितनी उलझी और पेचीदा है, इसके खुलने का मामला भी उतना ही हैरतअंगेज़. बस यूं समझ लीजिए कि पुलिस कुछ और तलाश करने निकली थी और अचानक उसके हाथ शीना की मौत का सच लग गया.

पर कुछ सवाल अब भी हैं? आखिर तीन साल तक शीना कैसे ग़ायब रही? तीन साल तक इंद्राणी ने पुलिस में रिपोर्ट क्यों नहीं लिखाई? तीन साल तक इंद्राणी झूठ क्यों बोलती रही कि शीना अमेरिका में है? शीना और उसके भाई का असली पिता आखिर कौन है? फिर क्यों और कैसे इंद्राणी का दूसरा पति, जिसे उसने तलाक दे रखा था, अपनी सौतेली बेटी की हत्या की साजिश में शामिल होने के लिए तैयार हो गया? अगर यह केवल उसकी अपनी बेटी विधि के आर्थिक हितों के लालच में था, तो उसे तो पहले ही पीटर ने गोद ले रखा था. फिर शीना की हत्या के बाद से अचानक संजीव के पास पैसों का अंबार कैसे लग गया? इंद्राणी केवल पीटर को धोखा दे रही थी, संजीव को या सभी को?

इसी तरह शीना का सगा भाई अभी तक अपनी बहन के गायब होने पर चुप क्यों था? यहां तक की शीना का प्रेमी और पीटर का बेटा, जो अपने प्रेम की दुहाई देते नहीं थक रहा, शीना की गुमशुदगी पर चुप क्यों रह गया? कैसे एक सामाजिक रूप से सक्रिय, आर्थिक रूप से सक्षम, नौकरीशुदा, एकजवान लड़की अचानक से गायब हो जाती है, बिना किसी को खोज खबर दिए, और कोई इसकी परवाह नहीं करता? यह आर्थिक रूप से संपन्न पर संवेदना के तौर पर विपन्न उस समाज के मुंह पर भी एक तमाचा है, जो अपने को कथित रूप से सोशलाइट कहता है, पर जहां किसी को किसी की परवाह या खबर नहीं.

मुंबई, दिल्ली और गुड़गांव की ऐसी सोशलाइट पार्टियों के एक परमानेंट मेंबर का कहना है कि इन शहरों की लेट नाइट पार्टियों में न जाने ऐसी कितनी इंद्राणी और शीना रोज जुड़ती हैं, और फिर अचानक से गायब हो जाती हैं. यह समाज ही ऐसा है, जहां न तो कोई ईमान है, न ही नैतिकता. कार की चाबियों के साथ बीवियों की अदला-बदली तो अब पुराना खेल है. अब महिलाएं खुद अपनी आजादी के नाम पर पति को घर छोड ऐसी पार्टियों की शोभा बनती हैं, मौज-मस्ती और फन के नाम पर रोज नए रिश्ते बनाती हैं, बिजनेस के फलसफे गढ़ती हैं और एक दिन इंद्राणी-शीना के रूप में चर्चा का सबब बनती हैं. जाहिर है, इंद्राणी के इस पतन के लिए उसके प्रेम में अंधा उसका वर्तमान पति पीटर भी कम जिम्मेदार नहीं है, क्योंकि उसने कभी भी अपने स्तर से सचाई जानने की कोशिश नहीं की. वह अभी भी कह रहा, कि उसके पास अपनी पत्नी पर अविश्वास करने की कोई वजह नहीं थी.

आंख के अंधे को तो राह तब भी सुझाई जा सकती है. मन के अंधे को कोई राह दिखाए तो कैसे? यहां इंद्राणी और पीटर मुखर्जी, केवल व्यक्ति भर नहीं, उस समाज, और सामाजिक व्यवस्था के प्रतिनिधि भी हैं, जहां रिश्तों का कोई अर्थ नहीं, और जहां जिंदगी फन और स्वार्थ के आगे ठहर सी जाती है, और कभी-कभी तो असमय खत्म भी... शीना भले ही हमारी आपकी कुछ नहीं, पर उसे भी जीने का हक था. उसकी इस तरह की मौत...श्रद्धांजलि!

नोटः चित्रगुप्त की खाताबही को भी मात दे देने वाले 'शीना हत्याकांड' में जितनी तेजी से रोज तथ्य बदल रहे हैं, उसमें यह संपादकीय किसी भी तरह की शत-प्रतिशत तथ्यात्मक शुद्धि का दावा नहीं करता. बेतरह उलझे इस हत्याकांड की असली सचाई, या तो इस कांड में शामिल मास्टर माइंड को पता होगा या फिर ईश्वर को. मुंबई पुलिस कोशिश कर रही है, पर असल अपराधी कौन है, कितने हैं, और क्यों हैं, कहना मुश्किल. फिलहाल हमारा उद्देश्य कानूनी दांव-पेंच से अलग उन सामाजिक, मानवीय संदर्भों को उठाना था, जिनके चलते ऐसी घटनाएं घटतीं हैं. कृपया इसे अपराध और सत्य कथा के रूप में न लेकर इसी रूप में लें.- संपादक
जय प्रकाश पाण्डेय
जय प्रकाश पाण्डेय 14 साल की उम्र से अख़बारों में लेखन शुरू कर देने वाले जय प्रकाश पाण्डेय ने राजनीति विज्ञान से स्नातकोत्तर और पत्रकारिता सहित 8 विषयों से स्नातक की डिग्री हासिल की और पत्रकारिता के अपने जुनून के चलते डॉक्टरेट अधूरा छोड़ दिया। दिल्ली में एक समाचार एजेन्सी के कार्यकारी संपादक, और एक बड़े पत्रिका समूह के प्रकाशकीय संपादक बने। हर विषय पर लिखा और चर्चित हुए। फिलहाल, आन लाइन मीडिया के चर्चित पोर्टल समूह 'फेस एन फैक्ट्स' के प्रबंध संपादक और ड्रीम प्रेस कंसलटेंट्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं।

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