Wednesday, 17 July 2019  |   जनता जनार्दन को बुकमार्क बनाएं
आपका स्वागत [लॉग इन ] / [पंजीकरण]   
 

फेड हो रहा ब्रांड मोदी !

फेड हो रहा ब्रांड मोदी ! साहब चुप हैं. क्योंकि इस बार दोनों ही तरफ से दांव पर उनके अपने हैं. बड़े मोदी चाह कर भी छोटे मोदी से जुड़ी कंट्रोवर्सी को दबवा नहीं पा रहे हैं. छोटे मोदी, यानी ललित मोदी! कौन है यह ललित मोदी? आसमान से टपका या इसी देश की भ्रष्ट माटी की पैदावार है यह? हर दिन कोई एक नया नाम, हर दिन कोई एक नया खुलासा. पकड़ लिए जाने पर कुछ दिनों का हो-हल्ला और फिर सब कुछ शांत.

कितनों को अभी याद है चारा या अलकतरा घोटाला, कितनों को याद है ताबूत घोटाला, कोल ब्लॉक, बोफोर्स और अलकतरा घोटाला? अच्छा इन्हें छोड़िए, यह बताइए कि अभी कितनों को याद हैं जयललिता की साड़ियां, या फिर कितनों को याद हैं ए राजा और कनीमोझी, या कि हजारों करोड़ रुपए की प्रापर्टी तो मारन बंधुओं ने केवल करुणानिधी के रसूख से कमा लीं.

यही नहीं यूपी और बिहार का ताकतवर यादव परिवार हो, बहन जी हों या हरियाणा के चौटाला और पंजाब के बादल, मुझे तो नहीं लगता कि इनमें से किसी ने कभी पैसे की कोई खेती की थी, या रुपयों के पेड़ लगाए थे, पर इनकी समृद्धि की तो छोड़िए, इनके चेले-चाटियों तक के पास के धन के अंबार का भी पूछना ही क्या? खेती तो तब भी धोखा दे जाती है, पर इनकी धन और ताकत की उपज है कि कमती ही नहीं कभी!

इसीलिए ऐसे खुलासों पर अब अचरज नहीं होता, या तो दुख होता है या फिर आक्रोश उपजता है. इसीलिए ललित मोदी प्रकरण के खुलासे के बाद यह सवाल पूछने को मन हो रहा कि ललित मोदी ही क्यों? हाजी मस्तान से शुरू कर दाऊद तक पहुंचें, या फिर धीरेंद्र ब्रह्मचारी से होते हुए चंद्रास्वामी तक आएं. राजन पिल्लै, हर्षद मेहता, अब्दुल करीम तेलगी, राजू राम लिंगम, पोंटी चड्ढा जैसे नाम तो उंगलियों पर गिने जा सकते हैं, पर अपने आसपास ही देख लीजिए, कल तक साइकिल से चलने वाले अब महंगी ऑडी और मर्सीडीज की बात करते हैं.

इतना ही नहीं, अपने यहां के क्लर्क, सिपाही तक लखपति-करोड़पति हैं. आज के दौर में दरिद्र वही है, जो ईमानदार है, वरना हर ओर कोई ललित मोदी, हर तरफ उसका या उसकी  मददगार कोई सुषमा या वसुंधरा. नाम और शक्लें भले बदल जाएं, पर आगे बढ़ने और सफलता पाने के तौर तरीकों में कोई बदलाव नहीं. एक बेहद अदना सा आदमी राजनीति या सरकारी नौकरी में घुसता है, दलाली में हाथ डालता है, और फिर देखते ही देखते पैसों का अंबार लगा लेता है.

जिसकी जितनी हैसियत, उतनी कमाई करता है. बड़ा हुआ तो पैसों का महल, नहीं तो कोठी और फ्लैट तो कहीं गए नहीं. सियासत एक इंडस्ट्री है और दलाली उससे पैसा कमाने का हथियार. क्षमा करें, अपने तमाम पत्रकार भाई भी इस जमात में घुसने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं, और कुछ तो घुस भी गए हैं. उनका नाम क्या लेना, आप सब वाकिफ होंगे उनसे...

मजे की बात तो यह कि जब यह सब कुछ हो रहा होता है, तब हमारा सिस्टम या तो उसको बढ़ावा देकर उससे लाभ ले रहा होता है, या फिर हाथ पर हाथ धरे बैठा रहता है. इस बीच अपने दायरे में ऐसे लोगों का कद इतना बड़ा हो जाता है कि उनपर कोई हाथ डालने की सोच भी नहीं सकता, और अगर कोई सोचता भी है, तो पैसों के दम पर तो कानून के जानकारों, चाटुकारों और प्रोपेगंडा करने वालों की ऐसी भीड़ खड़ी कर दी जाती है कि हाथ उठाने वाला सिस्टम ही त्राहिमाम-त्राहिमाम कर उठे.

यह सारी कहानी उलझती या उछलती तब है, जब दो कॉरपोरेट घरानों के लाभ या दो सियासी गुटों के इंटरेस्ट आपस में टकराने लगते हैं. सहारा समूह के मालिक सुब्रत राय इसी तरह के टकराव का नतीजा भुगत रहे हैं. ललित मोदी मामले में भी यही हुआ. टाइम्स नाऊ को पिछले साल जुलाई की गतिविधियों का इलहाम अभी क्यों हुआ, वह भी तब जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के एक साल पूरे होने पर  तमाम मीडिया सर्वे ने सुषमा स्वराज को मोदी मंत्रीमंडल का पहले नंबर का सक्सेस्फुल मंत्री करार दिया.

आखिर पार्टी नेता रहे कीर्ति आजाद की इस बात में कुछ तो दम होगा कि सुषमा का नाम उछलने के पीछे पार्टी में छिपे आस्तीन के सांपों का हाथ है. क्या यह घोषित तथ्य नहीं कि ललित मोदी की मदद के हंगामें में फंसी सुषमा स्वराज और वसुंधरा राजे सिंधिया भले ही अभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करती न अघाती हों, पर हैं तो उनके विरोधी खेमे की ही...और आज जब ललित मोदी की मदद के खुलासे में ये दोनों फंसी हैं, तो इनकी इमेज गिरने से सीधा लाभ किसे मिलेगा?  सवाल ढेरों हैं, पर उनका उत्तर किसी के पास नहीं.

मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी ललित मोदी ने साल 1993 में मोदी ने 10 साल की अवधि के लिए वॉल्ट डिज्नी पिक्चर्स के साथ मिलकर साझा वेंचर शुरू किया था, जिसका नाम था, 'मोदी एंटरटेनमेंट नेटवर्क.' यह नेटवर्क डिज्नी के कंटेंट को भारत में प्रसारित करता था. इसमें फैशन टीवी भी शामिल था. वसुंधरा राजे सिंधिया के राजस्थान के 2003-2008 के पहले शासनकाल में ललित मोदी राज्य में सत्ता के अहम केंद्र हो गए थे. हालत यह थी कि प्रदेश के ब्यूरोक्रेट्स ललित मोदी के सामने पानी भरते थे.

साल 2005-2006 में मोदी ने जयपुर के बेहद मंहगे और मशहूर रामबाग पैलेस होटल को एक तरह से अपना घर बना लिया था. वह भी सिर्फ इसलिए, क्योंकि यहां से सिर्फ सड़क पार करने पर सवाई मान सिंह क्रिकेट स्टेडियम था, जहां क्रिकेट एसोसिएशन दफ्तर था. आमेर कंस्ट्रक्शन कंपनी नाम की एक कंपनी ने साल 2006 में जयपुर से सटे आमेर में कई हवेलियां खरीदीं और बाद में इसे आनंद हेरिटेज होटल ग्रुप में मिला दिया गया. ललित मोदी और उनकी पत्नी मीनल इस कंपनी के बोर्ड में हैं.

ललित मोदी पर ईडी ने दो केस दर्ज कर रखे हैं. पहला, मॉरीशस की कंपनी वर्ल्ड स्पोर्ट्स ग्रुप को आईपीएल का सवा चार सौ करोड़ का ठेका दिया था. बाद में यही ठेका वर्ल्ड स्पोर्ट्स ग्रुप से एमएसएम कंपनी को ट्रांसफर किया गया. आरोप है कि इसी में ललित मोदी ने 125 करोड़ रुपए कमीशन लिए. और दूसरा आरोप. 2009 में दक्षिण अफ्रीका में हुए आईपीएल के पेमेंट में गड़बड़ी का है. 2010 में आईपीएल के बाद ललित मोदी को आईपीएल कमिश्नर के पद से और बीसीसीआई से भी निलंबित कर दिया गया. 2010 से ही ललित मोदी लंदन में रह रहा है. प्रवर्तन निदेशालय ने मोदी के खिलाफ लाइट ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया हुआ है.

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया से दोस्ताना संबंध रखने वाले ललित मोदी अब दावा कर रहे हैं कि वसुंधरा ने ब्रिटेन में ट्रैवल डॉक्युमेंट हासिल करने के लिए उनके ऐप्लिकेशन पर हस्ताक्षर कर समर्थन किया था. ललित मोदी के समर्थन में वसुंधरा पर यह बयान देने का आरोप है कि, 'सिविल लाइन्स 13 जयपुर, राजस्थान, भारत से मैं वसुंधरा राजे. मैं यह बयान ललित मोदी के लिए किसी भी इमिग्रेशन ऐप्लिकेशन के समर्थन में दे रही हूं, लेकिन इसके लिए एक सख्त शर्त है कि इंडियन अथॉरिटीज को पता नहीं चलना चाहिए.'

ललित मोदी ने एक इंटरव्यू में यह भी माना है, कि किसी को ये नहीं पता है कि वसुंधरा राजे ही मेरी पत्नी मीनल को साल 2013 और 2014 में दो बार पुर्तगाल ले गईं. वसुंधरा राजे के साथ मेरे 30 साल पुराने रिश्ते हैं. वो खुले तौर पर ब्रिटेन में मेरे एमिग्रेशन एप्लिकेशन के लिए गवाही देने के लिए तैयार थीं, लेकिन दुर्भाग्यवश जब केस पर सुनवाई शुरू हुई, तो वो राजस्थान की मुख्यमंत्री बन चुकी थीं, इसलिए वो गवाही देने ब्रिटेन नहीं आ पाईं.

ललित मोदी ने वसुंधरा राजे के बेटे और बीजेपी सांसद दुष्यंत सिंह की कंपनी में साढ़े ग्यारह करोड़ रुपए डाले थे. दिलचस्प बात यह है कि वसुंधरा राजे ने ललित मोदी से पारिवारिक रिश्ते की बात तो मानी है लेकिन ब्रिटेन में ललित मोदी के रहने के लिए लिखित गवाही देने की बात से उन्होंने इनकार किया है.

इसी तरह सुषमा स्वराज भी अब ललित मोदी से संपर्क की बात मान चुकी हैं और मानवीय आधार उस की मदद की बात स्वीकारती हैं, पर सवाल उठ रहे हैं कि विदेश मंत्री रहते हुए उन्हें एक भगोड़े आरोपी को देश में वापस लाने की कोशिश करनी चाहिए थी या उसकी मदद करनी चाहिए थी.  अब यह खुलासा हो चुका है कि सुषमा की बेटी बांसुरी उस टीम का हिस्सा थी, जिसने हाईकोर्ट में ललित मोदी के पासपोर्ट का केस लड़ा और जीता था. बांसुरी स्वराज केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज और वरिष्ठ वकील स्वराज कौशल की इकलौती संतान हैं.

ललित मोदी ट्विटर पर अपनी ऐशो-आराम की जिंदगी वाली तस्वीरें लगातार डालता रहा है, जिसमें हॉलीवुड की पेरिस हिल्टन और नाओमी कैम्पबेल तो बॉलीवुड के शाहरुख से लेकर प्रीति जिंटा तक शामिल हैं. आईपीएल की बदौलत भी उसने बहुत सारे संबंध कमाए, जिनमें राजीव शुक्ला, शरद पवार, प्रफुल्ल पटेल, वसुंधरा राजे, सुषमा स्वराज और उनके पति स्वराज कौशल से उसकी करीबियों की बात अब खुल चुकी है. नाम तो कई और भी हैं, तो अब किस किस की जांच कराओगे?
जय प्रकाश पाण्डेय
जय प्रकाश पाण्डेय 14 साल की उम्र से अख़बारों में लेखन शुरू कर देने वाले जय प्रकाश पाण्डेय ने राजनीति विज्ञान से स्नातकोत्तर और पत्रकारिता सहित 8 विषयों से स्नातक की डिग्री हासिल की और पत्रकारिता के अपने जुनून के चलते डॉक्टरेट अधूरा छोड़ दिया। दिल्ली में एक समाचार एजेन्सी के कार्यकारी संपादक, और एक बड़े पत्रिका समूह के प्रकाशकीय संपादक बने। हर विषय पर लिखा और चर्चित हुए। फिलहाल, आन लाइन मीडिया के चर्चित पोर्टल समूह 'फेस एन फैक्ट्स' के प्रबंध संपादक और ड्रीम प्रेस कंसलटेंट्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं।

वोट दें

क्या विजातीय प्रेम विवाहों को लेकर टीवी पर तमाशा बनाना उचित है?

हां
नहीं
बताना मुश्किल
 
stack