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वे आपको नहीं, आपके लालच को लूट रहे

जय प्रकाश पांडेय , Jun 01, 2011, 1:52 am IST
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फ़ॉन्ट साइज :
वे आपको नहीं, आपके लालच को लूट रहे पिछले हफ्ते घोटाले की एक बड़ी खबर मीडिया में आई और हवा हो गई. मामला कोई छोटा- मोटा नहीं था. तकरीबन 19 लाख लोगों से करीब 2090 करोड़ रूपए से ज्यादा के लेन-देन का था. हुआ यों कि स्पीक एशिया नाम से कारोबार करने वाले कुछ बेहद शातिर लोगों ने 11 हजार रुपये में इंटरनेट पर एक आईडी देनी शुरू की और दावा किया कि वह हर सप्ताह आईडी से जुड़े सदस्यों को 2 सर्वे भेजा करेगी. हर सर्वे को भर कर भेजने पर 10 डॉलर मिलेंगे.

अगर मोटे हिसाब में कहें तो हर सप्ताह 10 डॉलर के हिसाब से हर आईडी वाले को हर महीने 4000 रुपये तक मिल सकते थे, अगर वह खुद सर्वे भरे.  अगर आईडी वाला खुद अपना काम नहीं करना चाहता, तो उसका सीनियर ( वे लोग जो ऐसी चेन में कंपनियों के शुरुआती एजेंट होते हैं और बाद में अपने मुनाफ़े के लिए बढ़-चढ़ कर उसी कंपनी के लिए दलाली शुरू कर देते हैं) अपना कमीशन 1000 रुपये लेकर किसी भी आईडी का सर्वे  भर देगा..., और इस तरह केवल 11000 लगाकर हर महीने बिना कुछ किए धरे हर आईडी पर 3000-4000 रुपये महीने की कमाई.

आज कल की महंगाई, टैलेंट, प्रतियोगिता, योग्यता, भागदौड़ और मेहनत के दौर में बैठे- ठाले कहां होती इतनी और ऐसी कमाई. 11 हजार लगाकर केवल साल भर में 36000 से 48000 यानी 310%/ 410 % का मुनाफा. तेजी से पैसा बनाने की नीयत रखने वालों ने इसे एक बड़ा मौका माना. ऐसे लोगों को कंपनी ने यह छूट भी दे रखी थी कि कोई भी व्यक्ति 7 से 21 आईडी तक ले सकता है।  बस फिर क्या था, स्पीक एशिया की चल निकली. मुफ्त की कमाई के इस धंधे में लोग ईमानदारी क्या बरतते, जो ज्यादा चालाक थे उन्होंने ज्यादा आईडी ली. नौकर-चाकर, कुत्ते-बिल्ली सबके नाम से. कुछ लोगों ने 100 आईडी तक ले रखे थे।

बिना यह बताये कि इतना भारी भुगतान कर सर्वे करवाने वाली कंपनियां कौन सी हैं और उनके साथ किए गए करार क्या हैं? फिर कंपनी एक ही व्यक्ति को एक से अधिक आईडी दे रही है, तो सर्वे की प्रमाणकिता क्या रह जाती है? अपनी बात को सच साबित करने के लिए स्पीक एशिया ने हर इलाक़े में चुन-चुनकर शुरू में 10 में से एक और बाद में 100 से एक-दो को उनका पैसा भी भेजा. पहले साख बनाई और हज़ारों करोड़ लूटे और फिर अचानक से सिंगापुर में अपने खाते के बंद होने का हवाला देकर चंपत हो लिया. जब मीडिया में शुरुआती हल्ला मचा, तो स्पीक एशिया ने कहा था कि आईसीआईसीआई, बाटा, एयरटेल, नेस्ले उसके ग्राहक हैं, पर यह तथ्य झूठ पाए गए.

आलम यह था कि भोपाल में हाल ही में काम शुरू करने वाली इस कंपनी ने तकरीबन 40 हजार लोगों को कम से कम 40 करोड़ रूपए से अधिक का चूना लगाया। बात जैसे-जैसे खुल रही है, रकम और सदस्यों की गिनती बढ़ेगी. पर लूटने और लुटने वाले दोनों ही निश्चिंत हैं. स्पीक एशिया की ही तर्ज पर एक ' राम सर्वे' है. इनकी दुकान यानी सदस्यता तो महज 3500 रुपयों से ही खुल जाती है. उस पर हर हफ्ते 500 की कमाई. अभी इन्होंने शटर बंद नहीं किया है. लोग लगे हैं, अमीर बनने को. अगर कोई खुद लुटने को तैयार है तो जिसके पास दिमाग़ है वह लूटेगा क्यों नहीं. इसीलिए स्पीक एशिया के मसले पर वह हल्ला नहीं मचा जो मचना चाहिए था.

वजह साफ है, ऐसे लोगों से क्या सहानुभूति बरती जाए. जो खुद की योग्यता पर कम, अवसरों पर ज्यादा जीते हैं. जो घर- परिवार, बीवी -बच्चे, रिश्तेदार-नातेदार ही नहीं, माता-पिता तक के लिए पैसे खरचने को तैयार नहीं, यहां तक की खुद के लिए भी क्राइसिस बनाकर रखते हैं, पर ज़्यादा कमाई के लालच में दिमाग़ ताक पर रख देते हैं. जेबीजी समूह, कुबेर समूह, नवभारत समूह, टीकवुड प्लान आज कहां हैं? अख़बार निकालने, टीवी चैनल चलाने, पत्रिकाएं निकालने, क्रिकेट टीमें खरीदने जैसे हर कारोबार में ऐसे दिमाग़ वालों का दखल है. जो 10 लगाकर 20 साल में 20000 की कमाई, हर दिन 10 रुपये की उगाही से लखपति बना देने से लेकर, शेयर बाजार में लाख इनवेस्ट कर करोड़ और करोड़ इनवेस्ट कर अरब की कमाई का लालच देते हैं.

यह देश, यहां का माहौल, सब कुछ जल्दी से पा लेने और जल्दी से भूल जाने की मानसिकता, और नहीं तो जैसा है वैसा स्वीकार कर लेने की हमारी प्रवृत्ति से ही हर्षद मेहता, तेलगी, बलवा, राजा, रादिया और स्पीक एशिया पनपते हैं. राजनेता, अफसर, पंडा-पुरोहित से लेकर सड़क का रिक्शा वाला, सब्जी-ठेला वाला हर कोई या तो लूट रहा या लुट रहा. सवा पाव लड्डू में भगवान को पटाकर अपनी किस्मत चमका लेने की मानसिकता वाले देश में ये सब रोजमर्रा की बातें हैं, इसलिए चौंकना क्या?
जय प्रकाश पाण्डेय
जय प्रकाश पाण्डेय 14 साल की उम्र से अख़बारों में लेखन शुरू कर देने वाले जय प्रकाश पाण्डेय ने राजनीति विज्ञान से स्नातकोत्तर और पत्रकारिता सहित 8 विषयों से स्नातक की डिग्री हासिल की और पत्रकारिता के अपने जुनून के चलते डॉक्टरेट अधूरा छोड़ दिया। दिल्ली में एक समाचार एजेन्सी के कार्यकारी संपादक, और एक बड़े पत्रिका समूह के प्रकाशकीय संपादक बने। हर विषय पर लिखा और चर्चित हुए। फिलहाल, आन लाइन मीडिया के चर्चित पोर्टल समूह 'फेस एन फैक्ट्स' के प्रबंध संपादक और ड्रीम प्रेस कंसलटेंट्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं।

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