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आदर्श
इसलिए स्वीकारे गए अन्ना !  जनता जनार्दन संवाददाता ,  Aug 30, 2011
अन्ना में दोहरा चरित्र नहीं दिखता, जो उसे आज अपने जन प्रतिनिधियों में नजर आता है। जनप्रतिनिधि कहते कुछ हैं और करते कुछ हैं, चेहरे पर मक्कारी साफ झलकती है। ईमानदारी कम। अन्ना इस भीड़ में अकेले हैं। उनकी सादगी और ईमानदारी उनको नैतिक बल देती है। वह शारीरिक सत्ता के नहीं, आध्यात्मिक सत्ता के स्वामी प्रतीत होते हैं। बिल्कुल उसी तरह, जैसे गांधीजी थे। या फिर आजादी के बाद जेपी में लोगों को इसकी झलक मिली थी। ....  लेख पढ़ें
अन्ना साहब के लिए एक यथार्थवादी पत्र जनता जनार्दन संवाददाता ,  Aug 23, 2011
आदरणीय अन्ना साहब, आपको और आपके द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए गए मुहिम को मेरा नमस्कार। ईश्वर उन सबको सदबुद्धि दे जो पिछले 16 अगस्त से आपकी आवाज में आवाज मिला रहे हैं और एक यथार्थवादी मुद्दे को रोमांटिक बनाने की कोशिश कर रहे है। यदि भ्रष्टाचार के खिलाफ लोगों में इतनी चेतना होती तो सिर्फ मेट्रो चलाने के आधार पर जनता तीसरी बार दिल्ली में शीला दीक्षित को वोट नहीं देती। जबकि दिल्ली के मुख्यमंत्री ने अपने पर्स से निकाल कर मेट्रो को खैरात में नहीं दिया था। ....  लेख पढ़ें
जान देने की रुत रोज आती नहीं... जनता जनार्दन संवाददाता ,  Aug 23, 2011
प्रख्यात गांधीवादी अन्ना हजारे के आन्दोलन की कामयाबी और लोगों के उससे जुड़ते चले जाने के पीछे देशभक्ति का वह जज्बा है, जो अब से पहले अमूमन देश पर हुए विदेशी हमलों के वक्त ही देखा गया. यह एक ऐसा आन्दोलन है, जो स्वत: स्फूर्त है, और लोगों के मन और दिलों पर बस एक ही धुन है,'जिंदा रहने के मौसम बहुत हैं मगर, जान देने की रुत रोज आती नहीं...'। ....  लेख पढ़ें
आप भी अन्ना हज़ारे बनिए जनता जनार्दन संवाददाता ,  Aug 20, 2011
अन्ना हज़ारे का विरोध क्यों ? कौन हैं ये विरोधी ? वही जो भ्रष्टाचार का अर्थ नहीं समझते हैं या जो भ्रष्टाचार से प्रभावित नहीं हैं ? हर एक व्यक्ति अगर खुद ईमानदार है, विवेकी है, नि:स्वार्थी है … किसी भी आंदोलन की कोई जरूरत कभी न हो। पर आज जब सत्ता पर काबिज नब्बे प्रतिशत मंत्री भ्रष्टाचार में लिप्त है, तो सिर्फ एक दो ईमानदार व्यक्तियों को ऊँची कुर्सी पर बैठाकर, जिनमें हमारे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी शामिल हैं, यह उम्मीद करना की इससे देश में बेईमानी नहीं रहेगी, बेवकूफी ही थी . इससे ज्यादा विडंबना क्या होगी की उन्ही के राज में सबसे ज्यादा घोटाले हुए, महंगाई की मार सबसे ज्यादा लोगों को झेलनी पड़ी, विदेश में भी हमारा सिर शर्म से झुका। ....  लेख पढ़ें
 बैसवारा का महानायक: राणा बेनी माधव जनता जनार्दन संवाददाता ,  Jun 22, 2011
राणा बेनीमाधव आज भी इस अंचल में घर-घर याद किए जाते हैं और लोगों के दिलों में रचे बसे हैं। लेकिन यह स्थानीय निवासियों के लिए कम पीड़ा की बात नहीं है कि रायबरेली की सांसद और यूपीए की मुखिया जिस सोनिया गांधी के जबान खोलते ही बड़े बड़े कारखाने लग जाते हैं, करोड़ों की परियोजना रायबरेली पहुंच जाती है, उनको राणा की याद की फुरसत नहीं है। अगर होती तो वह वायदा करने के बाद कम से कम राणा की याद में एक स्मारक डाक टिकट तो जारी ही करा सकती थीं। कैसे-कैसे लोगों पर डाक टिकट इस समय जारी हो रहे हैं, यह तो वे जान ही रही हैं। ....  लेख पढ़ें
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