किताबें
बाजार पर छाते लेखक अंनत विजय ,  Aug 17, 2014
अपनी किताब 'वन लाइफ इज नॉट एनफ' के विमोचन के मौके पर पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने एलान किया कि उनकी किताब की करीब पचास हजार प्रतियां बिक चुकी हैं । किताब के विमोचन के पहले पचास हजार प्रतियां बिक जाना मामूली घटना नहीं है । नटवर सिंह ने इसके लिए इशारों इशारों में सोनिया गांधी के सर सेहरा बांधा । दरअसल नटवर सिंह की किताब के रिलीज होने के तकरीबन दस दिनों पहले ये खबर आई थी कि सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी नटवर सिंह से मिलने उनके घर गईं थी । इस मुलाकात में प्रियंका ने छपने वाली किताब के बारे में दरियाफ्त की थी । ....  लेख पढ़ें
गांधी की 'माई अर्ली लाइफ' का नया संस्करण प्रकाशित मधुश्री चटर्जी ,  Oct 02, 2012
महात्मा गांधी द्वारा लिखी गई पुस्तक 'माई अर्ली लाइफ' का नया संस्करण अब ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय प्रेस ने गांधी की 134वीं जयंती के मौके पर प्रकाशित की है, जिसका शीर्षक है 'माई अर्ली लाइफ : एक चित्रांकित कहानी'।महात्मा गांधी ने इसे 1932 में लिखा था।पुस्तक के सबसे पहले संस्करण का सम्पादन गांधी के सहयोगी महादेव देसाई ने किया था। ताजा संस्करण की टीकाकार गांधीवादी विशेषज्ञ ललिता जकारिया हैं। ....  लेख पढ़ें
बंटवारे के दर्द को बयां करती एक किताब... जनता जनार्दन संवाददाता ,  May 04, 2012
आजादी के बाद हिंदुस्तान के बंटवारे का दर्द झेलने वालों की टीस को कम करने और उस दौर की यादों को कविताओं, लेख, लघु कथाओं और वृतांतों के जरिये जिंदा करने के लिये एक किताब को पेश किया गया है। रूटलेज इंडिया द्वारा प्रकाशित बार्ब्ड वायर: बॉर्डर्स एंड पार्टिशन्स इन साउथ एशिया पुस्तक में भारत पाकिस्तान और बांग्लादेश के बंटवारे के दर्द के एहसास से इतिहास की गहराई में झांकने की कोशिश की गयी है। ....  लेख पढ़ें
पुस्तक मेले में छाए गांधी और कलाम जनता जनार्दन संवाददाता ,  Nov 15, 2011
पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में चल रहे 'राष्ट्रीय पुस्तक मेले' में पुस्तक प्रेमियों की पहली पसंद महात्मा गांधी और पूर्व राष्ट्रपति ए़ पी़ ज़े अब्दुल कलाम की पुस्तकें बनी हुई हैं। विदेशी लेखकों को भी बिहार के पुस्तक प्रेमी पसंद कर रहे हैं। ....  लेख पढ़ें
पुस्तक, जिसने अन्ना को सिखाया,' गरीबों की सेवा ही ईश्वर सेवा है' जनता जनार्दन संवाददाता ,  Aug 22, 2011
अन्ना का वास्तविक नाम किशन बाबूराव हजारे है। वह 1963 में 25 साल की उम्र में एक ड्राइवर के रूप में सेना में शामिल हुए थे। साल 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उनकी गाड़ी हवाई हमले की चपेट में आ गई थी और अन्ना के अलावा उस पर मौजूद सभी लोग मारे गए थे। इस घटना की उन पर गहरी छाप पड़ी और आध्यात्मिकता व जीवन-मरण के सवालों के प्रति उनकी जिज्ञासा बढ़ गई। वह इतने व्यथित हो गए थे कि आत्महत्या करने जा रहे थे, लेकिन तभी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर एक किताबों की दुकान से उन्हें स्वामी विवेकानंद की पतली सी पुस्तिका मिली। यहां से उनका जीवन बदल गया। ....  लेख पढ़ें
'..बेस्ट ऑफ खुशवंत सिंह' नए अवतार में   जनता जनार्दन संवाददाता ,  Aug 21, 2011
वरिष्ठ अंग्रेजी रचनाकार खुशवंत सिंह अपने प्रमुख संकलन 'नॉट ए नाइस मैन टू नो : द बेस्ट ऑफ खुशवंत सिंह' को एक नए अवतार में लेकर हाजिर हुए हैं। यह संकलन पहली बार 20 वर्ष पहले सिंह की 30 चुनिंदा रचनाओं के साथ प्रकाशित हुआ था। अब इसमें उनके 18 अतिरिक्त निबंधों, लघु कथाओं और विचारों को शामिल किया गया है। ....  लेख पढ़ें
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