राष्ट्रीय
आर्थिक आरक्षणः एक औचित्यपूर्ण बहस डॉ शशिकान्त पाण्डेय एवं डॉ अमित सिंह ,  Feb 03, 2019
यह स्पष्ट है कि सरकारी नौकरियों में निजीकरण की प्रक्रिया शुरू होने के उपरान्त काफी कमी आयी है अतः 10 प्रतिशत आरक्षण समस्या का समाधान नहीं है। यदि सरकार वास्तव में किसानों-नौजवानों की समस्याओं के प्रति गंभीर है तो उसे लुभावने वायदों से आगे बढ़कर कृषि, शिक्षा-व्यवस्था में ढ़ाँचागत बदलाव लाने की तरफ अग्रसर होना होगा। ....  लेख पढ़ें
प्रधानमंत्री जी! नीति आयोग के उपाध्यक्ष का जाना आपकी सरकार के लिए अच्छा संकेत नहीं अमूल्य गांगुली ,  Aug 06, 2017
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब तक समझ ही चुके होंगे कि निर्माण करने से विध्वंस करना ज्यादा आसान है। योजना आयोग को खत्म करने से पहले शायद ही उनकी रातों की नींद उड़ी हो। इसके विपरीत, इसे उनकी शख्सियत के अनुरूप एक निर्भीक कदम समझा गया। ....  लेख पढ़ें
हिंदुत्ववादियों के सामाजिक न्याय का नया मॉडल त्रिभुवन ,  Jul 23, 2017
कोली जाति के रामनाथ कोविंद के राष्ट्रपति और घांची जाति के नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बन जाने का साफ़ सा अर्थ यह है कि हिन्दुत्ववादी राजनीति के रणनीतिकारों ने भारी शिफ्ट किया है और अब वे जिस राह पर चल पड़े हैं, उसमें कम्युनिस्टों, समाजवादियों और कांग्रेसी लोगों के लिए संभावनाएं बहुत क्षीण पड़ गई हैं। वे अगर कोई क्रांतिकारी फार्मूला या रणनीति लेकर आगे नहीं बढ़ पाए तो इस राजनीतिक युद्ध में उनका पराभव सौ प्रतिशत तय है। ....  लेख पढ़ें
आकाशवाणी के 'मन की बात' कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उद्बोधन का मूल पाठ, 25 जून 2017 जनता जनार्दन संवाददाता ,  Jun 25, 2017
भगवान जगन्नाथ जी की यात्रा के अवसर पर मैं सभी देशवासियों को शुभकामनायें देता हूँ और भगवान जगन्नाथ जी के श्रीचरणों में प्रणाम भी करता हूँ। भारत की विविधता ये इसकी विशेषता भी है, भारत की विविधता ये भारत की शक्ति भी है। रमज़ान का पवित्र महीना सब दूर इबादत में पवित्र भाव के साथ मनाया। अब ईद का त्योहार है। ....  लेख पढ़ें
क्या नए राष्ट्रपति पर सर्वसम्मति संभव है? अमूल्य गांगुली ,  Jun 19, 2017
ऐसी पार्टी जो अपनी हेकड़ी के लिए जानी जाती है, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को लेकर विपक्षी दलों से संपर्क करना एक सुखद आश्चर्य है। हालांकि हो सकता है कि राष्ट्रपति चुनाव में पार्टी के पास बहुमत होने के कारण ही वह उदारता का प्रदर्शन कर रही है। इसके साथ ही सूचना और प्रसारण मंत्री वेंकैया नायडू विपक्षी दलों को यह याद दिला रहे हैं कि हालांकि वे 'लोकतंत्र की वास्तविक भावना' के तहत सलाह-मशविरा कर रहे हैं, लेकिन उन्हें याद रखना चाहिए कि "लोगों का जनादेश सरकार के साथ है।" ....  लेख पढ़ें
लालकृष्ण आडवाणी, बाबरी विध्वंस और सीबीआई की भूमिका अजय पुंज ,  Apr 22, 2017
जब इसी 8 मार्च को गुजरात के सोमनाथ में हुई एक विशेष बैठक में आडवाणी की मौजूदगी में मोदी ने आडवाणी का नाम राष्ट्रपति पद के लिए यह कहकर आगे किया कि उनकी तरफ से 'गुरुदक्षिणा' होगी, तो लगा कि सबकुछ ठीक हो गया है, लेकिन तभी सीबीआई की पहल पर आए इस आदेश के मायने बहुत लगाए जा रहे हैं. ....  लेख पढ़ें
शराबबंदी व बूचड़खानों पर रोक से रोजगार, कारोबार पर ग्रहण अमुल्य गांगुली ,  Apr 10, 2017
केंद्र सरकार के बाद देश के विभिन्न राज्यों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसके सहयोगी सरकारों के प्रसार के साथ न्याय एवं कानून व्यवस्था में भगवाधारी स्वयंसेवकों की सम्मिलित गतिविधियों में भी बढ़ोतरी दर्ज हुई है, जिसके कारण देश में रोजगार की समस्या के और गंभीर होने का खतरा भी पैदा हुआ है। ....  लेख पढ़ें
पेट्रोल दिनोंदिन महंगा, लुट रहे लोग, पर विपक्ष मौन! जनता जनार्दन डेस्क ,  Jan 24, 2017
फरवरी, 2013 में जो पार्टी विपक्ष में थी, आज वह सत्ता में है। याद है, उन दिनों राष्ट्रीय राजधानी में पेट्रोल की कीमत 69.06 रुपये पहुंच जाने पर कितना जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया था. विपक्षी पार्टियों, खासतौर से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे जनता के साथ 'विश्वासघात' बताया था, मगर मौजूदा विपक्ष महंगाई के मुद्दे पर खामोश है. ....  लेख पढ़ें
भारत के राजनीतिक या व्यावसायिक दल? जनता जनार्दन डेस्क ,  Jan 06, 2017
किसी भी राजनीतिक दल के गठन का एक ही उद्देश्य होता है, जनहित की रक्षा। जन-जन से जुड़े प्रत्येक मुद्दे को उठाना और उनको हल करवाना ही राजनीतिक दलों का मुख्य उद्देश्य होता है। इसी कारण राजनीतिक दलों को संचालित करने वाले जनप्रतिनिधि कहलाते हैं, यानी जो जनता का प्रतिनिधित्व करे, वही जनप्रतिनिधि कहलाता है। ....  लेख पढ़ें
क्या रुक पाएगी धर्म, नस्ल पर वोट बैंक की राजनीति ? जनता जनार्दन डेस्क ,  Jan 06, 2017
देश के सर्वोच्च न्यायालय का एक अहम फैसला आया है, जिसके अनुसार भारत में नस्ल, जाति और भाषा, धर्म के नाम पर वोट मांगना, भ्रष्ट आचरण माना जाएगा। निश्चित रूप से यह भारत जैसे विविधता और बहुसंस्कृति वाले देश में महत्वपूर्ण है, सुधारवादी है। लेकिन यह कितना कारगर होगा, इसके लिए और इंतजार करना होगा। ....  लेख पढ़ें
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