सृजन
हमारे जीवनादर्श राम-कृष्ण काल्पनिक नहीं: समकालीन हिंदी लेखन व पौराणिक आख्यान, बहसः भाग-3 जनता जनार्दन संवाददाता ,  Jun 02, 2017
धर्म मनुष्यता का बोध है, वैश्विक चेतना का विस्तार है। जब कामायनी में मनु महाराज के अवतरण के बाद उन्हें जीवन का उद्देश्य बताया गया, तो प्रसाद लिखते हैं- औरों को हँसते देखो मनु, हंसो और सुख पाओ/ अपने सुख को विस्तृत कर लो, जग को सुखी बनाओ। वास्तव में यह कर्तव्य बोध ही धर्म है। पर आधुनिक विमर्श में मनु खलनायक बना दिए गए हैं और दुर्गा सप्तशती के महिषासुर वध को महिषासुर बलिदान बनाकर महिमामण्डित किया जाता है। ....  लेख पढ़ें
हिंदी में रामकथा लेखक, अंग्रेज़ी में सुपरस्टारः समकालीन हिंदी लेखन व पौराणिक आख्यान, बहसः भाग-2 जनता जनार्दन संवाददाता ,  May 29, 2017
पिछली कड़ी में हमने हिंदी के युवा और बहुचर्चित आलोचक अनंत विजय के लेख 'हिंदी में मिथकों से परहेज क्यों?' का संदर्भ देते हुए व्हाट्सएप के लब्धप्रतिष्ठित 'साहित्य' समूह में चली का जिक्र किया था. इस समूह में देश के सर्वाधिक प्रतिष्ठित विद्वतजनों का अच्छाखासा समूह सक्रिय है, जिनमें साहित्यकार, संपादक, पत्रकार, लेखक, प्राध्यापक, निर्देशक, समीक्षक सभी शामिल हैं. ....  लेख पढ़ें
समकालीन हिंदी लेखन व पौराणिक बनाम मिथ आख्यान, बहसः भाग-1 जनता जनार्दन संवाददाता ,  May 22, 2017
साहित्य जगत में इन दिनों अमिष त्रिपाठी की किताब 'सीता, द वॉरियर ऑफ मिथिला', को लेकर उत्सुकता का माहौल है। सोशल मीडिया पर भी इस किताब को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। पहले केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने लेखक अमिष त्रिपाठी के साथ घंटेभर की बातचीत इस किताब को केंद्र में रखकर की। दोनों की इस बातचीत को फेसबुक पर हजारों लोगों ने देखा। ....  लेख पढ़ें
इंटरनेट कोई समस्या नहीं, अपितु एक सहायक उपकरणः छत्तीसगढ़ में मातृभाषा दिवस पर वक्ताओं के उद्गार विशेष संवाददाता ,  Feb 21, 2017
छत्तीसगढ़ के भिलाई जिले के कल्याण कालेज में आज राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत ने अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर एक सेमिनार का आयोजन किया. इस अवसर पर संस्कृत के प्रकांड विद्वान डॉ महेशचन्द्र शर्मा ने कहा, संस्कृत कोई मृत भाषा नहीं हैं, अपितु मैं यह कहना चाहूंगा कि इस भाषा में संस्कार हैं और ऊर्जा है, जो हमें आत्मिक तौर पर बलवान बनाए रखती हैं. ....  लेख पढ़ें
हम जिस दौर में गुजर रहें हैं, वहां तेजी से बदल रहे हैं पत्रकारिता के मानक: शशि शेखर श्रेष्ठ गुप्ता ,  Feb 13, 2017
देश के दूसरे सबसे बड़े पुस्तक मेले यानी "पटना पुस्तक मेला" में जब एक मंच पर दो दिग्गज पत्रकार नजर आए और सवाल-जवाब का सिलसिला चला तो दर्शक दीर्घा में मौजूद लोगों ने भरपूर आनंद लिया. 'हिन्दुस्तान' के प्रधान संपादक शशि शेखर ने वरिष्ठ टीवी पत्रकार एवं साहित्यकार अनंत विजय के सवालों के खुलकर जवाब दिए. ....  लेख पढ़ें
'वीरप्पन के पास अद्भुत अतिन्द्रिय ज्ञान था' साकेत सुमन ,  Feb 07, 2017
वीरप्पन के मारे जाने के 13 वर्षो बाद 'ऑपरेशन कोकून' के दौरान उसकी हत्या की योजना बनाने और उसे मूर्त रूप देने वाले तमिलनाडु विशेष कार्य बल (एसटीएफ) के अगुवा रहे एक वरिष्ठ भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी ने कहा है कि खूंखार डाकू के पास एक अदभुत अतिन्द्रिय ज्ञान था। ....  लेख पढ़ें
हिंदी को तकनीक के असर से बचाने की पहल जनता जनार्दन डेस्क ,  Jan 04, 2017
बदलते दौर में आम आदमी की जिंदगी का हिस्सा बन गई है तकनीक. इससे जहां सुविधाएं पाना आसान हो रहा है तो वहीं भाषा भी इसके असर से बच नहीं पा रही है, इससे भाषा के हिमायती चिंतित हैं. उन्हें लगता है कि किताबों का दूर होना और तकनीक का हावी होना भाषा को कमजोर कर रहा है, लिहाजा भाषा (हिंदी) समृद्ध रहे, इसके लिए मध्यप्रदेश की राजधानी में एक पुस्तकालय शुरू किया गया है. ....  लेख पढ़ें
त्रिनिदाद एवं टोबैगो में हिंदुओं-मुस्लिमों में कोई भेद नहीं: आलिया एनियाथ सोमरीता घोष ,  Sep 03, 2016
कैरेबियाई द्वीप समूह के देश त्रिनिदाद एवं टोबैगो की भारतीय मूल की लेखिका आलिया एनियाथ का मानना है कि त्रिनिदाद एवं टोबैगो में रह रहे भारतीय मूल के लोगों के बारे में पूरी दुनिया को बताए जाने की जरूरत है, क्योंकि वहां हिंदू और मुस्लिमों के बीच कोई भेद नहीं है और भारत-पाकिस्तान के बीच विवाद से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। ....  लेख पढ़ें
आजीवन वंचितों की मशाल थामे रहीं महाश्वेता देवी जनता जनार्दन डेस्क ,  Jul 30, 2016
लंबे अरसे से मेरे भीतर जनजातीय समाज के लिए पीड़ा की जो ज्वाला धधक रही है, वह मेरी चिता के साथ ही शांत होगी... बांग्ला की सुप्रसिद्ध लेखिका महाश्वेता देवी के ये शब्द जनजातीय समाज के प्रति उनके प्रेम की झलक पेश करते हैं. ....  लेख पढ़ें
सैयद हैदर रजा: कलाकार जिसने चित्रकला को दी अर्थपूर्ण भाषा उमा नैयर ,  Jul 24, 2016
भारतीय कला को यूरोपीय यथार्थवाद के प्रभावों से मुक्ति तथा कला में भारतीय अंतर्दृष्टि का समावेश करने वाले आधुनिक चित्रकार पद्मश्री से सम्मानित सैयद हैदर रजा 92 वर्ष की अवस्था में हमें छोड़कर चले गए, लेकिन भारतीय चित्रकला के इतिहास में उनके ब्रश से टपका 'बिंदु' चिरंतन काल तक बना रहेगा. ....  लेख पढ़ें
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