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प्रकृति
धरती पर चंद्रमा का असरः कभी केवल 18 घंटे का था दिन, बढ़ रही दूरी से जल्द ही 25 घंटे का होगा दिन जनता जनार्दन डेस्क ,  Jun 07, 2018
चंद्रमा के पृथ्वी से दूर जाने के कारण हमारे ग्रह पर दिन लंबे होते जा रहे हैं. एक अध्ययन में यह बात सामने आयी है कि 1.4 अरब वर्ष पहले धरती पर एक दिन महज 18 घंटे का होता था. संभव है कि धरती से चंद्रमा की बढ़ती दूरी के चलते आने वाले समय में धरती पर 25 घंटे का दिन होने लगे. ....  लेख पढ़ें
विश्व पर्यावरण दिवस 2018: जब जीवन ही न होगा, तो कहां होंगे हम जय प्रकाश पाण्डेय ,  Jun 05, 2018
विश्व पर्यावरण दिवस हर साल हमें इस बात का मौका देता है कि हम देखें, समझें और जानें कि प्रकृति के संरक्षण में हर व्यक्ति, परिवार, गांव, शहर, जाति, राज्य, देश और समूचे विश्व की क्या भूमिका है. सारी दुनिया में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है. ....  लेख पढ़ें
विश्व पृथ्वी दिवस : हमें पेड़ लगाने ही होगें,हम स्वार्थी इंसानों के पास और कोई विकल्प नहीं  आकांक्षा सक्सेना ,  Apr 22, 2018
हमने जबसे याद सम्भालीं है तब से यही सुनते चले आ रहे हैं कि पृथ्वी हमारी माता है और सुबह जागते ही पृथ्वी पर पांव रखने से पहले पृथ्वी माता के पांव छूओ। यह हैं हमारे भारतीय संस्कृति और संस्कार पर कहते हैं न पूर्वजों की कहीं बातें सिर्फ हमने सुनी और लिखीं पर अफसोस! अमल में न ला सके। आज हमारी महत्वाकांक्षायें अंतरिक्ष के साथ-साथ पृथ्वी माँ का भी कलेजा चीरती हुई दिखाई पड़ती है कि आज जंगल न के बराबर बचे हैं। एक समय था हर भारतीय चंदन लगाता था पर आज चंदन की लकड़ी के दर्शन दुर्लभ हैं ....  लेख पढ़ें
घर में लगाएं ये लाभकारी पौधेः इनसे बचता है पर्यावरण, बनता है स्वास्थ्य, आती है समृद्धि श्वेता झा ,  Nov 30, 2017
हम सबको इसके लिए अपनी दिनचर्या में कुछ अहम बदलाव लाने होंगे. अब तक मैं, आप, हम सभी ने कई अवसरों पर अपने दोस्तों, रिश्तेदारों को बहुत से तोहफे दिए होंगे, बहुत से लिए भी होंगे, पर क्यों ना हम सब अब प्रण लें आने वाले समय में एक दूसरे को पेड़ पौधें गिफ्ट करें और एक कदम स्वच्छ हवा की ओर बढ़ाएं. ....  लेख पढ़ें
प्रकृति की अनदेखी का खामियाजा भुगतने को रहें तैयार जनता जनार्दन डेस्क ,  Jun 05, 2017
प्रकृति हो या मानव जीवन समाज हो अथवा देश, सभी की उचित स्थिति सुख-समृद्धि तभी तक रह सकती है, जब तक उनमें पर्याप्त संतुलन बना रहे। लेकिन कुछ सालों से पर्यावरण पूरी तरह से असंतुलित हो गया है। पर्यावरण दिवस मनाने के मायने क्या हैं, इसको समझना जरूरी है ....  लेख पढ़ें
पृथ्वी दिवस 2017: धरती माता को बचाने के लिए भारत की पहल पांडुरंग हेगड़े ,  Apr 21, 2017
संयुक्त राष्ट्र 22 अप्रैल को एक विशेष दिवस के रूप में पृथ्वी मातृ दिवस मनाता है। 1970 में 10000 लोगों के साथ प्रारंभ किये गये इस दिवस को आज 192 देशों के एक अरब लोग मनाते हैं। इसका बुनियादी उद्देश्य पृथ्वी की रक्षा और भविष्य में पीढ़ियों के साथ अपने संसाधनों को साझा करने के लिए मनुष्यों को उनके दायित्व के बारे में जागरूक बनाना है। ....  लेख पढ़ें
मानसून और पूर्वानुमानः कितनी सच्चाई, कितना फसाना मंजू चौहान ,  Apr 19, 2017
मानसून कृषि के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि आधी से ज्यादा खेती-बाड़ी मानसूनी बारिश पर ही निर्भर करती है। लेकिन जहां सिंचाई के साधन हैं भी, वहां भी मानसूनी बारिश जरूरी है, क्योंकि बारिश नहीं होगी तो नदियां-झीलें भी सूख जाएंगी जहां से सिंचाई के लिए पानी आता ....  लेख पढ़ें
गौरैया संरक्षण दिवस पर विशेषः आंगन से क्यों गायब हो रही नन्ही गौरैया जनता जनार्दन डेस्क ,  Mar 19, 2017
विज्ञान और विकास के बढ़ते कदम ने हमारे सामने कई चुनौतियां भी खड़ी की हैं, जिससे निपटना हमारे लिए आसान नहीं है। विकास की महत्वाकांक्षी इच्छाओं ने हमारे सामने पर्यावरण की विषम स्थिति पैदा की है, जिसका असर इंसानी जीवन के अलावा पशु-पक्षियों पर साफ दिखता है। ....  लेख पढ़ें
नर्मदा के लिए 'गांधी मॉडल' की जरूरत: पी वी राजगोपाल जनता जनार्दन डेस्क ,  Feb 17, 2017
ग्लोबलाइजेशन के इस दौर में नदियों पर बांध बनाकर बिजली पैदा करने के लिए बड़ी कंपनियों को निवेश के लिए बुलाकर उन्हें जमीन देने की होड़ मची हुई है, यहीं से समस्या पैदा हो रही है। यह पूरी तरह चीनी मॉडल है, जो सब पर हावी है। जहां तक नर्मदा परिक्रमा की बात है, इससे नदी के प्रति जागृति तो आ सकती है। मगर इससे नर्मदा अविरल और प्रवाहमान हो पाएगी, इसमें संदेह है।” ....  लेख पढ़ें
भारत सरकार के साथ गड़बड़ क्या है? पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने पूछा कुशाग्र दीक्षित ,  Jun 19, 2016
जीवों के संरक्षण और पर्यावरण संवेदनशील देश के रूप में भारत की छवि बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान के बावजूद सरकार द्वारा 'नाशक जीवों' की हत्या का समर्थन करने से विदेशों में भारत की छवि धूमिल हुई है. नतीजा है कि विश्व भर में 15 लाख लोग पूछ रहे हैं कि 'भारत सरकार के साथ गड़बड़ क्या है?' ....  लेख पढ़ें
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