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आधी दुनिया
मदर्स डे स्पेशल: मां होना ही सबसे बड़ा तोहफा जनता जनार्दन डेस्क ,  May 08, 2016
जब कोई भी बात या किस्सा मां से जुड़ा हुआ हो तो वह खास ही होता है। आठ मई को 'मदर्स डे' पर आप अनूठे तरीके से मां के प्रति अपने प्यार को जता सकते हैं। इस दिन को सेलिब्रेट करने के तरीकों में नित नए प्रयोग किए जा रहे हैं। ....  लेख पढ़ें
बिहार में बेटियों की संख्या बढ़ी! मनोज पाठक ,  Apr 13, 2016
देश में लिंगानुपात में सुधार के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं. हरियाणा सहित कई राज्यों में लिंगानुपात चिंताजनक स्थिति में पहुंच चुका है, लेकिन बिहार में पिछले 10 वर्षो के दौरान बेटियों की संख्या बढ़ी है, यानी लिंगानुपात में काफी सुधार आया है. यह देश के अन्य राज्यों के लिए सुखद संदेश है. ....  लेख पढ़ें
हां, मैं नारी हूं! कौन कहता है अबला हूं.. प्रभुनाथ शुक्ल ,  Mar 08, 2016
आधुनिक भारतीय समाज में स्त्रियों की सुरक्षा अधिक चिंता और बहस का केंद्रबिंदु बन गया है। यह सवाल संसद से लेकर सड़क तक तैर रहा है। नारी मर्यादा को उघाड़ने वाली कुछ वारदातों ने हमारी संस्कृति को दुनिया के सामने नंगा किया है। महिलाओं के प्रति बढ़ती हिंसा को लेकर भारत दुनिया के निशाने पर है। ....  लेख पढ़ें
आधी आबादी का भयावह सच! ऋतुपर्ण दवे ,  Sep 15, 2015
देश की आधी आबादी का सच बहुत ही दर्दनाक और खौफनाक होता जा रहा है। बात सिर्फ महिला उत्पीड़न ही नहीं उससे भी आगे की है। यौन हिंसा, धमकाना और जान ले लेना बहुत ही आसान सा हो गया है। ऐसा लगता है कि समाज में रहकर भी सुरक्षित नहीं है महिलाएं। रसूख के आगे सुरक्षा और इज्जत के कोई मायने नहीं, या फिर कानून के खौफ का भी डर खत्म! ....  लेख पढ़ें
महाराष्ट्र व गुजरात में लड़कियां कम जनता जनार्दन डेस्क ,  Jun 24, 2015
देश के दो सर्वाधिक समृद्ध राज्यों गुजरात और महाराष्ट्र के सोनाग्राफी केंद्रों की जांच में लड़कियों की संख्या में क्रमशः 73 प्रतिशत और 55 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। राज्यों में शिशु लिंग अनुपात (छह सालों में प्रति 1,000 लड़कों पर लड़कियों की संख्या) देश में सबसे कम है, विशेष रूप से इन राज्यों के पिछड़े जिलों में।महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र के बीड़ में (807) और गुजरात के सूरत जिले में (831) हैं। देश में यह औसतन 914 है। महाराष्ट्र में बाल विवाह के 603 मामलों में से 23 में फैसला आ चुका है, जबकि वर्ष 2013-14 के 580 मामले लंबित पड़े हैं। बाल विवाह अधिनियम के उल्लंघन के मामले में गुजरात में अभी तक किसी को भी दोषी नहीं ठहराया गया है, हालांकि 659 मामले दर्ज हैं। ....  लेख पढ़ें
स्त्री शक्ति की अहमियत को पहचानिए डॉ. अल्का आर गुप्ता ,  Jun 11, 2015
भारतिय इतिहास स्त्री-पुरुष साहचर्य पर टीके है। प्राचीन काल के पाण्डुलिपियों में स्त्री-पुरुष को समान आंका गया है बल्कि कहीं- कहीं तो स्त्री पुरुष से श्रेष्ट बताई गयी है।उदाहरणस्वरुप शतपथब्राहा्ण में उल्लेखित है कि माता के रुप में स्त्री नवजात बच्चे की श्रेष्टतम आचार्य होती है। बच्चे के मार्गदरशन करने और चारित्रिक उन्नयन करने में स्त्री पुरुष से सौ गुना श्रेष्ट है। मनुस्मृति में कहा गया है कि सौ आचार्यों की अपेक्षा पिता और सहस्त्र पिताओं की अपेक्षा माता गौरव में अधिक है। ....  लेख पढ़ें
'माई च्वाइस' के बदले देवी जैसा सम्मान तो नहीं मिलना बी.पी.गौतम ,  Apr 22, 2015
भारत लोकतांत्रिक गणराज्य है, यहां रहने वाला प्रत्येक नागरिक पूर्ण रूप से स्वतंत्र है। सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हैं। जाति, धर्म, क्षेत्र, वर्ग, भाषा, रंग और लिंग को लेकर भी कोई भेद नहीं रखा गया है। अभिव्यक्ति की भी आज़ादी है, इस सबके बीच देश, समाज और मानवता के प्रति प्रत्येक नागरिक के दायित्व भी निश्चित हैं, जिन पर कोई चर्चा तक नहीं करना चाहता। मनमानी को भी लोग अभिव्यक्ति से जोड़ने लगे हैं। ....  लेख पढ़ें
मदर मिल्क बैंक: कामकाजी महिलाओं के लिए वरदान जनता जनार्दन डेस्क ,  Apr 20, 2015
आरती कटारिया (24) की सास अपने पोते-पोतियों के जन्म के बीच उचित अंतराल की पक्षधर थीं। लेकिन आरती के पति की लड़का होने की ख्वाहिश से सब कुछ बदल गया। आरती ने एक लड़की को जन्म दिया और यहीं से समस्या शुरू हो गई। हालांकि, आरती ने एक हृष्ट-पुष्ट लड़के को भी जन्म दिया। लेकिन भारी रक्तस्रव और शुरुआती कमजोरी और बाद में उसके पेशेवर करियर की वजह से उसके बच्चों और पोषण के बीच एक बाधा उत्पन्न हो गई। ....  लेख पढ़ें
देह अधिकार पर विमर्श का आधार अनंत विजय ,  Apr 15, 2015
नारेबाजी को तो स्त्री की ईमानदार अभिव्यक्तियों के खिलाफ जानबूझकर स्थापित किया गया और उसे ही स्त्री लेखन का पैमाना बना दिया गया । जो देह विमर्श की पूरी राजनीति, पितृसत्तास्तमक रणनीति के साथ की गई थी, उसने बहुत सी लेखिकाओं को भ्रमित किया । बहुत से लोग, जो गंभीर काम कर सकते थे, इसी की भेंट चढ़ गए । ....  लेख पढ़ें
मासिक धर्म को लेकर बदल रही सोच जनता जनार्दन डेस्क ,  Apr 15, 2015
तस्वीरें साझा करने वाली वेबसाइट-इंस्टाग्राम ने टोरंटो की रहने वाली कवयित्री रूपी कौर की मासिक धर्म के दौरान कपड़ों पर लगे खून के धब्बों वाली तस्वीर यह कहकर अपने वेबसाइट से हटा दी कि यह तस्वीर सामाजिक दिशा निर्देशों के विरुद्ध जाती है। मासिक धर्म और उससे जुड़ी बातों को लेकर समाज का रवैया हमेशा से रूढ़िवादी रहा है, जिस कारण महिलाओं के जीवन की एक सामान्य और स्वाभाविक क्रिया शर्म, लज्जा एवं चुप्पी का विषय बनकर रह गई है। ....  लेख पढ़ें
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